
'हम हारे नहीं, हमें हराया गया है', ममता बनर्जी का बड़ा आरोप, चुनाव आयोग को बताया सबसे बड़ा विलेन
ममता ने बंगाल की जनता को संदेश देते हुए कहा कि वह उनके साथ खड़ी हैं और राज्य की शांति भंग करने की कोशिश करने वालों को सफल नहीं होने देंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी राज्य में अशांति फैलाना चाहती है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अध्यक्ष और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों को स्वीकार करने के बजाय एक विस्फोटक प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। कोलकाता में मीडिया से बात करते हुए ममता बनर्जी ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया और सीधे तौर पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर मिलीभगत का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह चुनाव जनता के बीच की लड़ाई नहीं थी, बल्कि उनकी लड़ाई सिस्टम से थी।
"नैतिक जीत हमारी हुई है"
ममता बनर्जी ने बांग्ला भाषा में अपना पक्ष रखते हुए कहा, "आमी हारिनी, आमादेर हारानो होयिछे" (हम हारे नहीं हैं, बल्कि हमें हराया गया है)। उन्होंने कहा कि भले ही सीटों के आंकड़ों में बीजेपी आगे दिख रही हो, लेकिन नैतिक तौर पर जीत तृणमूल कांग्रेस और बंगाल की अस्मिता की हुई है। ममता ने आरोप लगाया कि बंगाल के इस चुनाव में लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाई गई हैं और जनता के जनादेश को जबरन बदलने की कोशिश की गई है।
प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर सीधा हमला
ममता बनर्जी ने दिल्ली की सत्ता पर काबिज शीर्ष नेतृत्व को घेरते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल को जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दोनों नेताओं ने संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया। ममता के अनुसार, "यह हार किसी राजनीतिक दल से नहीं हुई है, बल्कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने चुनाव आयोग का इस्तेमाल करके हमें पीछे धकेला है।" उन्होंने इसे बंगाल के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे 'काला अध्याय' करार दिया।
"चुनाव आयोग सबसे बड़ा विलेन"
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ममता बनर्जी का सबसे तीखा हमला चुनाव आयोग (EC) पर रहा। उन्होंने आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उसे इस पूरे चुनाव का "सबसे बड़ा विलेन" बताया। ममता ने कहा, "चुनाव आयोग ने निष्पक्ष अंपायर की तरह काम करने के बजाय एकतरफा व्यवहार किया। आयोग के हर फैसले से बीजेपी को फायदा पहुँचाया गया और टीएमसी के रास्ते में रोड़े अटकाए गए।" उन्होंने आरोप लगाया कि कई संवेदनशील इलाकों में आयोग ने उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया, जिससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता खत्म हो गई।
काउंटिंग सेंटर पर मारपीट और गंभीर आरोप
ममता बनर्जी ने केवल चुनावी प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि मतगणना के दिन हुई घटनाओं पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मतगणना केंद्रों (Counting Centers) पर तृणमूल कांग्रेस के एजेंटों के साथ मारपीट की गई और उन्हें डराया-धमकाया गया। ममता ने भावुक होते हुए कहा, "मुझे खुद काउंटिंग सेंटर में घुसने से रोका गया। हमारे दफ्तरों को घेरने और उन पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। हद तो तब हो गई जब मेरी पीठ पर लात तक मारी गई।" उन्होंने इन घटनाओं को राजनीतिक प्रतिशोध की पराकाष्ठा बताया।
"हम फिर वापस लौटेंगे" - संघर्ष का संकल्प
भले ही मौजूदा नतीजों ने ममता बनर्जी को बैकफुट पर ला दिया हो, लेकिन उनके तेवर अब भी वही 'अग्निकन्या' वाले हैं। उन्होंने साफ लहजे में कहा, "बीजेपी यह न समझे कि यह अंत है। हम फिर से वापस लौटेंगे (We will return)। हमारी लड़ाई जारी रहेगी।" हालांकि, उन्होंने अपनी भविष्य की रणनीति का अभी खुलासा नहीं किया है, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि वह इस हार के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर मोर्चा खोलेंगी।
बंगाल की जनता और भविष्य की दिशा
ममता ने बंगाल की जनता को संदेश देते हुए कहा कि वह उनके साथ खड़ी हैं और राज्य की शांति भंग करने की कोशिश करने वालों को सफल नहीं होने देंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी राज्य में अशांति फैलाना चाहती है और टीएमसी दफ्तरों को निशाना बना रही है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने यह साफ कर दिया है कि बंगाल में चुनाव भले ही खत्म हो गए हों, लेकिन राजनीतिक जंग अभी लंबी चलने वाली है।

