
टीएमसी की हार के बाद बोलीं महुआ मोइत्रा, संविधान के लिए लड़ाई जारी
बंगाल में टीएमसी की हार के बाद महुआ मोइत्रा ने जनादेश स्वीकारते हुए कहा कि पार्टी कठिन हालात में लड़ी और संविधान की रक्षा की लड़ाई जारी रहेगी।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की हार के एक दिन बाद पार्टी की लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा का बयान सामने आया। उन्होंने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी ने “असमान परिस्थितियों में भी मजबूती से लड़ाई लड़ी” और जनता के फैसले का सम्मान करती है।
“बंगाल ने बीजेपी को चुना, हम सम्मान करते हैं”
महुआ मोइत्रा ने अपने बयान में कहा कि यदि बंगाल की जनता ने भारतीय जनता पार्टी को चुना है, तो यह उनका फैसला है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए।उन्होंने लिखा कि टीएमसी ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद चुनाव में पूरी ताकत झोंकी और उन्हें अपने नेतृत्व और पार्टी पर गर्व है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनकी लड़ाई एक धर्मनिरपेक्ष भारत के लिए जारी रहेगी, जहां संविधान सर्वोच्च हो, न कि “थोपा गया बहुमतवाद”।
15 साल का टीएमसी शासन खत्म
इन चुनाव नतीजों के साथ पश्चिम बंगाल में टीएमसी का 15 साल का शासन समाप्त होता दिख रहा है। भारतीय जनता पार्टी दो-तिहाई बहुमत के साथ सरकार बनाने की स्थिति में है।294 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 196 है, जबकि घोषित 293 सीटों में बीजेपी ने 206 सीटें हासिल कर ली हैं। टीएमसी को 81 सीटों पर संतोष करना पड़ा।
ममता बनर्जी भी सीट नहीं बचा पाईं
टीएमसी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी बड़ा झटका लगा। वह अपनी भवानीपुर सीट पर बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी से 15,000 से ज्यादा वोटों से हार गईं।यह हार पार्टी के लिए प्रतीकात्मक और राजनीतिक दोनों ही लिहाज से बड़ी मानी जा रही है।
कृष्णानगर में भी बीजेपी की बड़ी जीत
महुआ मोइत्रा की लोकसभा सीट कृष्णानगर के अंतर्गत आने वाली सात विधानसभा सीटों में भी बीजेपी ने एक लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।यह संकेत देता है कि बीजेपी ने राज्य में व्यापक स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत की है।
वोट शेयर में भी बीजेपी आगे
वोट शेयर के आंकड़े भी बीजेपी की बढ़त को दर्शाते हैं।
बीजेपी: 46%
टीएमसी: 41%
वाम मोर्चा: 4%
कांग्रेस: 3%
अन्य: 6%
खास बात यह रही कि टीएमसी कूच बिहार, पूर्वी मिदनापुर, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग समेत कई जिलों में एक भी सीट नहीं जीत पाई। इसके अलावा पार्टी आदिवासी और मतुआ बहुल क्षेत्रों में भी अपनी पकड़ खो बैठी।

