महिला आरक्षण से मेट्रो तक टकराव, DMK ने केंद्र पर साधा निशाना
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DMK नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद कनिमोझी सोमू ने महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को परिसीमन से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की।

महिला आरक्षण से मेट्रो तक टकराव, DMK ने केंद्र पर साधा निशाना

DMK ने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने पर केंद्र पर निशाना साधा है। इसके साथ ही चेन्नई घोषणापत्र और कल्याण योजनाओं के जरिए अपने कामकाज का बचाव किया।


महिला आरक्षण विधेयक को लेकर जारी बहस के बीच डीएमके नेता डॉ कनिमोझी एनवीएम सोमु (Kanimozhi NVN Somu) ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस विधेयक को परिसीमन (डिलिमिटेशन) से जोड़कर “बंधक” बना दिया गया है और यह महिलाओं के साथ “राजनीतिक विश्वासघात” है।

तमिलनाडु में 23 अप्रैल को होने वाले चुनावों के मद्देनज़र सभी राजनीतिक दलों के बीच प्रचार तेज हो गया है। इसी संदर्भ में डीएमके की चेन्नई-केंद्रित घोषणापत्र, केंद्र-राज्य संबंधों और अन्य प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की गई।

चेन्नई के लिए अलग घोषणापत्र क्यों?

डीएमके का कहना है कि उसका घोषणापत्र पहले ही चेन्नई की जनता के सामने रखा जा चुका है और 2021 के चुनावी वादों में से 90 प्रतिशत से अधिक पूरे किए जा चुके हैं। बाकी बचे 10 प्रतिशत काम केंद्र सरकार के पास लंबित हैं। पार्टी का दावा है कि उसने महिलाओं के लिए “मगलीर उरिमाई थोगई” योजना, मुफ्त बस यात्रा, सुबह का नाश्ता योजना, स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा, पुल निर्माण और सीवेज सफाई जैसे कई वादे पूरे किए हैं।

चेन्नई के लिए अलग घोषणापत्र लाने के पीछे भावनात्मक कारण भी बताया गया। मुख्यमंत्री M. K. Stalin ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत चेन्नई से की थी और वह यहां के मेयर भी रह चुके हैं। उनके कार्यकाल में “सिंगारा चेन्नई” परियोजना शुरू की गई थी। इसी जुड़ाव के चलते उन्होंने “चेन्नई सुपर 6” नाम से छह बड़े वादे पेश किए हैं—बेहतर सामुदायिक स्थान, स्मार्ट परिवहन, अधूरे इंफ्रास्ट्रक्चर का समापन, आवारा कुत्तों का मानवीय प्रबंधन, ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी का वैश्विक केंद्र और टैलेंट डेवलपमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर।

केंद्र-राज्य टकराव और मेट्रो परियोजना

डीएमके का आरोप है कि पिछले पांच वर्षों में केंद्र सरकार ने चेन्नई मेट्रो परियोजना को रोकने की कोशिश की ताकि इसका श्रेय डीएमके को न मिले। फंडिंग में देरी और सहयोग की कमी को “राजनीतिक दबाव” बताया गया। हालांकि अब यह परियोजना लगभग पूरी हो चुकी है और अगले एक साल में पूरे शहर को कवर करने की उम्मीद है।

महिला आरक्षण पर केंद्र पर निशाना

प्रधानमंत्री Narendra Modi के इस दावे पर कि विपक्ष महिला आरक्षण विधेयक में बाधा डाल रहा है, डीएमके ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। पार्टी का कहना है कि उसने 2023 में इस विधेयक का स्वागत किया था और 33 प्रतिशत आरक्षण का समर्थन भी किया था।लेकिन डीएमके का आरोप है कि केंद्र ने इसे परिसीमन और जनगणना से जोड़कर लागू करने में देरी की। उनका कहना है कि अगर सरकार गंभीर होती, तो इसे सीधे लागू कर सकती थी। उन्होंने केंद्र सरकार की तुलना तानाशाही रवैये से करते हुए कहा कि यह केवल घोषणा करती है, लागू नहीं करती।

महिलाओं के सशक्तिकरण पर डीएमके का पक्ष

डीएमके ने खुद को महिलाओं के अधिकारों का समर्थक बताते हुए कई उदाहरण दिए। पार्टी के अनुसार, उसने महिलाओं को पैतृक संपत्ति में 50 प्रतिशत हिस्सा, सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत आरक्षण, उद्योग क्षेत्रों में 40 प्रतिशत और पुलिस व स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण दिया है।साथ ही बीजेपी शासित राज्यों में महिला मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों की संख्या पर सवाल उठाते हुए डीएमके ने केंद्र की “नारी शक्ति” की बातों पर भी सवाल खड़े किए।

क्या यह मुद्दा चुनावी रणनीति है?

डीएमके का कहना है कि परिसीमन का मुद्दा केवल तमिलनाडु नहीं बल्कि पूरे दक्षिण भारत को प्रभावित करेगा। M. K. Stalin ने इस मुद्दे पर देशभर के नेताओं की बैठक भी बुलाई थी, लेकिन केंद्र से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।डीएमके ने स्पष्ट किया कि उसका विरोध महिला आरक्षण से नहीं, बल्कि उसे परिसीमन से जोड़ने के फैसले से है।

महिलाओं की भागीदारी और टिकट वितरण

पार्टी का दावा है कि उसका महिला समर्थक रुख सिर्फ नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रतिनिधित्व में भी दिखता है। चेन्नई और तांबरम में महिला मेयर पहले से हैं और इस बार भी बड़ी संख्या में महिलाओं को टिकट दिए गए हैं।


कल्याण योजनाएं और कर्ज पर विवाद

प्रधानमंत्री मोदी के इस आरोप पर कि डीएमके की योजनाएं राज्य को कर्ज में डुबो रही हैं, पार्टी ने पलटवार किया। डीएमके का कहना है कि वह विकास के लिए कर्ज लेती है, न कि सिर्फ ब्याज चुकाने के लिए।पार्टी के अनुसार, उसने राज्य की अर्थव्यवस्था को सिंगल डिजिट से डबल डिजिट ग्रोथ तक पहुंचाया है, शिक्षा, बुनियादी ढांचे और महिला सशक्तिकरण में सुधार किया है और वैश्विक निवेश आकर्षित किया है।डीएमके ने केंद्र से भी सवाल किया कि ₹15 लाख देने का वादा क्या हुआ, जिसे बाद में खुद केंद्रीय नेताओं ने “जुमला” बताया था।

महिला आरक्षण विधेयक, केंद्र-राज्य संबंध और कल्याणकारी योजनाओं को लेकर डीएमके और केंद्र सरकार के बीच टकराव साफ नजर आ रहा है। चुनावी माहौल में ये मुद्दे और भी तीखे हो गए हैं, और आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता किस पक्ष को समर्थन देती है।

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