
सुवेंदु के पीए की हत्या में बड़ा खुलासा, फर्जी नंबर प्लेट और रेकी के सुराग
चंद्रनाथ रथ हत्याकांड की जांच में पुलिस को मिली संदिग्ध कार। जांच में प्री-प्लान्ड मर्डर और लंबी रेकी के मिले पुख्ता सबूत। हमलावरों की तलाश में छापेमारी जारी।
Suvendu Adhikari's PA Murder Case : पश्चिम बंगाल पुलिस ने भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में जांच तेज कर दी है। मध्यमग्राम में हुए इस शूटआउट की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस को अब तक कई अहम सुराग मिले हैं। प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह कोई अचानक हुआ हमला नहीं, बल्कि एक सोची-समझी 'टारगेटेड किलिंग' थी। पुलिस ने इस मामले में संदिग्ध कार और फर्जी नंबर प्लेट जैसे महत्वपूर्ण सबूत बरामद किए हैं।
फर्जी नंबर प्लेट वाली कार जब्त
उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम में हुई इस वारदात के बाद पुलिस ने एक संदिग्ध वाहन को जब्त किया है। शूटआउट में इस्तेमाल इस कार पर सिलीगुड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज था। हालांकि, गहन जांच के बाद डीजीपी सिद्धनाथ गुप्ता ने पुष्टि की है कि यह नंबर प्लेट पूरी तरह फर्जी थी। हमलावरों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए नंबर प्लेट से छेड़छाड़ की थी। घटनास्थल से जिंदा कारतूस और खोखे भी बरामद हुए हैं।
तीन दिनों तक की गई थी रेकी
हमले का तरीका साफ इशारा कर रहा है कि यह मर्डर पूरी तरह प्री-प्लान्ड था। पुलिस को मिली जानकारी के मुताबिक, हमलावरों ने कम से कम 2-3 दिनों तक चंद्रनाथ की गतिविधियों की रेकी की थी। उन्हें पता था कि चंद्रनाथ कब और कहाँ रुकेंगे। भागने का रास्ता भी पहले से तय किया गया था। सुवेंदु अधिकारी ने भी दावा किया है कि इस हत्या के पीछे एक गहरी साजिश है, जिसे पेशेवर तरीके से अंजाम दिया गया।
वायुसेना की वर्दी से सियासी गलियारों तक
41 वर्षीय चंद्रनाथ रथ का जीवन सफर काफी प्रभावशाली रहा है। रहरा रामकृष्ण मिशन से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने करीब दो दशक तक भारतीय वायुसेना में देश की सेवा की थी। वायुसेना से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद वे सुवेंदु अधिकारी के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार बने। सुवेंदु के मंत्री रहने से लेकर विपक्ष के नेता बनने तक, चंद्रनाथ हर मोर्चे पर उनके साथ साए की तरह मौजूद रहे।
पर्दे के पीछे की बड़ी जिम्मेदारियां
बीजेपी के भीतर चंद्रनाथ को एक बेहद शांत और वफादार बैकग्राउंड ऑपरेटर के रूप में देखा जाता था। वह अक्सर लाइमलाइट से दूर रहकर सुवेंदु अधिकारी के लिए चुनावी प्रबंधन और सांगठनिक काम संभालते थे। भवानीपुर के हाई-वोल्टेज चुनाव में भी उनकी भूमिका बेहद अहम थी। चर्चा थी कि भविष्य में उन्हें कोई बड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारी मिल सकती थी, लेकिन इस हमले ने उन सभी संभावनाओं को खत्म कर दिया।
दो दशक पुराना पारिवारिक रिश्ता
चंद्रनाथ का परिवार और सुवेंदु अधिकारी का संबंध दो दशक से भी ज्यादा पुराना है। पहले उनका परिवार तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा था, जहाँ उनकी माँ हसी रथ पंचायत सदस्य रही थीं। साल 2020 में सुवेंदु के साथ ही यह परिवार भी बीजेपी में शामिल हो गया था। चंद्रनाथ ने अपनी वफादारी और अनुशासन से पार्टी के भीतर अपनी एक अलग पहचान बनाई थी, जो अब विरोधियों के निशाने पर थी।
बंगाल में उबाल और सुरक्षा अलर्ट
इस हत्याकांड के बाद बंगाल की राजनीति में भारी उबाल देखा जा रहा है। अस्पताल के बाहर समर्थकों का भारी आक्रोश है, जिसके चलते सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल्स के जरिए हमलावरों के नेटवर्क को खंगाल रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि इस बड़ी साजिश के पीछे कौन से चेहरे छिपे हैं। राज्य भर में बीजेपी कार्यकर्ता इस घटना के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।
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