
केरल कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद की रेस, तीन बड़े दावेदार आमने-सामने
केरल में UDF की बड़ी जीत के बाद कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर सतीशन, वेणुगोपाल और चेन्निथला के बीच नेतृत्व की जंग तेज हो गई है।
केरल में विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद कांग्रेस के भीतर अब मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान तेज हो गई है। इसी बीच वी डी सतीशन के समर्थकों ने एर्नाकुलम जिले के नेट्टूर में प्रदर्शन करते हुए उन्हें राज्य का अगला मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग की।यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ जब अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के पर्यवेक्षक तिरुवनंतपुरम में कांग्रेस विधायक दल (CLP) की बैठक कर रहे थे और 63 कांग्रेस विधायकों से व्यक्तिगत बातचीत के जरिए मुख्यमंत्री चयन पर उनकी राय जान रहे थे।
सतीशन के गृहनगर में शक्ति प्रदर्शन
नेट्टूर वी डी सतीशन का गृह क्षेत्र माना जाता है। विधानसभा चुनाव के दौरान वह यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के सबसे प्रमुख चेहरों में शामिल थे।इन चुनावों में यूडीएफ ने 140 में से 102 सीटें जीतकर भारी जीत दर्ज की।प्रदर्शन के दौरान समर्थकों ने एक बड़ा फ्लेक्स बोर्ड लगाया, जिस पर लिखा था “जिसने चुनावी लड़ाई का नेतृत्व किया, वही राज्य पर शासन करे।”यह नारा साफ तौर पर सतीशन को मुख्यमंत्री बनाने की मांग को दर्शा रहा था।
केसी वेणुगोपाल के समर्थन में भी माहौल
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में कांग्रेस सांसद और एआईसीसी महासचिव के सी वेणुगोपाल का नाम भी तेजी से उभर रहा है।हालांकि वे विधानसभा चुनाव नहीं लड़े थे, लेकिन पार्टी के भीतर एक बड़ा वर्ग उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए उपयुक्त मान रहा है।कोच्चि समेत कई जगहों पर उनके समर्थकों ने भी प्रदर्शन की घोषणा की है।
तीन नेताओं के बीच फंसा नेतृत्व का फैसला फिलहाल मुख्यमंत्री पद की दौड़ में तीन बड़े नाम सामने हैं।
वी डी सतीशन
के सी वेणुगोपाल
वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला
वी डी सतीशन ने एर्नाकुलम जिले की नॉर्थ परवूर सीट से जीत हासिल की है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस विधायक दल की बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री चयन का अंतिम फैसला एआईसीसी अध्यक्ष पर छोड़ दिया गया।
बड़ी जीत के बावजूद नेतृत्व पर असमंजस
कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ ने चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 102 सीटें जीतीं, जिनमें अकेले कांग्रेस के खाते में रिकॉर्ड 63 सीटें आईं।लेकिन इतनी बड़ी जीत के बावजूद पार्टी अब तक मुख्यमंत्री के नाम पर सहमति नहीं बना पाई है।राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि पार्टी के भीतर अलग-अलग गुट सक्रिय हो चुके हैं और हर गुट अपने नेता के समर्थन में माहौल बनाने में जुटा है।
पर्यवेक्षकों ने विधायकों से की व्यक्तिगत बातचीत
AICC पर्यवेक्षक मुकुल वासनिक और अजय माकन ने तिरुवनंतपुरम में कांग्रेस विधायकों से व्यक्तिगत मुलाकात कर उनकी पसंद जानने की कोशिश की।तीनों दावेदारों के समर्थक वरिष्ठ नेताओं ने भी दिनभर पर्यवेक्षकों से मुलाकात की।
सतीशन के समर्थन में खुलकर उतरे कार्यकर्ता
रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग खुलकर वी डी सतीशन के समर्थन में उतर आया है।समर्थकों का मानना है कि यूडीएफ की जीत के पीछे सतीशन की राजनीतिक रणनीति और आक्रामक प्रचार अभियान की सबसे बड़ी भूमिका रही।पिछले पांच वर्षों में उन्होंने विधानसभा में यूडीएफ का नेतृत्व किया और उन्हें गठबंधन की जीत का प्रमुख चेहरा माना जा रहा है।सतीशन समर्थक राज्य के अलग-अलग हिस्सों में और प्रदर्शन की तैयारी भी कर रहे हैं।
चेन्निथला खेमे को भी उम्मीद
फिलहाल मुकाबला मुख्य रूप से सतीशन और वेणुगोपाल के बीच माना जा रहा है, लेकिन रमेश चेन्निथला के समर्थक भी उम्मीद लगाए बैठे हैं।उनका मानना है कि चेन्निथला का लंबा संगठनात्मक अनुभव और वरिष्ठता उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है।कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, नए निर्वाचित विधायकों का एक बड़ा वर्ग के सी वेणुगोपाल के समर्थन में है।वेणुगोपाल को राष्ट्रीय स्तर पर केरल से कांग्रेस का सबसे प्रभावशाली नेता माना जाता है और उन्हें राहुल गांधी का करीबी भी समझा जाता है।

