मिडिल ईस्ट में तनाव का असर: लोग कम कर रहे खर्च, बढ़ी महंगाई की चिंता, कॉरपोरेट जगत परेशान
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मिडिल ईस्ट में तनाव का असर: लोग कम कर रहे खर्च, बढ़ी महंगाई की चिंता, कॉरपोरेट जगत परेशान

मिडिल ईस्ट संकट के चलते सप्लाई चेन से लेकर कंज्यूमर खर्च तक हर जगह असर देखने को मिल रहा है. महंगाई बढ़ने का लोगों को डर सता रहा है. कंपनियों ने चेतावनी दी है कि लोग कम खर्च कर रहे हैं.


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अमेरिका - इजरायल ( United States Israel) के ईरान (Iran) पर हमले के दो महीने पूरे होने वाले हैं. भले ही फिलहाल अमेरिका ईरान के बीच सीजफायर चल रहा हो. लेकिन हालात नाजुक बने हुए हैं. तनाव का असर ये है कि भारत में लोग खर्च करने में सावधानी बरत रहे हैं और गैर जरूरी चीजों पर कम खर्च कर रहे हैं क्योंकि उन्हें महंगाई बढ़ने का डर सता रहा है. ये कहना टाटा समूह की रिटेल कंपनी ट्रेंट (Trent) का जो भारत में Westside और Zudio के नाम से रिटेल स्टोर चलाती है.

कंज्यूमर्स खर्च करने में बरत रहे सावधानी

Trent ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए तिमाही नतीजे घोषित करने के साथ ही इंवेस्टर्स प्रेजेंटेशन दिया है. और इस प्रेजेंटेशन में Trent ने जो बातें कही है वो अर्थव्यवस्था की सेहत के लिए कतई ठीक नहीं है. Trent ने कहा, चौथी तिमाही की शुरुआत में कंज्यूमर सेंटीमेंट ठीक था. लेकिन अब वैश्विक हालात (Geopolitical Situation) का असर दिखने लगा है. कंज्यूमर्स अब खर्च करने में सावधानी बरत रहे हैं, और गैर-जरूरी चीजों (Discretionary Spending) पर कम खर्च कर रहे हैं. Trent के मुताबिक इसकी वजह महंगाई बढ़ने ( Rise In Inflation) की आशंका और आर्थिक अनिश्चितता है.

वैश्विक तनाव से मांग पर पड़ेगा असर

Trent ने निवेशकों को बताया कि, लंबे अवधि में बाजार में मांग और मौके मजबूत रहेंगे. लेकिन मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव, सप्लाई चेन पर असर, कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और महंगाई का असर आने वाले समय में मांग पर पड़ सकता है. कंपनी के मुताबिक, कुछ कच्चे माल की लागत बढ़ने लगी है. साथ ही, कुछ जगहों पर सप्लायर्स को मजदूरों की कमी का सामना करना पड़ रहा है. Trent के मुताबिक, कंपनी की कोशिश है कि ग्राहकों को मिलने वाली वैल्यू (कीमत और उपलब्धता) स्थिर बनी रहे.

मिडिल ईस्ट में तनाव ने बदली आर्थिक स्थिति

केवल Trent ही मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव से परेशान नहीं है. बल्कि देश की सबसे बड़ी निजी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भी 24 अप्रैल को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने तिमाही नतीजे जारी किए और इसकी के साथ कंपनी ने इंवेस्टर्स प्रेजेंटेशन भी जारी किया. अपने प्रेजेंटेशन में रिलायंस ने बताया मार्च 2026 से मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने पूरी आर्थिक स्थिति बदलकर रख दी है. कच्चे तेल (Oil) और एलएनजी (LNG) की कीमतें 60–70% तक बढ़ गई हैं. इससे एनर्जी कॉस्ट में इजाफा हुआ है जिसका असर उद्योगों और लोगों के भरोसे (कंज्यूमर कॉन्फिडेंस) पर पड़ रहा है.

महंगाई और ब्याज दर बढ़ने का डर

रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में रुपया करीब 11% कमजोर हुआ है, जो पिछले एक दशक की सबसे बड़ी गिरावट है. आगे भी महंगे कच्चे तेल और बढ़ते करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) की वजह से रुपये पर दबाव बना रह सकता है. कंपनी ने अपने निवेशकों को बताया कि महंगे ईंधन और कमजोर रुपये के कारण महंगाई (Inflation) और ब्याज दरों (Interest Rates) बढ़ने का खतरा है.

भारत के लिए ईंधन की सप्लाई हुई प्रभावित

रिलायंस ने कहा, अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव के चलते Strait of Hormuz जैसे अहम समुद्री रास्ते पर असर पड़ा है, जिससे तेल, एलएनजी और एलपीजी की सप्लाई प्रभावित हुई है. भारत के लिए यह स्थिति ज्यादा गंभीर है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है. करीब 50% गैस खपत एलएनजी आयात से पूरी होती है और इसका बड़ा हिस्सा इसी रूट से आता है. सप्लाई बाधित होने से कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है और आने वाले समय में भी महंगाई का दबाव बना रह सकता है.

वैश्विक हालात पर निर्भर करेगी भारत की अर्थव्यवस्था

कंपनी ने कहा, मिडिल ईस्ट में लंबे समय तक तनाव रहने से सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है, जिससे कई सेक्टर पर दबाव बढ़ रहा है. रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुताबिक, अगर मिडिल ईस्ट का संकट लंबा चलता है, तो इसका असर केमिकल, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य उद्योगों पर और बढ़ सकता है. कंपनी का कहना है कि बाजार को सामान्य करने के लिए जरूरी है कि वैश्विक तनाव कम हो और सप्लाई चेन दोबारा सुचारु रूप से चालू हो. रिलायंस के मुताबिक फिलहाल भारत की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत है, लेकिन वैश्विक हालात पर काफी हद तक निर्भर भी है.

तनाव से कॉरपोरेट जगत परेशान

जाहिर है मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने भारत के कॉरपोरेट जगत को भी परेशान कर दिया है. कंपनियों को डर है कि इस तनाव के लंबे समय तक चलते रहने से महंगाई बढ़ेगी जिससे उपभोक्ताओं के खर्च करने की क्षमता पर असर पड़ेगा. उपभोक्ता अगर कम खर्च करेंगे तो इसका असर कॉरपोरेट जगत पर पड़ेगा. और कॉरपोरेट जगत पर असर हुआ तो इन कंपनियों में रोजगार में लगे लोगों पर भी असर देखने को मिल सकता है.

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