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सोनम वांगचुक का अनशन: 20वें दिन गंभीर हालत, क्या बल प्रयोग करेगी सरकार?

10 किलो वजन घटने के बाद भी अनशन पर अड़े सोनम वांगचुक; 20 जुलाई के संसद मार्च से पहले इरोम शर्मिला फॉर्मूले की तैयारी प्रतीत हो रही है.


Sonam Wangchuk: राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर इस वक्त देश के सबसे बड़े और ज्वलंत छात्र आंदोलन का केंद्र बना हुआ है. लद्दाख के मशहूर पर्यावरणविद् और प्रख्यात वैज्ञानिक सोनम वांगचुक के आमरण अनशन का आज 20वां दिन है. पिछले 20 दिनों से उन्होंने अन्न का एक दाना भी मुंह में नहीं डाला है. उनकी सेहत लगातार बिगड़ती जा रही है, लेकिन नीट (NEET) पेपर लीक विवाद को लेकर वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं.


डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'द फेडरल देश' के शो 'ज्वलंत मुद्दा' में एंकर प्रदीप सहगल ने वरिष्ठ पत्रकार मनीष कुमार के साथ इस आंदोलन के पीछे की हकीकत, सरकार की रहस्यमयी चुप्पी और आने वाले 48 घंटों में होने वाले संभावित प्रशासनिक एक्शन को लेकर एक बड़ा और खोजी विश्लेषण पेश किया है.

1. पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने तोड़ा था पिता का अनशन, बेटे की जान पर उदासीन मोदी सरकार
बहस की शुरुआत करते हुए एंकर प्रदीप सहगल ने कहा कि सोनम वांगचुक अपने किसी निजी फायदे या चुनाव लड़ने के लिए नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य को बचाने के लिए यह अनशन कर रहे हैं.

वरिष्ठ पत्रकार मनीष कुमार ने इतिहास का एक बेहद दिलचस्प और भावुक पहलू साझा करते हुए बताया:

"लद्दाख के सोनम वांगचुक एक बहुत बड़ी शख्सियत हैं. पूर्व में उनके पिता भी एक बड़े सामाजिक मुद्दे को लेकर अनशन पर बैठ चुके थे. तब देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने खुद जाकर उनसे मुलाकात की थी और उनका अनशन तुड़वाया था. लेकिन आज जंतर-मंतर से महज दो किलोमीटर के दायरे में संसद भवन, पीएम आवास और गृह मंत्रालय होने के बावजूद, सरकार की तरफ से बात करने के लिए किसी क्लर्क तक को नहीं भेजा गया है."

मनीष कुमार ने कहा कि सोनम वांगचुक वही वैज्ञानिक हैं जिनके अद्वितीय आविष्कारों (जैसे सोलर हीटेड टेंट्स) की बदौलत सियाचिन और लद्दाख की कड़ाके की ठंड में हमारे देश के सेना के जवान सुरक्षित रहते हैं. ऐसे देशभक्त और कीमती इंसान की जान को लेकर सरकार की यह बेरुखी बेहद हैरान करने वाली है.

2. 10 किलो वजन घटा, चलने की स्थिति में नहीं वांगचुक, मल्टी-ऑर्गन फेलियर का खतरा
प्रदीप सहगल ने वांगचुक के स्वास्थ्य बुलेटिन पर गहरी चिंता जताते हुए बताया कि 20 दिनों की भूख हड़ताल के कारण वांगचुक का वजन लगभग 10 किलो गिर चुका है. उनका ब्लड शुगर लगातार खतरनाक स्तर तक नीचे जा रहा है और वे फिलहाल अपने पैरों पर खड़े होने की स्थिति में भी नहीं हैं. डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उन्होंने अनशन नहीं तोड़ा, तो उनके मल्टी-ऑर्गन फेलियर (कई अंगों का काम बंद करना) का खतरा पैदा हो सकता है.

3. कांग्रेस और समूचे विपक्ष का समर्थन, लेकिन 'सीजेपी' से बनाई दूरी
शो में इस बात का भी खुलासा हुआ कि वांगचुक की बिगड़ती हालत को देखकर अब पूरा विपक्ष उनके समर्थन में उतर आया है. कांग्रेस आलाकमान के सबसे कद्दावर नेता और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पर ट्वीट कर वांगचुक की जान कीमती बताई, जिसके तुरंत बाद कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा उनसे मिलने जंतर-मंतर पहुंचे और अनशन तोड़ने की अपील की. इसके अलावा डिंपल यादव, आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल, सांसद चंद्रशेखर आजाद 'रावण' और कॉमेडियन कुणाल कामरा भी उनसे मिल चुके हैं.

हालांकि, मनीष कुमार ने स्पष्ट किया:

"विपक्ष की पूरी संवेदना सोनम वांगचुक के साथ है, लेकिन वे इस आंदोलन का आयोजन कर रही 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) से दूरी बनाए हुए हैं. अन्ना आंदोलन से हाथ जला चुका विपक्ष फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है. यही कारण है कि किसी भी नेता के आधिकारिक बयान में 'सीजेपी' या उसके प्रमुखों का नाम शामिल नहीं है, वे सिर्फ वांगचुक के चेहरे को सपोर्ट कर रहे हैं."

4. अगले 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण: इरोम शर्मिला की तरह फोर्स-फीडिंग की तैयारी?
20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है. इसी दिन वांगचुक और प्रदर्शनकारी छात्र संसद भवन तक एक बड़ा मार्च निकालने वाले हैं. इसी बीच दिल्ली के पुलिस कमिश्नर का बदला जाना भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

एंकर प्रदीप सहगल के सवाल पर मनीष कुमार ने आने वाले दो दिनों के भीतर एक बड़े प्रशासनिक क्रैकडाउन (कार्रवाई) की आशंका जताई है. दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा हाल ही में दिए गए आदेश - 'कि वे नहीं चाहते कि किसी की जान इस तरह जाए' - की आड़ लेकर मोदी सरकार अगले 48 घंटों में (शनिवार या रविवार को) सोनम वांगचुक को जबरन (Forcefully) हिरासत में लेकर अस्पताल में भर्ती करा सकती है. सरकार मणिपुर की इरोम शर्मिला वाला फॉर्मूला अपनाकर कोर्ट के आदेश का हवाला देकर उन्हें फोर्स-फीड (जबरन नली से खाना खिलाना) कर सकती है ताकि 20 जुलाई को होने वाले संसद मार्च के बड़े एस्केलेशन को रोका जा सके.


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