ममता बनर्जी और स्टालिन का सूपड़ा साफ, चुनाव हारने वाले मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों की पूरी लिस्ट
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ममता बनर्जी और स्टालिन का सूपड़ा साफ, चुनाव हारने वाले मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों की पूरी लिस्ट

4 मई को आए विधानसभा चुनावी नतीजों में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल की सत्ताधारी सरकारों को करारी शिकस्त मिली है। ममता बनर्जी और एमके स्टालिन समेत इन तीन राज्यों के 50 मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा।


सोमवार, 4 मई 2026 की तारीख भारतीय राजनीति के इतिहास में एक 'ब्लैक मंडे' की तरह याद रखी जाएगी। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल के विधानसभा चुनाव नतीजों ने न केवल सत्ता पलट दी, बल्कि कई सियासी दिग्गजों के करियर पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। इन तीन राज्यों में सत्ताधारी दलों को ऐसा करारा झटका लगा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और एमके स्टालिन सहित कुल 50 मंत्रियों को हार का स्वाद चखना पड़ा है।

तमिलनाडु: थलपति विजय का 'डेब्यू' और स्टालिन की विदाई

तमिलनाडु की राजनीति में वह हुआ जिसकी कल्पना कम ही लोगों ने की थी। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) ने अपने पहले ही चुनाव में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें जीतीं और सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। इस 'विजय' आंधी में डीएमके (DMK) के किले ढह गए।

सबसे चौंकाने वाला नतीजा कोलाथुर विधानसभा सीट से आया, जहाँ मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को TVK उम्मीदवार वीएस बाबू ने 8,795 वोटों के अंतर से हरा दिया। स्टालिन को जहाँ 74,202 वोट मिले, वहीं वीएस बाबू ने 82,997 वोट हासिल कर सबको चौंका दिया। स्टालिन अकेले नहीं हारे; उनकी कैबिनेट के 15 दिग्गज मंत्री, जिनमें दुरई मुरुगन, पीटीआर पलानीवेल त्यागराजन और मा सुब्रमण्यम शामिल हैं, अपनी सीटें नहीं बचा सके। DMK महज 59 और AIADMK 47 सीटों पर सिमट कर रह गई।

पश्चिम बंगाल: दीदी के 15 साल के शासन का अंत, BJP का 'कमल' खिला

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) का 15 साल पुराना साम्राज्य ढह गया है। 294 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी ने 206 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल किया, जबकि TMC महज 80 सीटों पर सिमट गई।

सबसे बड़ा उलटफेर भवानीपुर सीट पर हुआ, जहाँ खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी ने 15,105 वोटों से शिकस्त दी। ममता के साथ-साथ उनके मंत्रिमंडल के 21 अन्य मंत्रियों को भी हार का सामना करना पड़ा। इनमें अरूप बिस्वास, ब्रात्य बसु और शशि पांजा जैसे बड़े नाम शामिल हैं। हार से विचलित ममता बनर्जी ने काउंटिंग सेंटर से निकलते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, "यह जनादेश की लूट है। 100 से ज्यादा सीटों पर बेईमानी हुई है।" उन्होंने बीजेपी की जीत को 'अनैतिक' बताया और संकल्प लिया कि वे फिर से वापसी करेंगी।

केरल: वामपंथ का 'लाल किला' ध्वस्त, UDF की वापसी

केरल में पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली LDF सरकार का एक दशक पुराना शासन खत्म हो गया है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF ने 102 सीटें जीतकर शानदार वापसी की है, जबकि LDF को सिर्फ 35 सीटें मिलीं। केरल में भी सत्ता विरोधी लहर ऐसी थी कि स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज सहित सरकार के 13 मंत्रियों को जनता ने नकार दिया। वी शिवनकुट्टी और एमबी राजेश जैसे दिग्गज भी अपनी सीट नहीं बचा पाए।

यहाँ तीनों राज्यों के उन मंत्रियों की पूरी सूची है जो चुनाव हार गए हैं।

तमिलनाडु (15)

एमके स्टालिन (कोलाथुर)

मा सुब्रमण्यम (सैदापेट)

अनबिल महेश पोय्यामोझी (तिरुवेरुम्बुर)

टीआरबी राजा (मन्नारगुडी)

पी मूर्ति (मदुरै पूर्व)

पी गीता जीवन (थूथुकुडी)

आर राजेंद्रन (सेलम उत्तर)

पीटीआर पलानीवेल त्यागराजन (मदुरै सेंट्रल)

दुरई मुरुगन (काटपाडी)

एस मुथुसामी (इरोड पश्चिम)

एसएम नासर (आवाडी)

मथिवेंथन एम (रासीपुरम)

आर गांधी (रानीपेट)

एमपी सामीनाथन (कांगयम)

केआर पेरियाकरुप्पन (तिरुप्पत्तूर)

पश्चिम बंगाल (22)

ममता बनर्जी (भवानीपुर)

अरूप बिस्वास (टॉलीगंज)

ब्रात्य बसु (दमदम)

चंद्रिमा भट्टाचार्य (दमदम उत्तर)

शशि पांजा (श्यामपुकुर)

सुजीत बोस (बिधाननगर)

इंद्रनील सेन (चंदननगर)

बेचाराम मन्ना (सिंगूर)

स्वपन देबनाथ (पूर्बस्थली दक्षिण)

बुलू चिक बरैक (माल)

प्रदीप कुमार मजूमदार (दुर्गापुर पूर्व)

बीरबाहा हांसदा (बिनपुर)

मानस रंजन भुइयां (सबंग)

मलय घटक (आसनसोल उत्तर)

सिद्दीकुल्ला चौधरी (मोंतेश्वर)

उदयन गुहा (दिनहाटा)

संध्यारानी टुडू (मानबाजार)

बंकिम चंद्र हाजरा (सागर)

उज्ज्वल बिस्वास (कृष्णनगर दक्षिण)

स्नेहाशीष चक्रवर्ती (जांगीपाड़ा)

श्रीकांत महतो (सालबोनी)

सत्यजीत बर्मन (हेमताबाद)


केरल (13)

वीणा जॉर्ज (आरणमुला)

एमबी राजेश (थ्रिथला)

पी राजीव (कलमसेरी)

वी शिवनकुट्टी (नेमोम)

आर बिंदु (इरिंजालकुडा)

केबी गणेश कुमार (पठानापुरम)

ओआर केलू (मानंतवाडी)

जे चिंचुरानी (चदयमंगलम)

एके ससींद्रन (एलथुर)

वीएन वासावन (एट्टूमानूर)

वी अब्दुर्रहमान (तिरुूर)

रोशी ऑगस्टीन (इदुक्की)

कडन्नप्पल्ली रामचंद्रन (कन्नूर)

इन चुनावी नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि जनता ने क्षेत्रीय क्षत्रपों के बजाए नए चेहरों और विपक्षी गठबंधनों पर भरोसा जताया है। जहाँ तमिलनाडु में 'सुपरस्टार' विजय ने राजनीति का व्याकरण बदल दिया, वहीं बंगाल में बीजेपी के माइक्रो-मैनेजमेंट ने ममता के दुर्ग को भेद दिया। केरल में बारी-बारी से सत्ता बदलने की पुरानी परंपरा फिर से लौट आई है। आने वाले दिन इन राज्यों की राजनीति के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।

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