
'अंधेरे में टॉर्च जलाकर क्या हो रहा था?' बंगाल स्ट्रांग रूम विवाद पर उठे तीखे सवाल
पश्चिम बंगाल में 4 मई की मतगणना से पहले 'स्ट्रांग रूम' की सुरक्षा को लेकर भारी राजनीतिक घमासान छिड़ गया है। टीएमसी ने सीसीटीवी फुटेज जारी कर आरोप लगाया है कि कोलकाता के एक मतगणना केंद्र पर बैलट बॉक्स के साथ छेड़छाड़ हुई है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे आने में अब कुछ ही समय बचा है, लेकिन राज्य में 'ईवीएम' और 'बैलट बॉक्स' की सुरक्षा को लेकर एक नया और गहरा विवाद खड़ा हो गया है। 'कैपिटल बीट' (Capital Beat) पर हुई एक तीखी चर्चा में सबसे बड़ा सवाल यही उठा "आखिर मतगणना से पहले स्ट्रांग रूम को क्यों खोला गया?" तृणमूल कांग्रेस (TMC) द्वारा जारी सीसीटीवी फुटेज ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनाव की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 'द फेडरल' ने इस मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार शिखा मुखर्जी, टीएमसी प्रवक्ता शुभंकर भट्टाचार्य और भाजपा प्रवक्ता चार्ल्स नंदी के साथ विस्तार से चर्चा की।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद तब शुरू हुआ जब टीएमसी ने कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंडोर स्टेडियम का एक सीसीटीवी फुटेज साझा किया। टीएमसी का दावा है कि इस फुटेज में संदिग्ध लोग स्ट्रांग रूम के भीतर बैलट बॉक्स के साथ छेड़छाड़ करते या उन्हें इधर-उधर करते दिख रहे हैं, और वह भी तब जब वहां किसी राजनीतिक दल का प्रतिनिधि मौजूद नहीं था।
यह स्ट्रांग रूम उत्तरी कोलकाता की सात विधानसभा सीटों के भाग्य को अपनी कोख में समेटे हुए है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद इस जगह का दौरा किया और इसे लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ बताया। नियम यह कहते हैं कि एक बार चुनाव के बाद ईवीएम और बैलट बॉक्स सील हो जाएं, तो उन्हें मतगणना के दिन से पहले नहीं खोला जा सकता।
अजीबोगरीब स्पष्टीकरण और नियमों की धज्जियाँ
वरिष्ठ पत्रकार शिखा मुखर्जी ने चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण को "हास्यास्पद" बताया। चुनाव आयोग (CEO) का तर्क था कि स्ट्रांग रूम के भीतर बिजली नहीं थी, इसलिए अधिकारी 'टॉर्च' जलाकर पोस्टल बैलट (Postal Ballots) को छाँटने के लिए अंदर गए थे।
शिखा मुखर्जी ने सवाल उठाया, "यह कैसे संभव है कि कोलकाता जैसे शहर के एक महत्वपूर्ण स्ट्रांग रूम में बिजली न हो? और अगर बिजली नहीं थी, तो टॉर्च जलाकर अंदर जाने की इतनी जल्दी क्या थी? नियमों के अनुसार, एक बार बैलट अंदर जाने के बाद आप उनके साथ कुछ नहीं कर सकते।" उन्होंने बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल से बेहतर और पारदर्शी जवाब की मांग की।
बीजेपी का बचाव: "हार का बहाना ढूंढ रही हैं ममता"
बीजेपी प्रवक्ता चार्ल्स नंदी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, "सबसे पहली बात तो यह है कि स्ट्रांग रूम खोला ही नहीं गया था। ये दावे पूरी तरह गलत हैं।" नंदी ने इस बात से भी इनकार किया कि वहां बीजेपी का कोई प्रतिनिधि मौजूद था।
नंदी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अपनी संभावित हार को देखते हुए पहले से ही 'स्क्रिप्ट' तैयार कर रही हैं। उन्होंने दावा किया, "ममता बनर्जी जानती हैं कि वह हार रही हैं, इसलिए 4 मई के बाद वह कहेंगी कि बीजेपी ने उनके वोट चुरा लिए। यह सब जनता का ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है।"
टीएमसी का पलटवार: "जवाबदेही किसकी है?"
टीएमसी प्रवक्ता शुभंकर भट्टाचार्य ने पलटवार करते हुए पूछा कि अगर बीजेपी वहां नहीं थी, तो चुनाव आयोग ने यह सब होने कैसे दिया? उन्होंने कहा, "जब ईवीएम सील हो जाती हैं, तो स्ट्रांग रूम का दरवाजा किसी भी कीमत पर नहीं खुलना चाहिए। अंधेरा क्यों था? टॉर्च क्यों जलाई गई? ये बुनियादी सवाल हैं जिनका जवाब आयोग को देना होगा।"
भट्टाचार्य ने जोर देकर कहा कि सबूत पेश करने और स्थिति साफ करने की जिम्मेदारी अब चुनाव आयोग की है। उन्होंने कहा कि टीएमसी के पास ठोस सीसीटीवी फुटेज है और यह किसी भी पार्टी का अधिकार है कि वह अपने वोटों की सुरक्षा पर सवाल उठाए।
भरोसे का संकट और 'एग्जिट पोल' पर संदेह
चर्चा के दौरान शिखा मुखर्जी ने बताया कि बंगाल में चुनाव आयोग और जनता के बीच 'भरोसे का संकट' (Trust Deficit) बहुत गहरा हो गया है। उन्होंने कहा कि पिछले 5-7 सालों से मतदाता सूची में गड़बड़ी और ईवीएम के साथ छेड़छाड़ के नैरेटिव सार्वजनिक चर्चा में रहे हैं।
पैनल ने एग्जिट पोल के आंकड़ों और पोलस्टर प्रदीप गुप्ता के उस बयान पर भी चर्चा की, जिसमें उन्होंने कहा था कि बंगाल का मतदाता बोलने से डर रहा है। मुखर्जी ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा, "बंगाल के लोग सड़कों पर, बाजारों में और हर जगह खुलकर बात कर रहे हैं। जो लोग बाहर आकर निडर होकर वोट डाल सकते हैं, वे अपनी राय देने से क्यों डरेंगे? यह तर्क गले नहीं उतरता।"
अविश्वास और आक्रोश का चुनाव
बहस के अंत में किसी एक राय पर सहमति नहीं बन पाई। बीजेपी ने इसे राजनीतिक ड्रामा बताया, जबकि टीएमसी ने इसे लोकतंत्र की हत्या की कोशिश करार दिया। शिखा मुखर्जी ने स्थिति को संक्षेप में बताते हुए कहा, "इस चुनाव ने न केवल अविश्वास पैदा किया है, बल्कि लोगों के भीतर एक 'आक्रोश' (Rage) भर दिया है।"
अब सवाल यह है कि यह आक्रोश 4 मई को किस दिशा में जाएगा? क्या चुनाव आयोग अपनी खोई हुई साख वापस पा सकेगा? इन सभी सवालों का जवाब रविवार की सुबह ईवीएम खुलने के साथ ही मिलेगा।

