
ट्रेड डील से लेकर अडानी तक, राहुल गांधी ने पीएम मोदी सरकार को घेरा
पश्चिम बंगाल की रैली में राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर तीखा हमला बोला, ट्रेड डील, वोटर लिस्ट और अडानी मुद्दे उठाकर सियासी माहौल गरमा दिया।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच सियासी बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें ‘देशद्रोही’ तक कह दिया। उनके इस बयान से राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।
ट्रेड डील और रोजगार पर उठाए सवाल
मालदा में आयोजित रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील से देश के छोटे और मध्यम उद्योगों को भारी नुकसान होगा। उन्होंने आशंका जताई कि इससे बड़े पैमाने पर रोजगार संकट पैदा हो सकता है।
वोटर लिस्ट और SIR पर आरोप
राहुल गांधी ने SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, जो असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सत्ता में आने पर ऐसे सभी नाम फिर से जोड़ेगी।
‘नफरत बनाम मोहब्बत’ की राजनीति
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने अपनी भारत यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कन्याकुमारी से कश्मीर तक करीब 4000 किलोमीटर की पदयात्रा इसलिए की, ताकि नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान खोली जा सके। उनका कहना था कि नफरत देश को कमजोर करती है।
अडानी और सरकार पर निशाना
राहुल गांधी ने उद्योगपति गौतम अडानी और केंद्र सरकार के रिश्तों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हर बड़ा ठेका अडानी को देती है और उनके बीच आर्थिक व राजनीतिक गठजोड़ है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अडानी की कंपनी का नाम “मोदानी” होना चाहिए।
ट्रंप और विदेश नीति पर बयान
राहुल गांधी ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी उनकी बातों के आगे यस सर कहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की विदेश नीति पर अमेरिका का प्रभाव बढ़ गया है और देश के हितों से समझौता किया जा रहा है।
राजनीतिक माहौल हुआ गरम
राहुल गांधी के इन बयानों से चुनावी माहौल और अधिक गर्म हो गया है। जहां कांग्रेस इसे जनता के मुद्दों को उठाने की कोशिश बता रही है, वहीं बीजेपी इस पर पलटवार करने में जुट गई है।बंगाल चुनाव के नजदीक आते ही इस तरह के तीखे बयान यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज़ हो सकते हैं।

