
पुनर्मतदान और मतगणना पर रार, सुप्रीम कोर्ट पहुंची ममता की पार्टी
टीएमसी ने मतगणना में केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, वहीं बंगाल के कुछ क्षेत्रों में पुनर्मतदान से सियासत गरमा गई है।
सुप्रीम कोर्ट में आज तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई होगी। यह याचिका कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देती है, जिसमें निर्वाचन आयोग (ईसी) के उस निर्देश के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया गया था। इस निर्देश में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना के लिए केंद्रीय सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) के कर्मचारियों की तैनाती का प्रावधान किया गया था।
294 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो चरणों में हुआ था, जबकि मतगणना 4 मई को निर्धारित है। हाई कोर्ट ने गुरुवार को टीएमसी की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि मतगणना पर्यवेक्षकों और सहायकों के रूप में राज्य सरकार के कर्मचारियों के बजाय केंद्रीय सरकार और पीएसयू कर्मचारियों की नियुक्ति में कोई अवैधता नहीं है।2 मई की कारण सूची के अनुसार, टीएमसी की याचिका पर न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ सुनवाई करेगी।
हाई कोर्ट में टीएमसी की दलील
हाई कोर्ट में टीएमसी ने 30 अप्रैल को पश्चिम बंगाल के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी एक संचार को चुनौती दी थी, जिसमें कहा गया था कि हर टेबल पर कम से कम एक मतगणना पर्यवेक्षक या सहायक केंद्रीय सरकार या पीएसयू का कर्मचारी होना चाहिए।टीएमसी के वकील ने तर्क दिया कि यह आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर और केवल आशंकाओं पर आधारित है। वहीं, निर्वाचन आयोग की ओर से कहा गया कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 आयोग को अपने कार्यों के प्रत्यायोजन की अनुमति देता है और यह निर्देश वैध है। आयोग के वकील ने यह भी कहा कि यह आदेश 13 अप्रैल को जारी किया गया था, जबकि याचिका 30 अप्रैल को, मतगणना के ठीक पहले दाखिल की गई, जिससे यह प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास प्रतीत होता है।
हाई कोर्ट ने टीएमसी के इस आरोप को भी खारिज कर दिया कि उसका मुख्य प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) केंद्रीय कर्मचारियों को नियंत्रित करती है। अदालत ने यह भी कहा कि मतगणना हॉल में अन्य कर्मी जैसे माइक्रो-ऑब्जर्वर, उम्मीदवारों के एजेंट आदि भी मौजूद रहेंगे।
पुनर्मतदान का आदेश
इस बीच, निर्वाचन आयोग ने दक्षिण 24 परगना जिले के दो विधानसभा क्षेत्रों में 15 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान का आदेश दिया है। यह पुनर्मतदान 2 मई को होगा। इनमें 11 बूथ मगरहाट पश्चिम विधानसभा क्षेत्र और 4 बूथ डायमंड हार्बर में हैं। मतदान सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगा।
यह निर्णय रिटर्निंग अधिकारियों और पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट तथा अन्य परिस्थितियों के आधार पर लिया गया। फलता विधानसभा क्षेत्र में पुनर्मतदान पर फैसला बाद में लिया जाएगा, क्योंकि वहां की रिपोर्ट अभी लंबित है।
भाजपा ने आरोप लगाया था कि डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कई बूथों पर चुनावी गड़बड़ियां हुई हैं। यह क्षेत्र टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का निर्वाचन क्षेत्र है। इन आरोपों की जांच के लिए आयोग ने विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता को नियुक्त किया था।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि भाजपा को पता है कि वह इन क्षेत्रों में भारी अंतर से हारने वाली है, इसलिए वह पुनर्मतदान की मांग कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग की मदद से लोगों को दोबारा मतदान की प्रक्रिया से गुजरने के लिए मजबूर किया जा रहा है।वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि इन इलाकों के कई बूथों पर टीएमसी के पक्ष में गड़बड़ियां हुई थीं और पुनर्मतदान का फैसला उचित है।

