डोनाल्ड ट्रम्प ने दिया बड़ा झटका: भारत समेत 60 देशों पर नया टैरिफ लगाने की तैयारी
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डोनाल्ड ट्रम्प ने दिया बड़ा झटका: भारत समेत 60 देशों पर नया टैरिफ लगाने की तैयारी

अमेरिका का मानना है कि जिन देशों में बंधुआ मजदूरी या सस्ते श्रम का शोषण करके सामान बनाया जाता है, वे देश बहुत कम कीमत पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना माल बेच देते हैं।


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सत्ता में आते ही वैश्विक व्यापार में एक बार फिर पाबंदियों और टैक्स (टैरिफ) का दौर लौट आया है। ट्रम्प प्रशासन ने एक बेहद चौंकाने वाले और बड़े फैसले के तहत भारत समेत दुनिया के 60 देशों पर नए और कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव दिया है। अमेरिका का आरोप है कि ये देश अपने बाजारों में 'बंधुआ मजदूरी' (Forced Labour) के जरिए बनाए गए सामानों के आयात को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं। यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) द्वारा जारी किया गया यह फैसला वैश्विक स्तर पर एक नए व्यापार युद्ध (Trade War) को भड़का सकता है।

'सेक्शन 301' के तहत भारत समेत 60 देश दोषी करार

यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने मंगलवार को एक कड़ा आधिकारिक बयान जारी किया। अमेरिकी एजेंसी ने अपनी विस्तृत जांच के बाद निष्कर्ष निकाला है कि अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 के 'सेक्शन 301' के तहत ये 60 देश ऐसी नीतियां और तौर-तरीके अपना रहे हैं जो पूरी तरह से "अनुचित हैं और अमेरिकी वाणिज्य (US Commerce) पर एक बड़ा बोझ या प्रतिबंध" पैदा करते हैं।

इस पूरी जांच के दौरान अमेरिकी एजेंसी ने 60 देशों की अर्थव्यवस्थाओं को दो अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है:

पहली श्रेणी (54 देश): इस लिस्ट में भारत को रखा गया है। भारत समेत दुनिया के 54 देशों के बारे में कहा गया है कि इनके पास बंधुआ मजदूरी से बने सामान के आयात को प्रतिबंधित करने के लिए कोई प्रभावी कानून या उपाय मौजूद ही नहीं हैं। इस सूची में भारत के अलावा अमेरिका के कई बड़े व्यापारिक साझेदार जैसे ऑस्ट्रेलिया, जापान, चीन, बांग्लादेश, ब्रिटेन, सऊदी अरब, सिंगापुर, बहरीन, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी शामिल हैं।

दूसरी श्रेणी (6 देश): इस सूची में कनाडा, यूरोपीय संघ (EU), इक्वाडोर, इंडोनेशिया, मेक्सिको और पाकिस्तान शामिल हैं। USTR के मुताबिक, इन 6 देशों ने कानून तो बनाए हैं, लेकिन वे उन्हें जमीन पर ठीक से लागू करने में नाकाम रहे हैं।

'अमेरिकी कामगारों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं'

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) एम्बेसेडर जेमिसन ग्रीट ने इस फैसले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा— "हमारे सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों द्वारा बंधुआ मजदूरी से बने सामानों के आयात पर रोक न लगाना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। इससे एक ऐसी स्थिति पैदा होती है जहां अमेरिकी कामगारों को वैश्विक स्तर पर एक असमान और अनुचित माहौल में प्रतिस्पर्धा करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।" सरल शब्दों में कहें तो, अमेरिका का मानना है कि जिन देशों में बंधुआ मजदूरी या सस्ते श्रम का शोषण करके सामान बनाया जाता है, वे देश बहुत कम कीमत पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना माल बेच देते हैं। इससे अमेरिकी कंपनियों और वहां के मजदूरों को भारी नुकसान होता है, क्योंकि अमेरिका में श्रम कानून बेहद कड़े और महंगे हैं।

किस देश पर कितना लगेगा अतिरिक्त टैक्स?

जांच के निष्कर्षों के आधार पर USTR ने एक नया टैरिफ ढांचा (Tariff Framework) तैयार किया है, जिसके तहत आयात होने वाले सामानों पर अतिरिक्त कस्टम ड्यूटी लगाई जाएगी:

10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ: यह टैक्स उन देशों पर लगेगा जिन्होंने बंधुआ मजदूरी के आयात पर प्रतिबंध लगाने का वादा किया है या आंशिक कदम उठाए हैं (जैसे कनाडा या मेक्सिको)।

12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ: भारत और चीन जैसे देश जिन्होंने इस संबंध में कोई सख्त कानून लागू नहीं किया है, उन्हें इस भारी टैक्स का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, कपड़ा (Textile) और रेडीमेड कपड़ों (Apparel) के आयात के लिए एक अलग और अधिक कड़ा नियामक तंत्र बनाने का भी प्रस्ताव है।

यह पूरी जांच इसी साल 12 मार्च को शुरू की गई थी, जिसमें करीब 500 से अधिक कंपनियों और संगठनों के ज्ञापनों की समीक्षा की गई और लगभग 60 गवाहों के बयानों के बाद यह अंतिम फैसला लिया गया है।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर पड़ेगा क्या असर?

डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन का यह कड़ा फैसला एक ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच एक बड़े द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) को लेकर अंतिम दौर की बातचीत चल रही है। दोनों देशों के शीर्ष अधिकारी पिछले कई महीनों से कृषि, डिजिटल व्यापार, मार्केट एक्सेस और टैक्स जैसे मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों का मानना है कि अमेरिकी प्रशासन का यह नया पैंतरा भारत पर व्यापार वार्ता के दौरान दबाव बनाने की एक रणनीति भी हो सकता है। USTR ने इस नए टैरिफ प्रस्ताव पर अंतिम फैसला लेने से पहले जनता और व्यापारिक घरानों से 6 जुलाई तक लिखित आपत्तियां मांगी हैं, और 7 जुलाई को इस पर एक पब्लिक हियरिंग (जनसुनवाई) की जाएगी।

हालांकि, 'सेक्शन 301' के तहत जांच पूरी होने का मतलब यह नहीं है कि भारत पर कल से ही टैक्स लग जाएगा। इसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति के अंतिम दस्तखत और प्रशासन की अंतिम मंजूरी होना बाकी है। लेकिन इस कदम ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में कड़वाहट और अनिश्चितता जरूर बढ़ा दी है।

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