
पहले चरण के बाद बढ़ी गर्मी, बंगाल में अब दूसरे फेज में असली मुकाबला
पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान के बाद अब बंगाल चुनाव का दूसरा चरण निर्णायक है, जहां 142 सीटों पर TMC और बीजेपी के बीच सत्ता की सीधी जंग होगी।
पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को संपन्न हुआ। मतदान के बाद जहां टीएमसी के नेता कह रहे हैं दूसरे चरण से पहले ही बंगाल की जनता का आदेश उनके पक्ष में आ चुका है, वहीं गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि 152 सीटों में कम से कम 110 सीटें जीतेंगे। इस लिहाज से दूसरे चरण का चुनाव दोनों दलों के लिए औपचारिक मात्र रह गया है। अगर बंगाल के चुनाव को देखें तो आजादी के बाद पहली बार मतदान का प्रतिशत 90 फीसद के पार रहा, हालांकि 2006 के बाद से बंगाल में मतदान का प्रतिशत 80 फीसद के पार रहा है। ऐसे में दूसरे चरण के मतदान पर हर किसी की निगाह टिक गई है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण की 152 सीटों पर मतदान के बाद अब नजरें दूसरे और निर्णायक चरण पर टिक गई हैं। 29 अप्रैल को होने वाले इस चरण में 142 सीटों पर वोटिंग होगी, जिसे चुनाव का ‘फाइनल राउंड’ माना जा रहा है। यह चरण न केवल सियासी रूप से अहम है, बल्कि इससे यह भी तय हो सकता है कि राज्य की सत्ता किसके हाथ में जाएगी।
दक्षिण बंगाल में असली मुकाबला
पहला चरण जहां उत्तरी बंगाल और जंगलमहल के इलाकों में केंद्रित था, जिन्हें बीजेपी का गढ़ माना जाता है, वहीं दूसरा चरण दक्षिण बंगाल के उस ‘कोर बेल्ट’ में हो रहा है जिसे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का अभेद्य किला कहा जाता है। इस क्षेत्र में कोलकाता और उसके आसपास के शहरी इलाके, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, हावड़ा, नदिया, पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर तथा पूर्व-पश्चिम बर्धमान जैसे जिले शामिल हैं।
142 सीटों पर 1448 उम्मीदवार मैदान में
दूसरे चरण में कुल 142 सीटों पर 1448 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और कांग्रेस ने सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि बीजेपी 141 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। वहीं, सीपीएम ने करीब 100 सीटों पर अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं।
2021 के आंकड़े: TMC का दबदबा
अगर पिछले चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें, तो 2021 में इन 142 सीटों में से 123 सीटें TMC ने जीती थीं, जबकि बीजेपी को सिर्फ 18 सीटों पर संतोष करना पड़ा था। खास बात यह है कि कोलकाता और 24 परगना क्षेत्र में बीजेपी खाता तक नहीं खोल पाई थी। यही वजह है कि इस बार बीजेपी ने इस इलाके पर खास फोकस किया है।
सीमा और समीकरण: चुनावी मुद्दों का केंद्र
दूसरे चरण की कई सीटें बांग्लादेश सीमा से सटी हुई हैं, खासकर नदिया और उत्तर 24 परगना जिले की सीटें। इन इलाकों में मुस्लिम मतदाता बड़ी संख्या में हैं, जो TMC के मजबूत समर्थन आधार माने जाते हैं। वहीं, मतुआ समुदाय भी कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है, जहां नागरिकता संशोधन कानून (CAA) एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है।
बीजेपी इन क्षेत्रों में अवैध घुसपैठ और तुष्टीकरण को प्रमुख चुनावी मुद्दा बना रही है, जबकि TMC अपने पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने में जुटी है।
‘राजनीतिक प्रयोगशाला’ में बीजेपी का टेस्ट
बीजेपी ने पिछले पांच वर्षों में दक्षिण बंगाल के इस इलाके को अपनी ‘राजनीतिक प्रयोगशाला’ के रूप में विकसित करने की कोशिश की है। संदेशखाली जैसे मुद्दों और स्थानीय असंतोष को उठाकर पार्टी ने यहां अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति अपनाई है।अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी की यह रणनीति चुनावी नतीजों में कितनी सफल होती है, या फिर ममता बनर्जी एक बार फिर अपने गढ़ को बचाने में कामयाब रहती हैं।

