क्या है द्रविड़ियन मॉडल? और क्यों मची है इसकी विरासत पर इतनी खींचतान?
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'द फेडरल' के एडिटर-इन-चीफ एस. श्रीनिवासन और अर्थशास्त्री कलैयारसन ए. इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए।

क्या है द्रविड़ियन मॉडल? और क्यों मची है इसकी विरासत पर इतनी खींचतान?

जैसे-जैसे तमिलनाडु चुनावों की ओर बढ़ रहा है, द्रविड़ियन मॉडल एक राजनीतिक दावे और एक विकसित होते नीतिगत ढांचे, दोनों के रूप में बना हुआ है। इसका भविष्य इस बात...


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23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) द्वारा अपनी शासन व्यवस्था की पहचान के रूप में "द्रविड़ियन मॉडल" को आक्रामक रूप से पेश किए जाने के साथ ही, यह वाक्यांश तमिलनाडु के राजनीतिक संदेशों के केंद्र में आ गया है।

इसे एक ऐसे ढांचे के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, जो जनकल्याण, विकास और सामाजिक न्याय को जोड़ता है। लेकिन साथ ही राजकोषीय दबाव और उभरती आर्थिक चुनौतियों के सवालों के घेरे में भी इसकी परीक्षा हो रही है।

इन मुद्दों की पड़ताल आज (14 अप्रैल) 'द फेडरल' के प्रमुख यूट्यूब कार्यक्रम 'टॉकिंग सेंस विद श्रीनी' के एपिसोड में की गई, जिसमें 'द फेडरल' के एडिटर-इन-चीफ एस. श्रीनिवासन और अर्थशास्त्री कलैयारसन ए. शामिल हुए।


द्रविड़ियन मॉडल क्या है?

श्रीनिवासन ने द्रविड़ियन मॉडल को एक समग्र ढांचे के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा, "यह केवल एक नहीं है। यह राजनीतिक भी है, सामाजिक भी है और आर्थिक भी है।" उन्होंने आगे कहा कि यह जस्टिस पार्टी से शुरू हुई विरासत से प्रेरणा लेता है और "सामाजिक समानता" में इसकी जड़ें गहरी हैं।

उन्होंने आरक्षण, मध्याह्न भोजन (mid-day meals) और शिक्षा तथा स्वास्थ्य में निवेश जैसे शुरुआती हस्तक्षेपों को इसके मुख्य स्तंभों के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा, "इन तमाम चीजों के मेल को ही वे द्रविड़ियन मॉडल कह रहे हैं।"

कलैयारसन ने इस मॉडल को एक व्यापक आर्थिक बहस के भीतर रखा। उन्होंने कहा, "भारत की वृद्धि और विकास को एक एकल ढांचे में नहीं समझा जा सकता... इसे इसके क्षेत्रों (regions) के माध्यम से समझा जाना चाहिए।" एक रैखिक दृष्टिकोण (linear approach) के खिलाफ तर्क देते हुए उन्होंने कहा, "आपको इसे क्रमिक रूप से देखने की जरूरत नहीं है कि पहले विकास बनाम वृद्धि... आप वास्तव में एक साथ हस्तक्षेप (simultaneous intervention) कर सकते हैं।" उन्होंने तमिलनाडु को एक ऐसे मामले के रूप में वर्णित किया जहां "आपको एक ऐसा मॉडल मिलता है, जहां वृद्धि और विकास का एक साथ हस्तक्षेप होता है।"

उन्होंने दो विशिष्ट विशेषताओं पर जोर दिया। कलैयारसन ने कहा, "यह विकास के साथ वृद्धि (growth with development) है... यहां एक तुलनात्मक रूप से बेहतर विनिर्माण आधार (manufacturing base) है।" उन्होंने आगे कहा कि राज्य "शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीबी के स्तर" जैसे सामाजिक संकेतकों पर भी मजबूती से प्रदर्शन करता है। उन्होंने उल्लेख किया कि इसे एक व्यापक औद्योगिक संरचना का समर्थन प्राप्त है, जहां "आर्थिक क्लस्टर पूरे राज्य में फैले हुए हैं," जो अधिक समावेशी विकास को सक्षम बनाते हैं।

‘सभी मुफ्त उपहार (Freebies) खराब नहीं होते’

जनकल्याणकारी योजनाओं और जिन्हें 'मुफ्त उपहार' (freebies) कहा जाता है, उन पर श्रीनिवासन ने एक सूक्ष्म दृष्टिकोण रखने का तर्क दिया। उन्होंने कहा, "सभी मुफ्त उपहार खराब नहीं होते।" उन्होंने महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा जैसी योजनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि ये श्रम शक्ति में भागीदारी (labour force participation) को सक्षम बनाती हैं। उन्होंने इसे एक "आर्थिक गुणक" (economic multiplier) बताते हुए कहा, "यदि आप उन्हें मुफ्त परिवहन देते हैं तो आप उन्हें निकटतम स्थान पर जाने, काम करने और वापस आने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।"

कलैयारसन ने कल्याणकारी खर्चों की अंधाधुंध आलोचना का विरोध किया। उन्होंने कहा, "इनमें से कई नीतियों को पहले 'लोकलुभावनवाद' (populism) के रूप में देखा गया था... लेकिन वास्तव में बाद में इनमें से कई नीतियां राष्ट्रीय स्तर की नीतियां बन गईं।" उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के हस्तक्षेपों ने "बहुसंख्यक आबादी को लाभ पहुंचाने में काम किया है और वास्तव में विकास के पूरक के रूप में भी कार्य किया है।"

राजकोषीय स्थिरता (fiscal sustainability) पर उन्होंने डराने वाली धारणाओं को खारिज कर दिया। उन्होंने इसे "पूरी तरह से गलत" बताते हुए समझाया कि घाटे को संदर्भ में देखे जाने की आवश्यकता है। उन्होंने तर्क दिया, "कुछ हद तक राजकोषीय घाटा होना अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा है," बशर्ते कि सीमाओं का सम्मान किया जाए।

आगे की चुनौतियां

दोनों विशेषज्ञों ने इस बात को रेखांकित किया कि यह मॉडल किसी एक सरकार की नहीं बल्कि दशकों की नीतिगत निरंतरता (policy continuity) का परिणाम है। श्रीनिवासन ने बताया कि कैसे क्रमिक प्रशासनों ने पिछले हस्तक्षेपों को आधार बनाया और शासन क्षमता को बनाए रखते हुए जनकल्याण का विस्तार किया।

भविष्य की ओर देखते हुए, कलैयारसन ने उभरती चुनौतियों को चिह्नित किया। उन्होंने कहा, "बच्चों को स्कूल भेजना ही काफी नहीं है। यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि वे कौन से कौशल हासिल करते हैं।" उन्होंने रोजगार क्षमता (employability) और तकनीकी बदलावों को अगली सीमा (next frontier) के रूप में बताया।

जैसे-जैसे तमिलनाडु चुनावों की ओर बढ़ रहा है, द्रविड़ियन मॉडल एक राजनीतिक दावे और एक विकसित होते नीतिगत ढांचे, दोनों के रूप में बना हुआ है। इसका भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि यह नई आर्थिक वास्तविकताओं के साथ कितनी प्रभावी ढंग से तालमेल बिठाता है।

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