सत्ता के करीब पहुंचकर अटकी TVK, समर्थन जुटाने में लगी पूरी ताकत
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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय की तमिलगा वेत्री कड़गम यानी टीवीके सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है।

सत्ता के करीब पहुंचकर अटकी TVK, समर्थन जुटाने में लगी पूरी ताकत

तमिलनाडु में विजय की TVK बहुमत से 2 सीट दूर है। समर्थन पत्र विवाद और गठबंधन राजनीति के बीच सरकार गठन पर सस्पेंस बना हुआ है।


तमिलनाडु की राजनीति इस समय बेहद दिलचस्प और अस्थिर दौर से गुजर रही है। अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) विधानसभा चुनाव में सबसे बड़े दल के रूप में उभरकर सामने आई है, लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े से अब भी कुछ कदम दूर खड़ी है। सरकार गठन को लेकर चेन्नई से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल तेज है और राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर के साथ विजय की लगातार बैठकों ने राजनीतिक उत्सुकता और बढ़ा दी है।

234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है। हालिया चुनाव में TVK ने 108 सीटें जीतकर सभी को चौंका दिया। हालांकि विजय खुद दो सीटों से चुनाव जीते हैं और संवैधानिक नियमों के तहत उन्हें एक सीट छोड़नी होगी। ऐसे में पार्टी की प्रभावी संख्या घटकर 107 रह जाती है।

सरकार बनाने के लिए विजय को अब भी 11 विधायकों के समर्थन की जरूरत थी। फिलहाल कांग्रेस के पांच विधायकों के अलावा CPI और CPI(M) के दो-दो विधायक टीवीके को बिना शर्त बाहरी समर्थन दे चुके हैं। इसके बाद भी टीवीके का आंकड़ा 116 तक ही पहुंच पाया है और बहुमत साबित करने के लिए अभी भी दो और विधायकों की आवश्यकता है।

इसी बीच सरकार गठन की प्रक्रिया उस समय विवादों में घिर गई जब टीटीवी दिनाकरण की पार्टी अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (AMMK) ने टीवीके के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। दिनाकरण ने आरोप लगाया कि टीवीके ने उनकी पार्टी के इकलौते विधायक एस. कामराज के समर्थन का “फर्जी पत्र” राज्यपाल को सौंपा है। उन्होंने इसे लोकतंत्र का मजाक बताते हुए “हॉर्स ट्रेडिंग” का आरोप लगाया।

विवाद बढ़ने के बाद टीवीके ने पलटवार करते हुए एक वीडियो जारी किया। वीडियो में कथित तौर पर विधायक एस. कामराज खुद समर्थन पत्र लिखते हुए और विजय को समर्थन देने की बात करते नजर आ रहे हैं। टीवीके का दावा है कि यह कदम दिनाकरण की सहमति से उठाया गया था। हालांकि AMMK प्रमुख का कहना है कि उनके विधायक से संपर्क नहीं हो पा रहा है और उन्हें “पोच” कर लिया गया है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह AIADMK के नेतृत्व वाले NDA गठबंधन के साथ ही बनी रहेगी।

उधर विजय को समर्थन देने वाले दलों ने भी अपनी-अपनी शर्तें रखनी शुरू कर दी हैं। कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने का फैसला तो किया है, लेकिन यह स्पष्ट कर दिया है कि गठबंधन में किसी भी सांप्रदायिक दल को शामिल नहीं किया जाएगा। इसके बदले टीवीके ने कांग्रेस को दो मंत्री पद और एक राज्यसभा सीट देने का प्रस्ताव रखा है।

वामपंथी दल CPI और CPI(M) ने भी भाजपा को सत्ता से दूर रखने और राज्य में राष्ट्रपति शासन की संभावना रोकने के लिए टीवीके को बाहरी समर्थन दिया है। हालांकि दोनों दलों ने साफ किया है कि वे सरकार में शामिल नहीं होंगे।

वहीं वीसीके (VCK) के रुख को लेकर अब भी भारी असमंजस बना हुआ है। शुक्रवार शाम पार्टी के आधिकारिक एक्स हैंडल से टीवीके समर्थन का पोस्ट किया गया, लेकिन कुछ ही देर बाद उसे हटा दिया गया। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार वीसीके उपमुख्यमंत्री पद और कैबिनेट में हिस्सेदारी को लेकर कड़ा मोलभाव कर रही है।

मुस्लिम लीग ने शुरुआत में टीवीके को समर्थन देने के संकेत दिए थे, लेकिन बाद में यू-टर्न लेते हुए साफ कर दिया कि वह डीएमके गठबंधन के साथ ही बनी रहेगी।इन तमाम घटनाक्रमों के बीच अब सबकी नजर राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर के अगले फैसले पर टिकी हुई है। राज्यपाल ने फिलहाल विजय की सरकार बनाने की दावेदारी स्वीकार नहीं की है। उनका साफ कहना है कि जब तक 118 विधायकों का लिखित और सत्यापित समर्थन नहीं मिल जाता, तब तक किसी भी दल को सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया जाएगा।

ऐसे में तमिलनाडु की राजनीति में सस्पेंस लगातार बना हुआ है। विजय सरकार बनाने की कोशिशों में जुटे हैं, लेकिन बहुमत का आंकड़ा अभी भी उनकी पहुंच से थोड़ा दूर दिखाई दे रहा है।

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