
चुनावी नतीजों में TVK सबसे आगे, अब तमिलनाडु में सरकार गठन पर सस्पेंस
तमिलनाडु चुनाव 2026 में विजय की TVK बड़ी ताकत बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत से दूर रहने पर सरकार गठन के लिए गठबंधन अहम भूमिका निभा सकता है।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 ने राज्य की राजनीति में एक बड़ा बदलाव संकेतित किया है। अभिनेता से नेता बने Vijay और उनकी पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam एक बड़ी ताकत के रूप में उभरी है और संभवतः सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आ सकती है।करीब छह दशकों में यह पहली बार है जब कोई गैर-द्रविड़ पार्टी राज्य में सरकार बनाने की स्थिति में नजर आ रही है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विजय अपने दम पर सरकार बना पाएंगे।
बहुमत का गणित और संभावित समीकरण
234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 सीटों का है। यदि टीवीके इस आंकड़े से पीछे रह जाती है, तो तमिलनाडु में गठबंधन सरकार बनने की संभावना बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में विजय और कांग्रेस मिलकर सरकार बना सकते हैं, या फिर विजय अल्पमत सरकार बनाने का विकल्प चुन सकते हैं—जो कि लगभग दो दशक पहले देखा गया था।
अतीत का उदाहरण
तमिलनाडु में अल्पमत सरकार का उदाहरण पहले भी देखने को मिला है। 2006 में M. Karunanidhi के नेतृत्व में Dravida Munnetra Kazhagam ने केवल 96 सीटों के साथ सरकार बनाई थी, जो बहुमत से काफी कम थी।यह सरकार कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों के बाहरी समर्थन से चली और करुणानिधि ने मुख्यमंत्री के रूप में अपना पांचवां कार्यकाल पूरा किया। उस समय J. Jayalalithaa ने इस व्यवस्था की आलोचना की थी, लेकिन सरकार अपना कार्यकाल पूरा करने में सफल रही।
विजय के सामने विकल्प
अब विजय के सामने भी ऐसे ही विकल्प मौजूद हैं। वे बाहरी समर्थन के साथ सरकार बना सकते हैं। क्षेत्रीय दल जैसे पीएमके, वीसीके और डीएमडीके, साथ ही वामपंथी दल जैसे सीपीआई(एम) अहम भूमिका निभा सकते हैं, यदि उनके पास पर्याप्त सीटें होती हैं।एक अन्य संभावना AIADMK के साथ चुनाव बाद समझौते की है, लेकिन यह आसान नहीं है। विजय ने खुद को द्रविड़ राजनीति के दोनों प्रमुख दलों के विकल्प के रूप में पेश किया है, ऐसे में एआईएडीएमके से गठबंधन उनके ‘एंटी-एस्टैब्लिशमेंट’ छवि को कमजोर कर सकता है। साथ ही, यह भी स्पष्ट नहीं है कि Edappadi K. Palaniswami अपनी नेतृत्व भूमिका छोड़ने को तैयार होंगे या नहीं।
बीजेपी से गठबंधन की संभावना कम
Bharatiya Janata Party के साथ गठबंधन की संभावना फिलहाल बेहद कम मानी जा रही है। विजय लगातार बीजेपी को राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में पेश करते रहे हैं, जिससे चुनाव बाद किसी समझौते की संभावना कमजोर दिखती है।
कांग्रेस की भूमिका अहम
ऐसे में Indian National Congress एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सूत्रों के अनुसार, बैक-चैनल बातचीत शुरू हो चुकी है। कांग्रेस बिना सरकार में शामिल हुए बाहरी समर्थन दे सकती है।इस संभावित व्यवस्था में वीसीके, सीपीआई, सीपीआई(एम) और आईयूएमएल जैसे छोटे दल भी शामिल हो सकते हैं। चूंकि इन दलों की सीटें सीमित होंगी, इसलिए विजय के लिए गठबंधन प्रबंधन अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
निर्णायक मोड़ पर विजय
विजय के लिए यह एक निर्णायक राजनीतिक क्षण है। सिनेमा से राजनीति में कदम रखने के बाद वे अब देश के सबसे गतिशील राज्यों में से एक में सत्ता के करीब खड़े हैं।लेकिन सरकार बनाना ही अंतिम लक्ष्य नहीं है। उसे स्थिर बनाए रखना ज्यादा चुनौतीपूर्ण होगा। इसके लिए उन्हें गठबंधन संतुलन, अलग-अलग हितों का प्रबंधन और प्रशासनिक स्थिरता सुनिश्चित करनी होगी।जैसे-जैसे चुनाव परिणाम स्पष्ट होते जाएंगे, एक बड़ा सवाल बना रहेगा—क्या विजय के नेतृत्व में तमिलनाडु को स्थिर सरकार मिलेगी, या राज्य फिर से गठबंधन युग की ओर बढ़ेगा?

