चुनावों पर 25,000 करोड़ का सट्टा: अवैध बाज़ार की पड़ताल
x

चुनावों पर 25,000 करोड़ का सट्टा: अवैध बाज़ार की पड़ताल

भारतीय चुनावों में सट्टेबाजी का बढ़ता खतरा। 2025 से बैन के बावजूद क्रिप्टो और वीपीएन के जरिए लग रहे दांव। पी.एस. शिवसंकरण ने दी मनी लॉन्ड्रिंग और जेल की चेतावनी।


Five States Election 2026 : भारत के पांच राज्यों तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों का शोर केवल रैलियों और जनसभाओं तक सीमित नहीं है। पर्दे के पीछे एक बड़ा और अवैध समानांतर तंत्र सक्रिय हो चुका है। 'द फेडरल' की रिपोर्ट के अनुसार, इन राज्यों के चुनावों पर अवैध प्रेडिक्शन मार्केट और 'पॉलीमार्केट' जैसे विदेशी सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म्स के जरिए करीब 25,000 करोड़ रुपये का दांव लगाया गया है। जहाँ एक ओर मीडिया संस्थान और जनता एक्जिट पोल का इंतजार करते हैं, वहीं सट्टेबाजी का यह बाजार क्रिप्टो करेंसी, वीपीएन (VPN) और डार्क वेब के जरिए संचालित हो रहा है।



क्या है प्रेडिक्शन मार्केट और यह कैसे काम करता है?
प्रेडिक्शन मार्केट को आप एक तरह का 'भविष्यवाणी बाजार' कह सकते हैं, जो बिल्कुल शेयर बाजार की तरह काम करता है। यहाँ लोग किसी राजनीतिक दल की जीत या हार की संभावना पर 'शेयर' या 'पोजीशन' खरीदते और बेचते हैं। वैश्विक स्तर पर 'पॉलीमार्केट' जैसे प्लेटफॉर्म्स ने 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान बहुत सुर्खियां बटोरी थीं, जहाँ सट्टेबाजों ने मुख्यधारा के पोल से पहले ही डोनाल्ड ट्रंप की जीत का सही अनुमान लगा लिया था। इसके पीछे की सोच यह है कि जब कोई व्यक्ति अपना असली पैसा दांव पर लगाता है, तो उसकी 'ग्राउंड रिपोर्ट' या जानकारी सामान्य सर्वेक्षकों से कहीं ज्यादा सटीक हो सकती है।

पांच राज्यों के चुनावी रुझानों पर सट्टेबाजों की नजर
सट्टा बाजार के ताजा आंकड़े भारतीय राजनीति की एक अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। इस डिजिटल सट्टेबाजी में सबसे सक्रिय राज्य तमिलनाडु बनकर उभरा है।

तमिलनाडु: यहाँ 189 करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार हो चुका है। सट्टेबाजों के अनुसार, डीएमके (DMK) 86% संभावना के साथ सबसे आगे है।

पश्चिम बंगाल: यहाँ करीब 53 करोड़ रुपये दांव पर लगे हैं। सट्टा बाजार टीएमसी (TMC) को 52-53% और बीजेपी को 47% पर दिखा रहा है, जो बेहद कड़ी टक्कर का संकेत है।

असम और पुडुचेरी: असम में बीजेपी को 94-97% की भारी बढ़त के साथ विजेता माना जा रहा है, जबकि पुडुचेरी में एआईएनआरसी (AINRC) पर 96% भरोसा दिखाया गया है।

बाजार में हेरफेर और 'पंप-एंड-डंप' का खतरा
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ये प्रेडिक्शन मार्केट केवल भविष्यवाणी नहीं करते, बल्कि इन्हें आसानी से मैनिपुलेट भी किया जा सकता है। पूर्व आयकर जांच अधिकारी पी.एस. शिवसंकरण ने 'द फेडरल' को बताया कि यह खेल स्टॉक मार्केट की 'पंप-एंड-डंप' रणनीति जैसा है। सट्टेबाज शुरुआत में कम दाम पर दांव लगाते हैं और फिर व्हाट्सएप या टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए फर्जी सर्वे या भ्रामक खबरें फैलाते हैं। जब इन झूठी खबरों से किसी दल की जीत की संभावना (और भाव) बढ़ जाती है, तो ये सट्टेबाज अपना मुनाफा कमाकर बाहर निकल जाते हैं। इसका वास्तविक चुनाव परिणाम से कोई लेना-देना नहीं होता, बल्कि यह केवल छोटे सट्टेबाजों को ठगने का तरीका है।

कानूनी पचड़े: जेल और भारी जुर्माने की चेतावनी
भारत में ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुआ साल 2025 से पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद लोग वीपीएन के जरिए अपनी पहचान छुपाकर विदेशी प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। पी.एस. शिवसंकरण ने आगाह किया है कि विदेशी वॉलेट्स और क्रिप्टो करेंसी (जैसे USDC) के जरिए सट्टा लगाना सीधे तौर पर भारतीय कानूनों का उल्लंघन है। ऐसा करने वाले लोग न केवल 'इनकम टैक्स एक्ट' बल्कि 'मनी लॉन्ड्रिंग' (PMLA), 'ब्लैक मनी एक्ट' और 'फेमा' (FEMA) के दायरे में भी आते हैं। इसमें पकड़े जाने पर न केवल जमा राशि जब्त हो सकती है, बल्कि कड़ी जेल की सजा भी मिल सकती है।

लोकतंत्र पर वित्तीय दखल और खतरे
सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या ये बाजार केवल चुनाव की भविष्यवाणी कर रहे हैं या उन्हें प्रभावित भी कर रहे हैं? तमिलनाडु पुलिस के सूत्रों के अनुसार, कई बड़े व्यापारिक समूहों ने भारी-भरकम सट्टा लगाने से पहले खुद के निजी सर्वे करवाए हैं। यदि अवैध धन और भ्रामक जानकारियों के जरिए मतदाता की धारणा को बदला जाता है, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पवित्रता को नष्ट कर सकता है। जब करोड़ों रुपये का अवैध धन चुनाव के इर्द-गिर्द घूमता है, तो यह विदेशी वित्तीय हस्तक्षेप और मनी लॉन्ड्रिंग के दरवाजे खोल देता है।

(उपरोक्त सामग्री 'द फेडरल' द्वारा साझा किए गए इनपुट और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। इसे एआई (AI) मॉडल की सहायता से तैयार किया गया है। इसकी संपादकीय अखंडता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए 'ह्यूमन-इन-द-लूप' (HITL) प्रक्रिया अपनाई गई है। द फेडरल में हम भरोसेमंद पत्रकारिता प्रदान करने के लिए एआई की दक्षता और अनुभवी संपादकों की विशेषज्ञता का समन्वय करते हैं।)

Read More
Next Story