ट्रंप के फैसले से शेयर बाजार धड़ाम, सेंसेक्स 1600 अंक टूटा
ट्रंप ने खत्म किया ईरान सीज़फायर, खाड़ी में मंडराया युद्ध का खतरा; भारत में क्रूड ऑयल और महंगाई बढ़ने की भारी आशंका।
Iran US War: पश्चिम एशिया में जिस सीज़फायर के बाद पूरी दुनिया ने राहत की सांस ली थी, वह राहत केवल कुछ ही हफ्तों में काफूर हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ जारी सीज़फायर को खत्म करने के अचानक किए गए ऐलान और ईरान पर दागी गईं मिसाइलों के बाद दुनिया भर के बाजारों में हाहाकार मच गया है।
डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'द फेडरल देश' के विशेष शो में वरिष्ठ एंकर मनीष कुमार ने इस वैश्विक संकट पर 'पुथिया थलाइमुराई' (Puthiya Thalaimurai) के एडिटर और वरिष्ठ पत्रकार गणपति के साथ बेहद विस्तार से चर्चा की। शो में साफ तौर पर आगाह किया गया कि ट्रंप का यह आक्रामक स्टैंड भारतीय अर्थव्यवस्था, सप्लाई चेन और आम जनता की जेब पर बेहद भारी पड़ने वाला है।
ट्रंप के फैसले से शेयर बाजार और क्रूड ऑयल में मची खलबली
एंकर मनीष कुमार ने शो की शुरुआत में बताया कि ट्रंप के इस अचानक आए बयान के बाद भारतीय शेयर बाजार ताश के पत्तों की तरह ढह गया। कारोबार के दौरान बीएसई (BSE) सेंसेक्स में करीब 2,000 अंकों तक की भीषण गिरावट देखी गई और अंत में यह 1,600 अंक नीचे गिरकर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी (Nifty) भी एक ही दिन में 500 अंकों की भारी गिरावट के साथ बंद हुआ।
दूसरी तरफ, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में अचानक 5% की भारी तेजी दर्ज की गई है, जो सीज़फायर के दौरान $70 प्रति बैरल तक नीचे आ गई थीं।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में फिर बढ़ेगा संकट, भारत पर पड़ेगा सीधा असर
शो के मुख्य मेहमान गणपति सर ने स्थिति का विश्लेषण करते हुए बताया कि ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी हमलों में उनका एक नागरिक मारा गया है। इसके पलटवार में ईरान समर्थित गुटों ने बहरीन सहित कई खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेसों पर जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं।
वरिष्ठ पत्रकार गणपति ने भारत के लिहाज से सबसे बड़ी चिंता जताते हुए कहा:
"इस तनाव की वजह से 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (खाड़ी का सबसे मुख्य समुद्री व्यापार मार्ग) एक बार फिर युद्ध की लपेट में आ गया है। भारत जैसी ऊर्जा आयात पर निर्भर (Energy Import Dependent) अर्थव्यवस्था के लिए यह बेहद खतरनाक स्थिति है। इससे शिपिंग रूट बाधित होगा, जिससे कच्चे तेल और एलपीजी (LPG) की सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा जाएगी।"
उन्होंने आगे कहा कि अभी एक हफ्ते पहले ही भारत में कमर्शियल एलपीजी के दाम थोड़े कम हुए थे और जनता को पेट्रोल-डीजल की कीमतें घटने की उम्मीद थी, लेकिन अब सरकार के लिए खुदरा कीमतें कम करना नामुमकिन हो जाएगा। उल्टा, भारत में महंगाई का एक नया दौर शुरू हो सकता है और गैस राशनिंग की नौबत भी आ सकती है।
इजरायल का दबाव और ट्रंप की 'पैनिक' डिप्लोमेसी
शो में एंकर मनीष कुमार ने सवाल उठाया कि ईरान में इस वक्त उनके सुप्रीम लीडर (खामनेई) के फ्यूनरल प्रोसेशन (शोक सभा) में करोड़ों लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है, जिसमें भारत सहित दुनिया भर के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। क्या ट्रंप ईरान की इस एकजुटता को देखकर पैनिक में रिएक्ट कर रहे हैं?
इस पर गणपति ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि इस पूरे तनाव के पीछे इजरायल का भारी दबाव है। इजरायल को अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता कभी पसंद नहीं था। इजरायल चाहता है कि अमेरिका बातचीत का रास्ता छोड़कर ईरान के परमाणु ठिकानों और मिसाइल कैपेसिटी को पूरी तरह तबाह कर दे। अमेरिका ने कुछ हफ्तों में ईरान में 'सत्ता परिवर्तन' (Regime Change) का जो ख्वाब देखा था, वह पूरी तरह फेल हो चुका है, जिसके चलते ट्रंप अब आक्रामक और अस्थिर फैसले ले रहे हैं।
हर दो दिन में स्टैंड बदल लेते हैं ट्रंप: इंटरनेशनल डिप्लोमेसी का मज़ाक
स्पेन और इटली जैसे नाटो (NATO) देशों के रुख का हवाला देते हुए गणपति सर ने कहा कि यूरोपीय देश भी ट्रंप की इस नीति से तंग आ चुके हैं क्योंकि ट्रंप 'राजनयिक बातचीत' (Diplomacy) और 'धमकी' के बीच का अंतर ही भूल गए हैं। ईरान पर एक ही दिन में लगभग 70 हवाई हमले किए गए हैं, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञ ने चेतावनी दी कि जब तक ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति रहेंगे, वैश्विक बाजारों में यह अनिश्चितता और तनाव बना रहेगा, क्योंकि वे हर दो दिन में अपना बयान बदल लेते हैं।
पश्चिम एशिया फिर बना बारूद का ढेर
एंकर मनीष कुमार ने चर्चा का समापन करते हुए कहा कि पाकिस्तान और कतर जैसे देशों की मध्यस्थता (Mediation) के प्रयास धरे के धरे रह गए हैं। पश्चिम एशिया एक बार फिर भीषण युद्ध के मैदान में तब्दील होने जा रहा है, जिससे न केवल खाड़ी देशों (यूएई, कुवैत, कतर, बहरीन) की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित होंगी, बल्कि भारत के सामने भी तेल, गैस और महंगाई का एक अभूतपूर्व संकट खड़ा होने जा रहा है।
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