
4 मई: ईवीएम से निकलेगा पांच राज्यों का भाग्य, जानें काउंटिंग के कड़े नियम
पांच राज्यों के चुनाव परिणाम के लिए सोमवार को सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू होगी। पोस्टल बैलेट, ईवीएम राउंड और वीवीपीएटी पर्चियों के मिलान से तय होगा अंतिम जनादेश।
Five State Elections Counting : पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के लिए सोमवार 4 मई को होने वाली मतगणना के साथ ही सत्ता का भविष्य तय हो जाएगा। मतगणना सुबह 8 बजे से शुरू होगी और एक बेहद कड़ी तथा चरणबद्ध प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ेगी। इस पूरी प्रक्रिया को इस तरह तैयार किया गया है कि हर एक वोट की सटीक रिकॉर्डिंग और सत्यापन सुनिश्चित किया जा सके। चुनाव आयोग ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरे और वीडियोग्राफी के इंतजाम किए हैं।
स्ट्रांग रूम का खुलना और शुरुआती प्रक्रिया
मतगणना की शुरुआत सुबह सबसे पहले उन 'स्ट्रांग रूम' को खोलने के साथ होती है जहाँ मतदान के बाद से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (ईवीएम) और अन्य चुनावी सामग्री कड़ी सुरक्षा में रखी गई हैं। इन कमरों को उम्मीदवारों या उनके अधिकृत एजेंटों, चुनाव पर्यवेक्षकों और संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति में खोला जाता है। इस पूरी प्रक्रिया की अनिवार्य रूप से वीडियोग्राफी की जाती है, जो पहले कदम से ही पारदर्शिता को सुदृढ़ करती है।
पोस्टल बैलेट: सबसे पहले इनकी होगी गिनती
मतगणना के पहले चरण में पोस्टल बैलेट यानी डाक मतपत्रों की गिनती की जाती है। इनमें सेवा कर्मियों (सर्विस वोटर), चुनाव ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी और अनुपस्थित मतदाताओं द्वारा डाले गए वोट शामिल होते हैं। इन्हें पहले गिनने का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इलेक्ट्रॉनिक गिनती शुरू होने से पहले इन मतों को कुल योग में शामिल कर लिया जाए। करीबी मुकाबलों में ये पोस्टल बैलेट अक्सर शुरुआती रुझानों को प्रभावित करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
ईवीएम मतगणना: चरणों और राउंड का गणित
पोस्टल बैलेट की गिनती शुरू होने के आधे घंटे बाद ईवीएम के वोटों की गिनती शुरू होती है। यह प्रक्रिया 'राउंड' में व्यवस्थित होती है। उदाहरण के तौर पर केरल जैसे राज्यों में एक राउंड में आमतौर पर 14 मतदान केंद्रों (पोलिंग बूथों) के वोट गिने जाते हैं। यह संरचना मतगणना के व्यवस्थित प्रवाह को सुनिश्चित करती है और निर्वाचन क्षेत्रों में धीरे-धीरे परिणाम संकलित करने की अनुमति देती है।
प्रत्येक मतगणना टेबल पर ईवीएम की 'कंट्रोल यूनिट' को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार लाया और खोला जाता है। कंट्रोल यूनिट के साथ ही 'फॉर्म 17सी' रखा जाता है, जो उस बूथ पर पड़े वोटों का आधिकारिक रिकॉर्ड होता है। ईवीएम पर प्रदर्शित आंकड़ों को नोट किया जाता है और फिर फॉर्म 17सी में दर्ज डेटा के साथ उनका मिलान किया जाता है। यह सत्यापन एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच है, जो यह सुनिश्चित करता है कि गिने गए वोटों की संख्या वास्तव में डाले गए वोटों की संख्या से मेल खाती है। यदि ईवीएम की गिनती और रिकॉर्ड किए गए आंकड़ों के बीच कोई विसंगति पाई जाती है, तो इसकी गहन जांच की जाती है। यहीं पर 'वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल' यानी वीवीपीएटी (VVPAT) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
वीवीपीएटी पर्चियों का मिलान और ऑडिट
वीवीपीएटी पर्चियां प्रत्येक वोट का एक भौतिक रिकॉर्ड प्रदान करती हैं, जिसमें उम्मीदवार का नाम, सीरियल नंबर और चुनाव चिह्न प्रदर्शित होता है। सत्यापन की एक अतिरिक्त परत के रूप में हर निर्वाचन क्षेत्र में पांच बेतरतीब ढंग से चुने गए (रैंडमली सिलेक्टेड) मतदान केंद्रों की वीवीपीएटी पर्चियों की गिनती की जाती है और इलेक्ट्रॉनिक परिणामों के साथ उनका मिलान किया जाता है। यह अनिवार्य क्रॉस-चेक ईवीएम गिनती के एक स्वतंत्र ऑडिट के रूप में कार्य करता है। इसके अतिरिक्त पर्यवेक्षक प्रत्येक राउंड में रैंडम आधार पर किसी भी ईवीएम का चयन सत्यापन के लिए कर सकते हैं, जिससे प्रक्रिया की समग्र विश्वसनीयता और मजबूत होती है।
राउंड-वार सिस्टम और रुझानों का उतार-चढ़ाव
मतगणना राउंड दर राउंड आगे बढ़ती है और प्रत्येक चरण के बाद परिणामों को एकत्रित किया जाता है। यह राउंड-वार प्रणाली अक्सर शुरुआती बढ़त और बदलते रुझान पैदा करती है, लेकिन चुनाव अधिकारी स्पष्ट करते हैं कि केवल अंतिम समेकित आंकड़े ही परिणाम निर्धारित करते हैं। प्रत्येक राउंड संचयी योग (Cumulative Tally) में योगदान देता है जो अंततः निर्वाचन क्षेत्र में विजेता का फैसला करता है। मतगणना केंद्रों को इस प्रक्रिया को कुशलतापूर्वक संभालने के लिए संरचित किया गया है। अलग-अलग बूथों से ईवीएम की एक साथ गिनती की अनुमति देने के लिए कई टेबल लगाए जाते हैं।
इंडेक्स कार्ड: अंतिम रिपोर्ट की तैयारी
मतगणना के सभी राउंड पूरे होने के बाद प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के लिए परिणाम संकलित और अंतिम रूप दिए जाते हैं। इसके बाद 'इंडेक्स कार्ड' के रूप में जानी जाने वाली एक विस्तृत पोस्ट-काउंट रिपोर्ट तैयार की जाती है। इस दस्तावेज में चुनावी डेटा का व्यापक विवरण होता है, जिसमें पड़े गए वोट, गिने गए वोट और विभिन्न जांचों के माध्यम से सत्यापित वोटों का पूरा हिसाब होता है। इंडेक्स कार्ड को चुनाव आयोग को सौंपने से पहले इसकी सटीकता सुनिश्चित करने के लिए फिर से जांच की जाती है। यह अंतिम चरण उस प्रक्रिया को पूरा करता है जो सत्यापन की कई परतों पर बनी है।
स्ट्रांग रूम खोलने से लेकर पोस्टल बैलेट की गिनती तक और 14 बूथों के राउंड में ईवीएम सारणीकरण से लेकर वीवीपीएटी ऑडिट तक, पूरी व्यवस्था को त्रुटियों को कम करने और पारदर्शिता को अधिकतम करने के लिए डिजाइन किया गया है। सोमवार को जब मतगणना शुरू होगी, तो दुनिया की नजरें भारत की इस विशाल और जटिल लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुद्धता पर टिकी होंगी।
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