विधायकों की टूट पर अन्नाद्रमुक की दोटूक, विजय की TVK पर तोड़ी चुप्पी
x
टीवीके प्रमुख अभिनेता विजय। एआईएडीएमके प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी। फाइल फोटो।

विधायकों की टूट पर अन्नाद्रमुक की दोटूक, विजय की TVK पर तोड़ी चुप्पी

अन्नाद्रमुक ने किसी भी प्रकार के विद्रोह की खबरों को खारिज कर दिया है और जोर देकर कहा है कि पार्टी के भीतर 'सब कुछ ठीक' है...


Click the Play button to hear this message in audio format

तमिलनाडु में गुरुवार को एक नया राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जब अन्नाद्रमुक (AIADMK) के एक दर्जन से अधिक नवनिर्वाचित विधायकों को पुडुचेरी के एक रिजॉर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया। इस कदम ने पार्टी के भीतर फूट की अटकलों को हवा दे दी है। माना जा रहा था कि अभिनेता विजय की पार्टी 'टीवीके' (TVK) को अगली सरकार बनाने के लिए समर्थन देने के मुद्दे पर पार्टी में मतभेद हैं।

अन्नाद्रमुक ने किसी भी प्रकार के विद्रोह की खबरों को खारिज कर दिया है और जोर देकर कहा है कि पार्टी के भीतर 'सब कुछ ठीक' है। पार्टी का दावा है कि विधायकों को केवल इसलिए स्थानांतरित किया गया ताकि टीवीके द्वारा उन्हें अपने पाले में करने (पोचिंग) की कोशिशों को रोका जा सके।

समर्थन पर चुप्पी ने बढ़ाया भ्रम

अन्नाद्रमुक के सूत्रों ने एनडीटीवी (NDTV) को बताया कि टीवीके का समर्थन करने वाले गुटों को लेकर भ्रम इसलिए पैदा हुआ क्योंकि पार्टी प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) ने शुरुआत में विजय को समर्थन देने के मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी थी। यह स्थिति तब बनी जब पिछले महीने हुए चुनावों में सुपरस्टार विजय की पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। सूत्रों ने स्वीकार किया कि इसी चुप्पी ने उन अटकलों को बल दिया कि कुछ विधायक विजय का समर्थन कर रहे हैं।

उन्हीं सूत्रों ने बताया कि अब ईपीएस (EPS) ने टीवीके को समर्थन न देने के पार्टी के रुख को स्पष्ट रूप से बता दिया है, और पार्टी के सभी विधायक उनके इस फैसले के साथ हैं।

पुडुचेरी रिजॉर्ट का घटनाक्रम

इससे पहले यह चर्चा थी कि पुडुचेरी के रिजॉर्ट में मौजूद 12 से अधिक विधायक, जो उस रिजॉर्ट से लगभग 120 किमी दूर थे, जहां टीवीके ने अपने विधायकों को रखा है। ईपीएस पर टीवीके को समर्थन देने के लिए दबाव बना रहे थे। कथित तौर पर पुडुचेरी में ठहरने की व्यवस्था अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सी.वी. षणमुगम द्वारा की गई थी। हालांकि बाद में उन्होंने ऐसी किसी भी योजना से इनकार किया।

इस बीच, अन्नाद्रमुक ने यह भी स्पष्ट किया है कि टीवीके ने समर्थन के लिए उनसे संपर्क नहीं किया है। सी.वी. षणमुगम ने कहा, "टीवीके ने अन्नाद्रमुक का समर्थन नहीं मांगा है। इस पर पार्टी को फैसला करना है।" वरिष्ठ नेता के.पी. मुनुसामी ने भी इसी बात को दोहराते हुए कहा, "अन्नाद्रमुक ने टीवीके को कोई समर्थन नहीं दिया है। पार्टी प्रमुख ईपीएस की मंजूरी के साथ मैं यह घोषणा कर रहा हूं।"

अन्नाद्रमुक की लगातार चौथी हार

यह राजनीतिक उथल-पुथल ऐसे समय में हो रही है, जब पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के निधन के बाद अन्नाद्रमुक को लगातार चौथी चुनावी हार का सामना करना पड़ा है। साल 2019 के लोकसभा चुनाव, 2021 के विधानसभा चुनाव, 2024 के लोकसभा चुनाव और अब 2026 के विधानसभा चुनाव।

इस बदलाव की गंभीरता टीवीके की बड़ी जीत से रेखांकित होती है। अपने पहले चुनाव में उतरी इस पार्टी ने राज्य की 234 सीटों में से 108 सीटें जीती हैं। हालांकि वह बहुमत के आंकड़े से कुछ ही दूर रह गई। विजय को 10 और सीटों की आवश्यकता है, और यदि वह पेरम्बलूर सीट रखने के लिए त्रिची ईस्ट सीट से इस्तीफा देते हैं, तो उन्हें 11 सीटों की जरूरत होगी।

बहुमत की गणित और गठबंधन की कोशिशें

विजय ने पहले ही कांग्रेस के पांच विधायकों का समर्थन हासिल कर लिया है। क्योंकि राष्ट्रीय पार्टी ने टीवीके को सशर्त समर्थन देने का फैसला किया है। इसके अलावा, उन्होंने दो वामपंथी दलों सीपीआई और सीपीआई(एम) से समर्थन मांगा है, जिनके पास कुल चार सीटें हैं। साथ ही उन्होंने द्रमुक (DMK) के सहयोगी वीसीके (VCK) से भी संपर्क किया है, जिसके पास दो सीटें हैं। उम्मीद है कि वामपंथी दल आज इस पर फैसला लेंगे।

हालांकि, टीवीके के सूत्रों ने जोर देकर कहा है कि विजय अन्नाद्रमुक से समर्थन लेने के इच्छुक नहीं हैं। क्योंकि अन्नाद्रमुक का भाजपा के साथ गठबंधन है, जिसे विजय बार-बार अपना वैचारिक प्रतिद्वंद्वी बताते रहे हैं। सूत्रों ने यह भी कहा कि टीवीके को डर है कि अन्नाद्रमुक के साथ किसी भी समझौते से भविष्य की टीवीके सरकार में भाजपा के प्रभाव के लिए दरवाजे खुल सकते हैं।

यद्यपि टीवीके ने बुधवार को ही सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया था। लेकिन राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन द्वारा कथित तौर पर विजय से उन्हें समर्थन देने वाले सभी 118 विधायकों की सूची सौंपने के लिए कहे जाने के बाद, औपचारिक निमंत्रण की प्रक्रिया में देरी हुई है।

Read More
Next Story