
बंगाल चुनाव का पहला चरण, टीएमसी-बीजेपी के लिए करो या मरो
पश्चिम बंगाल के पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान हो रहा है। टीएमसी और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला और सियासी भविष्य दांव पर है।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव अब अपने सबसे अहम पड़ाव पर पहुंच चुका है। पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान होना है, जहां उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो जाएगी। यह चरण सिर्फ एक चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सत्ताधारी टीएमसी (All India Trinamool Congress) और भारतीय जनता पार्टी के लिए ‘करो या मरो’ की स्थिति बन गया है।
पहले चरण का गणित क्यों अहम?
पहले चरण के आंकड़े इस मुकाबले को और निर्णायक बनाते हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 152 सीटों में से 59 सीटें जीती थीं, लेकिन दूसरे चरण में वह केवल 18 सीटों पर सिमट गई थी। ऐसे में इस बार बीजेपी के लिए शुरुआती बढ़त बनाना बेहद जरूरी माना जा रहा है। यदि पार्टी यहां कमजोर पड़ती है, तो आगे की राह कठिन हो सकती है।
वहीं, ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की अगुवाई वाली टीएमसी के लिए भी चुनौती कम नहीं है। 2021 में पार्टी ने पहले चरण में 92 सीटें जीती थीं और दूसरे चरण में 123 सीटों पर कब्जा जमाया था। अगर टीएमसी इस बार भी पहले चरण में बीजेपी को रोकने में सफल रहती है, तो ममता बनर्जी के चौथी बार मुख्यमंत्री बनने की राह आसान हो सकती है।
चुनावी आंकड़ों में बीजेपी का उभार
2011 से अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो बीजेपी का ग्राफ तेजी से ऊपर गया है। 2011 में पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी थी, जबकि 2016 में यह संख्या 3 तक पहुंची। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने इन सीटों पर 86 पर बढ़त बनाई और 2021 में 59 सीटें जीतीं। 2024 लोकसभा चुनाव में भी पार्टी 64 सीटों पर आगे रही।इसी बढ़ते प्रभाव को देखते हुए Amit Shah के नेतृत्व में बीजेपी ने पहले चरण में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
टीएमसी का मजबूत प्रदर्शन
दूसरी ओर, टीएमसी का प्रदर्शन भी लगातार मजबूत रहा है। 2011 में पार्टी ने 68 सीटें जीतीं, 2016 में 86 सीटों पर कब्जा किया। 2019 लोकसभा चुनाव में 57 सीटों पर बढ़त बनाई और 2021 में 92 सीटें जीतकर अपनी पकड़ मजबूत साबित की। 2024 में भी पार्टी 76 सीटों पर आगे रही।
मुस्लिम बहुल सीटों पर फोकस
पहले चरण की सीटों में मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिले अहम हैं, जहां 50 से 66 प्रतिशत तक मुस्लिम आबादी है। इन तीन जिलों की 43 सीटों में से पिछली बार टीएमसी ने 35 सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी को 8 सीटें मिली थीं। इस बार बीजेपी हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण के जरिए यहां टीएमसी को चुनौती देने की रणनीति पर काम कर रही है।
हिंसा और सियासत का साया
चुनाव से पहले कई जगहों पर तनाव देखने को मिला। दुर्गापुर और पश्चिम मिदनापुर में बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें हुईं। दोनों दलों ने एक-दूसरे पर हिंसा भड़काने के आरोप लगाए।दरअसल, बंगाल में चुनावी हिंसा का इतिहास भी चिंता बढ़ाता है। 2019 लोकसभा चुनाव में 15 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2021 विधानसभा चुनाव में 1300 से ज्यादा हिंसक घटनाएं सामने आईं और 17 लोगों की जान गई। 2023 पंचायत चुनाव में 45 लोगों की मौत दर्ज की गई थी।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने इस बार सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। मतदान से 48 घंटे पहले से रात 6 बजे से सुबह 6 बजे तक बाइक चलाने पर रोक लगा दी गई है। इसके अलावा, पोलिंग के दिन एक बाइक पर केवल दो लोगों को ही मतदान केंद्र जाने की अनुमति होगी।शराब बिक्री पर रोक को 48 घंटे से बढ़ाकर 96 घंटे कर दिया गया है। साथ ही, संभावित गड़बड़ी को रोकने के लिए करीब 800 टीएमसी नेताओं की निगरानी सूची भी तैयार की गई है, हालांकि सामान्य परिस्थितियों में गिरफ्तारी के निर्देश नहीं हैं।पश्चिम बंगाल चुनाव का पहला चरण बेहद निर्णायक माना जा रहा है।

