
ममता बनर्जी की हार के बाद बंगाल में इस्तीफों की लहर, पूर्व नौकरशाहों और अर्थशास्त्रियों ने छोड़े पद
पश्चिम बंगाल में भाजपा की प्रचंड जीत और टीएमसी की हार के बाद राज्य प्रशासन में खलबली मच गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी पूर्व मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय, एच.के. द्विवेदी और अर्थशास्त्री अभिरूप सरकार सहित कई सलाहकारों ने दिया इस्तीफा।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति को पूरी तरह से बदल दिया है। जहाँ एक तरफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी हार स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं और इस्तीफा देने से इनकार कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर उनके द्वारा नियुक्त किए गए पूर्व नौकरशाहों और सलाहकारों ने नैतिक आधार पर अपने पदों से इस्तीफा देना शुरू कर दिया है। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बंगाल में अब 'दीदी' के शासन का प्रशासनिक ढांचा बिखर रहा है।
इस्तीफों की झड़ी: कौन-कौन शामिल?
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार के बाद इस्तीफा देने वालों में वे नाम शामिल हैं जो ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद माने जाते थे। इनमें प्रमुख रूप से पूर्व मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय, एच.के. द्विवेदी और मनोज पंत शामिल हैं। इसके अलावा प्रख्यात अर्थशास्त्री अभिरूप सरकार ने भी अपने पदों को छोड़ दिया है।
अभिरूप सरकार ने बुधवार को मीडिया से बात करते हुए इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा, "मैं पश्चिम बंगाल बुनियादी ढांचा विकास वित्त निगम (WBIDC) और पश्चिम बंगाल लघु उद्योग विकास निगम (WBSIDC) का अध्यक्ष था। मैंने मंगलवार को ही संबंधित विभागों के सचिवों को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।"
नैतिकता का हवाला: 'जब मुख्यमंत्री ही नहीं रहीं, तो हम क्यों?'
नौकरशाहों के इस सामूहिक इस्तीफे के पीछे का तर्क पूरी तरह से नैतिक है। अभिरूप सरकार ने स्पष्ट किया कि भले ही वे एक राजनीतिक व्यक्ति नहीं हैं, लेकिन उनकी नियुक्तियां 'राजनीतिक' थीं। उन्होंने कहा, "ममता बनर्जी ने मुझे नियुक्त किया था। अब जब वे चुनाव हार गई हैं, तो मेरे पास पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।"
यह रुख अलपन बंद्योपाध्याय का भी रहा, जो 2021 में केंद्र और राज्य के बीच विवाद का मुख्य केंद्र बने थे। उस समय चक्रवात यास के बाद प्रधानमंत्री की बैठक में शामिल न होने पर केंद्र ने उन्हें वापस दिल्ली बुलाया था, लेकिन ममता बनर्जी ने उन्हें अपना मुख्य सलाहकार नियुक्त कर दिया था। बंद्योपाध्याय ने भी मंगलवार को मुख्य सचिव को अपना इस्तीफा भेज दिया।
एडवोकेट जनरल और मीडिया सलाहकारों का भी किनारा
प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ राज्य के एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने भी राज्यपाल आर.एन. रवि को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। दत्ता दिसंबर 2023 से इस पद पर थे। इसके अलावा, सूचना और सांस्कृतिक मामलों के विभाग में मीडिया सलाहकार के रूप में कार्यरत एक पूर्व पत्रकार ने भी अपना पद छोड़ दिया है। सचिवालय के सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में कई और कमेटियों और आयोगों के अध्यक्ष भी पद छोड़ सकते हैं।
ममता बनर्जी का इनकार और भाजपा का तीखा हमला
हैरानी की बात यह है कि जहाँ उनके करीबी अधिकारी पद छोड़ रहे हैं, वहीं ममता बनर्जी ने खुद मुख्यमंत्री पद से हटने से मना कर दिया है। उनका दावा है कि चुनाव परिणामों में धांधली हुई है और चुनाव आयोग ने भाजपा के साथ मिलकर जनादेश लूटा है।
इस पर भाजपा के वरिष्ठ नेता राहुल सिन्हा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, "हर कोई मुख्यमंत्री की तरह बेशर्म नहीं होता, इसलिए इन अधिकारियों ने इस्तीफा दिया है। ममता बनर्जी चुनाव हार चुकी हैं, बंगाल की जनता ने उन्हें नकार दिया है, यहाँ तक कि वे अपने गढ़ से भी हार गई हैं, फिर भी वे कुर्सी से चिपकी हुई हैं।"
क्या होगा अगला कदम?
भाजपा ने 294 सीटों में से 207 पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है, जबकि टीएमसी मात्र 80 सीटों पर सिमट गई है। नियमों के मुताबिक, बहुमत खोने के बाद मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना होता है। अब सबकी निगाहें राजभवन पर टिकी हैं कि क्या राज्यपाल ममता बनर्जी को बर्खास्त करेंगे या वे खुद इस्तीफा देंगी। फिलहाल, उनके सलाहकारों का इस्तीफा देना यह साबित करता है कि सरकारी तंत्र ने अब भाजपा की नई सरकार के स्वागत की तैयारी शुरू कर दी है।

