करिश्मा कपूर के बच्चों की बड़ी जीत, संजय कपूर की ₹30000 करोड़ की संपत्ति हुई फ्रीज़
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करिश्मा कपूर के बच्चों की बड़ी जीत, संजय कपूर की ₹30000 करोड़ की संपत्ति हुई फ्रीज़

दिल्ली हाई कोर्ट ने दिवंगत व्यवसायी संजय कपूर की लगभग ₹30,000 करोड़ रुपये की अनुमानित संपत्ति को फिलहाल जैसा है, वैसा ही रखने का कड़ा अंतरिम आदेश दिया है। कोर्ट ने मृतक की भारतीय कंपनियों के शेयर हस्तांतरण और उनकी महंगी पेंटिंग्स आदि के निपटान पर पूर्ण रोक लगा दी है।


बिजनेस जगत और बॉलीवुड गलियारों से एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। दिवंगत दिग्गज व्यवसायी संजय कपूर की अकूत संपत्ति को लेकर चल रहे पारिवारिक विवाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और कड़ा अंतरिम आदेश पारित किया है। गुरुवार (30 अप्रैल) को न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने आदेश दिया कि संजय कपूर की संपत्ति को फिलहाल 'जैसा है, वैसा ही' (Intact) रखा जाए। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि करिश्मा कपूर के बच्चों द्वारा उठाए गए सवालों के पूरी तरह से समाधान होने से पहले, संजय कपूर की कथित वसीयत को अंतिम नहीं माना जा सकता। यह फैसला संजय कपूर की दूसरी पत्नी प्रिया कपूर के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि कोर्ट ने वसीयत के इर्द-गिर्द "संदिग्ध परिस्थितियों" को दूर करने की पूरी जिम्मेदारी (Onus) उन्हीं पर डाल दी है।

मामले की पृष्ठभूमि और बच्चों की चुनौती

यह पूरा कानूनी संग्राम संजय कपूर की लगभग ₹30,000 करोड़ रुपये की अनुमानित संपत्ति के वितरण को लेकर है। संजय कपूर का निधन 12 जून 2025 को इंग्लैंड में एक पोलो मैच के दौरान दिल का दौरा पड़ने से हुआ था। उनके निधन के बाद, उनकी वसीयत को लेकर विवाद शुरू हो गया। संजय कपूर की पहली पत्नी (तलाकशुदा) बॉलीवुड अभिनेत्री करिश्मा कपूर हैं, जिनसे उनके दो बच्चे हैं। इन बच्चों ने एक दीवानी मुकदमे (Civil Suit) के माध्यम से अपने पिता की कथित अंतिम वसीयत की प्रामाणिकता और वैधता को कड़ी चुनौती दी है। बच्चों का आरोप है कि जिस वसीयत के आधार पर संपत्ति का बंटवारा करने की कोशिश की जा रही है, वह संदिग्ध है।

हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी और प्रथम दृष्टया मामला

जस्टिस ज्योति सिंह ने करिश्मा कपूर के बच्चों द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने अपने पिता की संपत्ति के किसी भी हस्तांतरण या निपटान (Transfer or Disposal) पर रोक लगाने की मांग की थी। बच्चों का तर्क था कि यदि मुकदमा लंबित रहने के दौरान संपत्ति बेच दी गई या हस्तांतरित कर दी गई, तो उन्हें अपूरणीय क्षति होगी।

याचिका को सुनने और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्रियों की गहन जांच करने के बाद, जस्टिस सिंह ने एक विचारशील दृष्टिकोण अपनाया। जज ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा, "पक्षकारों को सुनने और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री की जांच करने के बाद, मेरा यह सुविचारित मत है कि वादियों (करिश्मा कपूर के बच्चों) द्वारा उठाए गए सभी वैध संदिग्ध परिस्थितियों (Legitimate Suspicious Circumstances) को प्रतिवादी नंबर एक (प्रिया कपूर) द्वारा पूरी तरह से दूर करना होगा, इससे पहले कि इस दस्तावेज़ को अंतिम वसीयत के रूप में स्वीकार किया जाए।"

अदालत ने आगे जोड़ा कि वादियों (बच्चों) ने एक 'प्रथम दृष्टया मामला' (Prima Facie Case) बनाया है कि जिन संपत्तियों पर विवाद है, उन्हें मुकदमे के निपटारे तक पूरी तरह से संरक्षित और सुरक्षित (Protected and Preserved) रखने की आवश्यकता है। यह टिप्पणी इस बात का संकेत है कि कोर्ट बच्चों के आरोपों में दम मान रही है।

कोर्ट द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंध

अदालत ने अपने अंतरिम आदेश के माध्यम से संजय कपूर की संपत्ति पर कई कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। जस्टिस सिंह ने विशेष रूप से आदेश दिया कि मृतक व्यवसायी की तीन भारतीय कंपनियों में उनकी इक्विटी शेयरहोल्डिंग (Equity Shareholdings) में कोई भी बदलाव नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही, कोर्ट ने उनकी व्यक्तिगत वस्तुओं (Personal Effects), जिनमें महंगी कलाकृतियाँ (Artwork) भी शामिल हैं, के निपटान या बिक्री पर भी पूर्ण रूप से रोक लगा दी है।

अदालत ने इन प्रतिबंधों के पीछे का तर्क भी स्पष्ट किया। कोर्ट ने कहा कि यदि इन संपत्तियों को अभी संरक्षित नहीं किया जाता है और आगे चलकर प्रिया कपूर वसीयत की वैधता और प्रामाणिकता को साबित करने में विफल रहती हैं, तो करिश्मा कपूर के बच्चों और संजय कपूर की मां रानी कपूर को उनके वैध हिस्सों (Legitimate Shares) से वंचित होना पड़ेगा।

जज ने अपने आदेश में कहा, "मैंने तीन भारतीय कंपनियों में इक्विटी शेयरहोल्डिंग को अलग करने, हस्तांतरित करने, गिरवी रखने, लिक्विडेट करने या किसी अन्य तरीके से बदलने से रोक दिया है। मैंने भविष्य निधि (PF) की राशि निकालने से रोक दिया है। मैंने तीन बैंक खातों से पैसे निकालने से रोक दिया है, सिवाय उस सीमा तक जो बच्चों के प्रति देनदारियों (Liabilities) के निर्वहन के लिए आवश्यक हो।" यह अंतिम बिंदु करिश्मा कपूर के बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत है, क्योंकि इससे उनकी तत्कालीन जरूरतों के लिए फंड सुनिश्चित होगा।

विदेशी संपत्तियों पर स्पष्टीकरण और सुप्रीम कोर्ट का संदर्भ

दिल्ली हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसका यह अंतरिम आदेश मृतक की 'अचल विदेशी संपत्तियों' (Immovable Foreign Assets) पर लागू नहीं होता है। इस पर कोर्ट ने कोई आदेश पारित नहीं किया है। मामले में फैसले की विस्तृत प्रति का अभी इंतजार है।

यह ध्यान देने योग्य है कि यह विवाद पहले सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुँच चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने एक पारिवारिक ट्रस्ट विवाद में संजय कपूर की 80 वर्षीय माँ रानी कपूर से कहा था, "यह लड़ने की उम्र नहीं है"। इस टिप्पणी के बावजूद, संपत्ति का आकार और वसीयत की प्रामाणिकता को देखते हुए, यह कानूनी लड़ाई लंबी खिंचती दिख रही है।

दिल्ली हाई कोर्ट का यह अंतरिम आदेश करिश्मा कपूर के बच्चों के लिए एक बड़ी कानूनी जीत है और प्रिया कपूर के लिए एक बड़ी चुनौती। कोर्ट ने साफ़ कर दिया है कि जब तक ₹30,000 करोड़ की संपत्ति की वसीयत पर लगे संदेह के बादल नहीं छंटते, तब तक कोई भी संपत्ति को छू नहीं सकता। अब पूरी जिम्मेदारी प्रिया कपूर पर है कि वे साबित करें कि वसीयत पूरी तरह से असली है और कोई भी संदिग्ध परिस्थिति नहीं है। इस हाई-प्रोफाइल मामले के अगले चरण पर सबकी नज़र टिकी रहेगी, जहाँ कोर्ट वसीयत की सच्चाई पर गहराई से विचार करेगा।

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