
8 मई के बाद बंगाल में क्या होगा? ममता बनर्जी के रुख ने बढ़ाई हलचल
पश्चिम बंगाली की सीएम ममता बनर्जी का कहना है कि वो इस्तीफा नहीं देंगी। बता दें कि सात मई मध्य रात्रि को टीएमसी का कार्यकाल खत्म हो रहा है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय एक असाधारण और संभावित संवैधानिक संकट की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव हार चुकी हैं, लेकिन उन्होंने लगातार दो बार सार्वजनिक रूप से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है।इसी बीच राज्य की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 7 मई की रात 12 बजे समाप्त हो रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह बन गया है कि अगर ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देती हैं, तो 8 मई की रात 12 बजे के बाद पश्चिम बंगाल की सत्ता किसके हाथ में होगी?
राजनीतिक स्थिति को और जटिल बनाते हुए भाजपा ने घोषणा की है कि उसका नया मुख्यमंत्री 9 मई को शपथ लेगा। यानी 8 मई से 9 मई के बीच राज्य में संवैधानिक व्यवस्था कैसे चलेगी, यह अब चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।
विधानसभा का कार्यकाल खत्म होते ही क्या होगा?
संविधान का अनुच्छेद 172 राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल पांच वर्ष निर्धारित करता है। यह अवधि विधानसभा की पहली बैठक की तारीख से गिनी जाती है।पश्चिम बंगाल विधानसभा की पहली बैठक 8 मई 2021 को हुई थी। इस हिसाब से मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 की रात समाप्त हो जाएगा।
संविधान के अनुसार पांच वर्ष पूरे होते ही विधानसभा स्वतः भंग (Automatic Dissolution) हो जाती है। इसके लिए किसी अलग आदेश की आवश्यकता नहीं होती।इसका सीधा अर्थ है कि रात 12 बजे के बाद वर्तमान विधानसभा अस्तित्व में नहीं रहेगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायक सभी अपने संवैधानिक पद और अधिकार खो देंगे।
अब राज्यपाल की भूमिका क्यों अहम हो गई है?
ऐसी स्थिति में अब सारी नजरें राज्यपाल आर.एन. रवि पर टिक गई हैं।संविधान का अनुच्छेद 164 कहता है कि मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद राज्यपाल के “प्रसाद पर्यंत” अपने पद पर बने रहते हैं। यदि कोई सरकार बहुमत खो देती है या चुनाव हार जाती है, तो राज्यपाल के पास उसे हटाने और बहुमत वाले दल को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का अधिकार होता है। अगर मुख्यमंत्री इस्तीफा देने से इनकार कर दे, तो राज्यपाल मंत्रिपरिषद को बर्खास्त भी कर सकते हैं।
संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, इसलिए ममता बनर्जी का मौजूदा कार्यकाल भी स्वतः खत्म माना जाएगा, चाहे वे औपचारिक इस्तीफा दें या नहीं।
क्या ममता को कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहने को कहा जा सकता है?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राज्यपाल परंपरा के अनुसार ममता बनर्जी को नए मुख्यमंत्री के शपथ लेने तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहने के लिए कह सकते हैं? इस पर जानकार कहते हैं कि राज्यपाल 9 मई तक के लिए कोई अंतरिम व्यवस्था कर सकते हैं। यह एक “अभूतपूर्व स्थिति” है और ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। हालांकि संवैधानिक परंपरा यह रही है कि मौजूदा मुख्यमंत्री तब तक पद पर बने रहते हैं, जब तक नई सरकार शपथ नहीं ले लेती। कानूनी तौर पर इसका स्पष्ट उदाहरण भले ही न हो, लेकिन राज्यपाल के पास अंतरिम प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने की शक्ति मौजूद है।
नई सरकार बनने की प्रक्रिया क्या होगी?
चुनाव आयोग के अनुसार विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने के बाद राज्यपाल नई विधानसभा के गठन की प्रक्रिया शुरू करेंगे। इसके तहत नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाई जाएगी, विधानसभा का गठन होगा, बहुमत वाले दल या गठबंधन को सरकार बनाने का न्योता दिया जाएगा
नया मुख्यमंत्री शपथ लेगा
भाजपा ने संकेत दिया है कि उसका मुख्यमंत्री 9 मई को शपथ ले सकता है। ऐसे में 8 और 9 मई के बीच का समय संवैधानिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
“इस्तीफा नहीं दूंगी”: ममता का सख्त रुख
ममता बनर्जी ने 5 मई 2026 को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कहा था कि वे इस्तीफा नहीं देंगी।उन्होंने कहा, “वो इस्तीफा नहीं देंगी इसका सवाल ही नहीं उठता। वो हारी नहीं हैं, वो राजभवन नहीं जाएंगी।” ममता ने चुनाव परिणामों पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि उनकी पार्टी को “हराया गया है।” उन्होंने कहा, “वे चुनाव आयोग के माध्यम से हमें हरा सकते हैं, लेकिन नैतिक रूप से हमने चुनाव जीता है।”इसके अगले दिन, 6 मई को टीएमसी के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक में भी उन्होंने अपना रुख दोहराया। ममता ने कहा, वो इस्तीफा नहीं देंगी, चाहे राज्यपाल बर्खास्त कर दें। वो चाहती हैं कि यह एक काला दिन बने।”
क्या बंगाल में संवैधानिक टकराव बढ़ेगा?
अगर ममता बनर्जी अपने फैसले पर कायम रहती हैं और नई सरकार के गठन में किसी तरह का गतिरोध पैदा होता है, तो यह भारतीय संवैधानिक इतिहास की दुर्लभ घटनाओं में शामिल हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ घंटे पश्चिम बंगाल की राजनीति ही नहीं, बल्कि भारतीय संघीय ढांचे और संवैधानिक परंपराओं के लिए भी बेहद अहम साबित हो सकते हैं।अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्यपाल संवैधानिक परंपरा निभाते हुए ममता को कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनाए रखते हैं या फिर कोई नई संवैधानिक व्यवस्था लागू करते हैं।

