ऑटो ड्राइवर से MLA बने विजय दामू पर अब उठने लगे सवाल
x

ऑटो ड्राइवर से MLA बने विजय दामू पर अब उठने लगे सवाल

ऑटो ड्राइवर से विधायक बने विजय दामू का चुनावी हलफनामा वायरल होने के बाद उनकी आर्थिक पृष्ठभूमि और TVK उम्मीदवारों पर सवाल उठने लगे हैं।


तमिलनाडु विधानसभा चुनाव परिणामों के बीच टीवीके (TVK) के रोयापुरम उम्मीदवार विजय दामू की कहानी सोमवार (4 मई) को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई। एक साधारण ऑटो ड्राइवर से विधायक बनने तक का उनका सफर प्रेरणादायक बताया गया और कई लोगों ने इसे “आम आदमी की जीत” करार दिया।लेकिन अब विजय दामू खुद सोशल मीडिया यूजर्स और नेटिज़न्स के निशाने पर आ गए हैं। वजह बना उनका चुनावी हलफनामा, जो इंटरनेट पर वायरल हो रहा है।

हलफनामे के अनुसार विजय दामू के पास खुद का एक भी ऑटो-रिक्शा नहीं है। इसके बजाय उनके पास एक इनोवा कार और दो मोटरसाइकिलें दर्ज हैं। इसे लेकर कई लोग उनके “गरीब और संघर्षपूर्ण पृष्ठभूमि” वाले दावों पर सवाल उठा रहे हैं।कुछ लोगों का कहना है कि उनके चुनावी दस्तावेजों से कहीं भी ऐसा नहीं लगता कि वह बेहद आर्थिक तंगी वाले परिवार से आते हैं।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब टीवीके प्रमुख विजय राज्य में सरकार बनाने के लिए जरूरी आंकड़े जुटाने में संघर्ष कर रहे हैं। तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने साफ कर दिया है कि सरकार गठन की अनुमति देने से पहले उन्हें 118 विधायकों के समर्थन का प्रमाण चाहिए।

हलफनामे में क्या है?

मीडिया रिपोर्ट्स, जिनमें द फेडरल की रिपोर्ट भी शामिल है, में विजय दामू को “पूर्व ऑटो ड्राइवर” बताया गया था। यह भी कहा गया कि उनके पास न तो कोई राजनीतिक विरासत थी और न ही आर्थिक ताकत।हालांकि उनके चुनावी हलफनामे में पेशे के तौर पर “ऑटो कंसल्टिंग बिजनेस” लिखा गया है। उन्होंने कुल 28.9 लाख रुपये की संपत्ति घोषित की है और किसी भी प्रकार की देनदारी (Liabilities) नहीं दिखाई है।महत्वपूर्ण बात यह है कि हलफनामे में उन्होंने खुद को वर्तमान में ऑटो ड्राइवर नहीं बताया है।

अपने हलफनामे के अनुसार विजय दामू एक निम्न-मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं, उनके परिवार का राजनीति से कोई संबंध नहीं रहा और उनकी पढ़ाई केवल आठवीं कक्षा तक हुई है।

बड़े नेताओं को हराकर बने विधायक

विजय दामू ने रोयापुरम सीट से चुनाव जीतकर तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर किया। उन्होंने एआईएडीएमके के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री डी. जयकुमार तथा डीएमके उम्मीदवार डॉ. ए. सुबैर खान को हराया। सुबैर खान, पूर्व मंत्री रहमान खान के बेटे हैं। ऐसे में दामू की जीत को टीवीके और अभिनेता-विजय की राजनीति के उभार का बड़ा प्रतीक माना गया।

सिर्फ दामू ही नहीं, TVK के कई उम्मीदवारों पर सवाल

विजय दामू का हलफनामा ही अकेला विवाद नहीं है।एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट के अनुसार टीवीके के 231 उम्मीदवारों में से 92 उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी दी है।इनमें से 43 उम्मीदवारों ने गंभीर आपराधिक मामलों का भी खुलासा किया है।

ADR–तमिलनाडु इलेक्शन वॉच रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 40 प्रतिशत TVK उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। करीब 19 प्रतिशत उम्मीदवार गंभीर मामलों का सामना कर रहे हैं। हालांकि डीएमके और एआईएडीएमके जैसे अन्य दलों में भी ऐसे मामलों की संख्या कम नहीं है, लेकिन टीवीके के उम्मीदवारों पर इसलिए ज्यादा सवाल उठ रहे हैं क्योंकि अभिनेता विजय ने राजनीति में प्रवेश करते समय “सिस्टम की सफाई” और स्वच्छ राजनीति का वादा किया था।

FIR छिपाने के आरोप भी

कुछ अपुष्ट रिपोर्ट्स में यह दावा भी किया गया है कि टीवीके के कुछ उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ दर्ज पुराने एफआईआर का पूरा विवरण हलफनामे में नहीं दिया।अगर ये आरोप सही साबित होते हैं, तो भविष्य में ऐसे विधायकों की सदस्यता रद्द होने तक की नौबत आ सकती है।फिलहाल विजय दामू और टीवीके दोनों ही सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बढ़ते सवालों के बीच घिरते नजर आ रहे हैं।

Read More
Next Story