
अमेरिकी पाबंदियों का मामला: अडानी ग्रुप 27.5 करोड़ डॉलर देने पर सहमत
अडानी एंटरप्राइजेज ने ईरान से एलपीजी आयात से जुड़े प्रतिबंध उल्लंघन मामले में अमेरिकी वित्त विभाग (OFAC) के साथ किया समझौता, जांच में सहयोग के बाद घटा जुर्माना।
Adani Enterprises Limited: अडानी समूह की फ्लैगशिप कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) ने ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन के मामले में अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) के साथ एक बड़ा समझौता किया है। कंपनी संभावित नागरिक दायित्व (Civil Liability) को निपटाने के लिए 27.5 करोड़ डॉलर (करीब 2,300 करोड़ रुपये) का भुगतान करने पर सहमत हुई है। यह मामला मुंद्रा पोर्ट (गुजरात) के जरिए ईरानी मूल की एलपीजी (LPG) के आयात से जुड़े 32 संभावित उल्लंघनों से संबंधित है।
कंपनी की ओर से जारी खुलासे के मुताबिक, इस समझौते का मतलब दोष या गलत काम की स्वीकारोक्ति नहीं है, बल्कि इससे कंपनी के सभी संबंधित कानूनी दायित्वों का निपटारा हो गया है।
दुबई के व्यापारी के जरिए भारत पहुंची थी ईरानी एलपीजी
अमेरिकी वित्त विभाग (OFAC) के आदेश के अनुसार, नवंबर 2023 से जून 2025 के बीच अडानी एंटरप्राइजेज ने दुबई के एक व्यापारी से लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की खेप खरीदी थी। इस सप्लायर ने दावा किया था कि वह ओमान और इराक से गैस की आपूर्ति कर रहा है। लेकिन वास्तव में, वह कंपनी बाजार में अवैध ईरानी एलपीजी की सप्लाई के लिए एक माध्यम के रूप में काम कर रही थी।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इस आयात में शामिल कोई भी पक्ष उस समय प्रतिबंधित सूची में नहीं था और न ही अडानी ग्रुप को दिए गए दस्तावेजों में कहीं भी इसके ईरानी मूल के होने का जिक्र था। हालांकि, अडानी एंटरप्राइजेज और अडानी पोर्ट्स का 'सेंक्शन कंप्लायंस प्रोग्राम' इस तरह के छिपे हुए जोखिमों को पकड़ने में पूरी तरह सक्षम नहीं था।
जून 2025 में हुआ था खुलासा, अडानी ने खुद की थी रिपोर्ट
जून 2025 में जब मीडिया में इन आरोपों की सार्वजनिक रिपोर्ट सामने आई, तो अडानी एंटरप्राइजेज ने तुरंत सभी एलपीजी आयातों को निलंबित कर दिया। कंपनी ने इस मामले की व्यापक आंतरिक जांच के लिए अमेरिकी कानूनी सलाहकारों की मदद ली।
स्व रिपोर्ट : अडानी ग्रुप ने जांच के बाद अपने निष्कर्षों को खुद ही ओफैक के सामने पेश किया और जांच में पूरा सहयोग दिया।
जुर्माने में राहत: नियमों के तहत इस मामले में अधिकतम जुर्माना 38.4 करोड़ डॉलर तक जा सकता था। लेकिन अडानी ग्रुप के सहयोग, खुद जानकारी देने और कंप्लायंस प्रोग्राम में सुधार के सुधारात्मक कदमों को देखते हुए अमेरिकी एजेंसी ने जुर्माने की राशि घटाकर 27.5 करोड़ डॉलर कर दी।
अमेरिकी अदालतों में अडानी के सभी मामले सुलझने की ओर
अडानी समूह के लिए पिछले कुछ दिन अमेरिकी कानूनी मोर्चे पर बड़ी राहत लेकर आए हैं। पिछले ही हफ्ते, गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी ने अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (SEC) के साथ एक रिन्यूएबल्स यूनिट के मामले में 1.8 करोड़ डॉलर देकर नागरिक मुकदमे को सुलझाया था।
अमेरिकी अधिकारियों के साथ हो रहा यह ताजा समझौता एक व्यापक समाधान का हिस्सा है, जिसके तहत अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) आपराधिक धोखाधड़ी के आरोपों को खारिज करने की दिशा में बढ़ रहा है, जबकि ट्रेजरी विभाग ने प्रतिबंधों के उल्लंघन के लिए यह नागरिक जुर्माना लगाया है। इन सभी मामलों के सुलझने से पिछले कई महीनों से अडानी समूह पर बना कानूनी और नियामकीय संकट (Regulatory Overhang) पूरी तरह खत्म होने की उम्मीद है।
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