बंगाल में बीजेपी का महिला कार्ड बनाम ग्राउंड रियलिटी, किसकी होगी जीत?
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बंगाल में बीजेपी का महिला कार्ड बनाम ग्राउंड रियलिटी, किसकी होगी जीत?

बंगाल में बीजेपी का ‘महिला अपमान’ मुद्दा जमीनी मुद्दों से टकरा रहा है। चुनाव में मतदाता सूची, योजनाएं और स्थानीय नेतृत्व ज्यादा अहम नजर आ रहे हैं।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और उनकी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पारित न होने के बाद विपक्ष को घेरने की कोशिश तेज कर दी है। इसी संदर्भ में वरिष्ठ पत्रकार शिखा मुखर्जी (Shikha Mukherjee) और आरती आर जेरथ (Arati R Jerath) ने एक चर्चा में यह विश्लेषण किया कि क्या “महिलाओं का अपमान” वाला नैरेटिव पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को घेरने में सफल होगा।

शिखा मुखर्जी का मानना है कि यह रणनीति कारगर नहीं होगी। उन्होंने कहा कि इस समय पश्चिम बंगाल में महिला आरक्षण कोई प्रमुख मुद्दा नहीं है। उनके अनुसार, लोगों की असली चिंता यह है कि वे शांतिपूर्वक मतदान कर पाएंगे या नहीं और क्या उनके नाम मतदाता सूची में मौजूद हैं।BJP का चुनावी अभियान, जो शुरुआत में राज्य के स्थानीय मुद्दों और मतदाता सूची संशोधन पर केंद्रित था, अब अचानक महिला मुद्दों की ओर मुड़ गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर महिलाओं के प्रतिनिधित्व को रोकने का आरोप लगाया है, लेकिन मुखर्जी का मानना है कि यह नैरेटिव जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाता।

उन्होंने बताया कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर लोगों में चिंता है और प्रभावित लोगों में लगभग 60 प्रतिशत महिलाएं हैं। ऐसे में यह मुद्दा BJP के लिए समर्थन के बजाय नाराजगी पैदा कर सकता है।

BJP पर दोहरे मापदंड का सवाल

महिलाओं के प्रतिनिधित्व को लेकर BJP के अपने रिकॉर्ड पर भी सवाल उठ रहे हैं। इस चुनाव में पार्टी ने केवल लगभग 11 प्रतिशत महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है, जो TMC से काफी कम है। मुखर्जी ने कहा कि ममता बनर्जी की पार्टी ने लंबे समय से महिलाओं को आगे बढ़ाया है और उन्हें अधिक प्रतिनिधित्व दिया है।उनके अनुसार, बंगाल की महिलाएं आश्वस्त हैं कि उनकी आवाज दबाई नहीं जा रही है और राज्य में पंचायत स्तर पर आरक्षण का लंबा अनुभव रहा है। आरती जेरथ ने भी इस बात से सहमति जताई और कहा कि संसद में महिला आरक्षण जैसे मुद्दे अभी मतदाताओं के लिए काफी हद तक सैद्धांतिक हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव आमतौर पर स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हैं।

स्थानीय मुद्दे और नेतृत्व का प्रभाव

जेरथ के मुताबिक, इस चुनाव में नेतृत्व और कल्याणकारी योजनाएं ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी एक मजबूत और स्पष्ट चेहरा हैं, जबकि BJP के पास राज्य में कोई घोषित मुख्यमंत्री उम्मीदवार नहीं है।उन्होंने यह भी कहा कि हाल के चुनावों में महिलाओं के लिए सीधे नकद हस्तांतरण जैसी योजनाएं निर्णायक रही हैं। उनके शब्दों में, “महिलाओं की निष्ठा जीतने में सबसे बड़ी भूमिका उनके बैंक खाते में हर महीने आने वाले पैसे की होती है।”

महिला मुद्दा बनाम जमीनी सच्चाई

मुखर्जी का मानना है कि BJP का यह अभियान मतदाता सूची विवाद से ध्यान हटाने की कोशिश हो सकता है। लेकिन उन्होंने कहा कि जमीनी अनुभव किसी भी राजनीतिक नैरेटिव से ज्यादा प्रभावशाली होता है।उन्होंने कहा, “लोग घंटों लाइन में खड़े हैं और यह नहीं जानते कि वे वोट दे पाएंगे या नहीं यह मुद्दा ज्यादा बड़ा है, बनिस्बत आरक्षण पर काल्पनिक बहस के।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब जानकारी का बड़ा हिस्सा डिजिटल माध्यमों से आ रहा है, जहां अलग-अलग नैरेटिव मौजूद हैं और राष्ट्रीय मीडिया की तस्वीर हमेशा लोगों के अनुभव से मेल नहीं खाती।

BJP के लिए चूका हुआ मौका?

दोनों विश्लेषकों का मानना है कि BJP ने ममता बनर्जी के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इंकम्बेंसी) का पूरा लाभ नहीं उठाया। जेरथ ने कहा कि पार्टी विकास और शासन के मुद्दों पर ज्यादा ध्यान देती तो बेहतर होता।उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से जुड़े विवादों ने लोगों में असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है, जो उल्टा असर डाल सकती है।

रणनीति की कमजोरियां

मुखर्जी ने BJP की रणनीति पर सीधी टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल विरोध करने से काम नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी को रोजगार और आर्थिक विकास जैसे मुद्दों पर स्पष्ट योजना पेश करनी चाहिए।उनके अनुसार, बंगाल जैसे राज्य में औद्योगिक और आर्थिक मुद्दे बेहद महत्वपूर्ण हैं और मतदाता इन पर स्पष्टता चाहते हैं।

BJP के सामने कठिन चुनौती

चुनावी संभावनाओं पर दोनों विशेषज्ञों ने माना कि BJP के लिए राह आसान नहीं है। मुखर्जी ने कहा कि पार्टी फिलहाल कमजोर स्थिति में दिख रही है और जीत के लिए बड़े बदलाव की जरूरत होगी।जेरथ ने कहा कि BJP का वास्तविक लक्ष्य सीटों की संख्या बढ़ाकर मजबूत विपक्ष बनना हो सकता है। उनके अनुसार, यदि पार्टी तीन अंकों तक पहुंचती है, तो वह ममता सरकार के लिए चुनौती बन सकती है।

जैसे-जैसे चुनाव अपने अंतिम चरण में पहुंच रहा है, BJP का “महिलाओं का अपमान” वाला नैरेटिव पश्चिम बंगाल में कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। मतदाता सूची, कल्याणकारी योजनाएं, नेतृत्व और स्थानीय मुद्दे अभी भी जनता की प्राथमिकता में हैं।ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि महिला प्रतिनिधित्व का मुद्दा चुनावी जमीन पर कितना असर डाल पाएगा।

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