
जंग लंबी खिंची तो बढ़ेगा वैश्विक तेल झटका, LPG-LNG को लेकर भारत अलर्ट
Donald Trump के जंग लंबी चलने के संकेत और होर्मुज पर ईरान की चेतावनी से तेल कीमतें बढ़ीं। भारत में सप्लाई, एलपीजी स्टॉक और महंगाई को लेकर चिंता गहरी हुई।
ईरान के साथ जंग के बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि चार से पांच हफ्तों में इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचा देंगे। इन सबके बीच ईरान का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होरमुज के जरिए ऑयल ट्रांसपोर्ट से जुड़ी जहाजों को निशाना बनाएंगे।इसका अर्थ यह हुआ कि आने वाले समय में क्रूड ऑयल की कीमतों में इजाफा होगा और वैश्विक स्तर पर महंगाई में भी इजाफा होगा। भारत के सामने किस तरह की मुश्किल है, इसे भी समझना जरूरी है।
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। पश्चिम एशिया में लंबा संघर्ष होने पर तेल और गैस की सप्लाई बाधित हो सकती है।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने संकेत दिया है कि युद्ध कम से कम चार हफ्ते तक चल सकता है। यदि ऐसा हुआ तो होर्मुज की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित रह सकती है।
भारत के पास मौजूदा स्टॉक की स्थिति
इंडस्ट्री के अनुसार कच्चा तेल (Crude), 17–18 दिन का भंडार, पेट्रोल-डीजल (Refined products), 20–21 दिन का स्टॉक, एलएनजी (LNG) 10–12 दिन का स्टॉक है। भारत अपनी लगभग 90% एलएनजी खाड़ी देशों से आयात करता है, जिससे उसकी निर्भरता काफी अधिक है।
सरकार की आपात योजना
भारत सरकार ने संभावित संकट से निपटने के लिए कई कदमों पर काम शुरू कर दिया है। पेट्रोल और डीजल का निर्यात कम या बंद करना,रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाना, एलपीजी की राशनिंग लागू करना है। भारत अपने कुल उत्पादन का लगभग एक-तिहाई पेट्रोलएक-चौथाई डीजल और करीब आधा एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) निर्यात करता है जरूरत पड़ने पर इनका निर्यात रोककर घरेलू उपलब्धता बढ़ाई जा सकती है।
कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उछाल
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 10 फीसद बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। यूरोपियन गैस की कीमतों में 40 फीसद से अधिक उछाल आया। सऊदी अरब की रास तानुरा रिफाइनरी और कतर के एक LNG प्लांट पर हमलों के बाद उत्पादन प्रभावित हुआ।होर्मुज की खाड़ी में टैंकरों की आवाजाही भी सीमित रही, जिससे सप्लाई टाइट होने की आशंका बढ़ी।
एलपीजी सबसे बड़ी चिंता
भारत अपनी जरूरत का 85–90 फीसद एलपीजी खाड़ी देशों से आयात करता है। एलपीजी का स्टॉक दो हफ्ते से भी कम बताया जा रहा है।ऑनशोर स्टोरेज और वे कार्गो जो होर्मुज पार कर चुके हैं, वही वर्तमान इनवेंट्री का हिस्सा हैं। इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल जैसी कंपनियां चुनिंदा रिफाइनरियों में एलपीजी उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।
रूस से सप्लाई पर जोर
रूस से आने वाला काफी तेल समुद्र में है, जिसे भारत की ओर मोड़ा जा रहा है। यदि वैश्विक सप्लाई और टाइट होती है, तो अमेरिका का रुख नरम पड़ सकता है। इससे भारतीय रिफाइनिंग कंपनियां रूस से अधिक तेल खरीद सकती हैं। हालांकि हाल के महीनों में भारत ने रूस से खरीद कुछ कम की है, फिर भी रूस अभी भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव भारत के लिए खासकर एलपीजी और एलएनजी के मामले में ऊर्जा संकट का कारण बन सकता है। हालांकि सरकार आपात योजनाओं पर काम कर रही है। लेकिन यदि होर्मुज की खाड़ी में बाधा लंबे समय तक बनी रहती है तो भारत को आपूर्ति, कीमत और महंगाई तीनों मोर्चों पर चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

