
BJP-TMC के बीच है गहरी ‘सांठगांठ’, पूर्व TMC नेता मौसम नूर का दावा
पश्चिम बंगाल के कांग्रेस नेता मौसम नूर को उम्मीद है कि उनकी पार्टी सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता जाती है कि टीएमसी और भाजपा गठजोड़ में हैं।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक अहम मोड़ पर, वरिष्ठ कांग्रेस नेता मौसम नूर ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर दोबारा कांग्रेस में वापसी को लेकर कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं। उनका कहना है कि राज्य में आम धारणा बन गई है कि टीएमसी और भाजपा के बीच किसी प्रकार की समझ मौजूद है। आगामी चुनावों के मद्देनज़र उन्होंने बताया कि क्यों कांग्रेस दोनों दलों को चुनौती देने के लिए सबसे उपयुक्त पार्टी है और किस तरह वह अपने पारंपरिक गढ़ों में दोबारा मजबूत पकड़ बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।
कांग्रेस में वापसी की वजह
मौसम नूर ने बताया कि वह एक कांग्रेसी परिवार से आती हैं। उनके चाचा गनी खान चौधरी (Ghani Khan Choudhury) का नाम मालदा की राजनीति में बेहद सम्मानित रहा है, जिसने उन्हें लोगों के बीच काम करने का मजबूत आधार दिया। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत विधायक (MLA) के रूप में की और बाद में उत्तर मालदा से दो बार सांसद बनीं।
उन्होंने कहा कि उस समय भाजपा के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए उन्होंने पार्टी नेतृत्व को टीएमसी के साथ गठबंधन करने का सुझाव दिया था। जब ऐसा नहीं हुआ, तो उन्होंने और उनके कार्यकर्ताओं ने टीएमसी में शामिल होना उचित समझा। हालांकि, बाद में उन्हें इसका पछतावा हुआ। उनका मानना है कि जो समर्थन उन्हें मिला, वह कांग्रेस की वजह से था, और टीएमसी के जरिए भाजपा को रोकने की उनकी धारणा गलत साबित हुई।
टीएमसी-भाजपा में गठजोड़-कांग्रेस
मौसम नूर का कहना है कि समय के साथ उन्हें लगा कि टीएमसी और भाजपा के बीच एक तरह का गठजोड़ है। 2021 के विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय माहौल पूरी तरह ध्रुवीकृत हो गया था। एनआरसी जैसे मुद्दों ने लोगों में डर पैदा किया और ऐसा लगा कि अल्पसंख्यक वोट टीएमसी को और हिंदू वोट भाजपा को जा रहे हैं।उन्होंने यह भी कहा कि टीएमसी पर लगे आरोपों के बावजूद कोई बड़ी कार्रवाई न होना भी इस धारणा को मजबूत करता है कि दोनों दलों के बीच समझ है। हालिया SIR मुद्दे पर भी उन्होंने इसी तरह के ध्रुवीकरण की आशंका जताई।
कांग्रेस का रुख और अल्पसंख्यक वोट
मौसम नूर ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस न तो भाजपा के साथ है और न ही टीएमसी के। उन्होंने कहा कि कांग्रेस धर्मनिरपेक्षता की विचारधारा पर कायम है, जो बंगाल की संस्कृति का मूल है। मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे क्षेत्रों को उन्होंने कांग्रेस का पारंपरिक गढ़ बताया और कहा कि यहां पार्टी को हमेशा अल्पसंख्यकों का मजबूत समर्थन मिलता रहा है।उन्होंने यह भी कहा कि वोट बंटने की बात सही नहीं है, क्योंकि कांग्रेस पहले से ही इन इलाकों में मजबूत आधार रखती है और सभी समुदायों को साथ लेकर चलने की कोशिश कर रही है।
टीएमसी सरकार की आलोचना
टीएमसी सरकार की आलोचना करते हुए मौसम नूर ने कई मुद्दे उठाए। वक्फ बिल पर उन्होंने कहा कि टीएमसी से उन्हें मजबूत समर्थन की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। एक मुतवल्ली होने के नाते उन्होंने बताया कि वक्फ से जुड़े लोगों को पोर्टल पर जानकारी अपलोड करने के लिए बहुत कम समय दिया गया, जिससे असंतोष फैला।इसके अलावा, ओबीसी वर्गीकरण में बदलाव और SIR मुद्दे को लेकर भी उन्होंने सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लाखों लोगों के नाम जांच के दायरे में आने से, खासकर अल्पसंख्यकों में, नागरिकता को लेकर चिंता बढ़ी है।
कांग्रेस की रणनीति और भविष्य
कांग्रेस की संगठनात्मक स्थिति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी आज भी लोगों के बीच गहरी जड़ें रखती है। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी लगातार लोगों की आवाज उठा रही है।गनी खान चौधरी की विरासत को उन्होंने आज भी प्रासंगिक बताया और कहा कि उनके मूल्य धर्मनिरपेक्षता, विकास और शांति आज भी लोगों को आकर्षित करते हैं।
सत्ता में आने पर कांग्रेस की योजना
मौसम नूर ने कहा कि यदि राज्य में कांग्रेस सत्ता में आती है, तो वह वक्फ बिल का कड़ा विरोध करेगी और अल्पसंख्यकों को सुरक्षित माहौल देने का प्रयास करेगी। ओबीसी वर्गीकरण को पहले जैसा बहाल करने और SIR में हटाए गए वैध मतदाताओं के नाम फिर से जोड़ने का भी वादा किया।
गठबंधन पर रुख
संभावित त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में टीएमसी के साथ गठबंधन के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा। उनका मुख्य उद्देश्य बंगाल का विकास और भाजपा को रोकना है, और नेतृत्व जो भी निर्णय लेगा, वह उसका पालन करेंगी।

