क्या गोल्ड ड्यूटी बढ़ाकर सरकार घरों का सोना बाहर लाना चाहती है?
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क्या गोल्ड ड्यूटी बढ़ाकर सरकार घरों का सोना बाहर लाना चाहती है?

सरकार द्वारा सोने-चांदी पर आयात शुल्क 15% करने के बाद कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे शादी और निवेश के लिए खरीदारी महंगी हो गई है।


भारत में शादी-ब्याह के लिए सोना खरीदने की सोच रहे लोगों को फिलहाल शायद रुकना पड़े। या फिर घर में रखा पुराना पारिवारिक सोना ही दोबारा इस्तेमाल करना पड़े। वजह है वित्त मंत्रालय का सोने और चांदी पर प्रभावी आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करना। इस फैसले ने सिर्फ बाजार में हलचल नहीं मचाई, बल्कि आम भारतीय परिवारों की जेब पर भी सीधा असर डाला है।

सोने की कीमतें पहले ही तेजी से बढ़ चुकी हैं। 13 मई 2026 तक 24 कैरेट सोना करीब 1,67,890 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। यानी सिर्फ दो दिनों में कीमतों में लगभग 13,910 रुपये प्रति 10 ग्राम की भारी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में आज ज्वेलरी शोरूम में जाने वाला ग्राहक 48 घंटे पहले की तुलना में काफी ज्यादा कीमत चुकाएगा।

आखिर सरकार ने आयात शुल्क क्यों बढ़ाया?

यह फैसला भारत की विदेशी सोने पर बढ़ती निर्भरता को भी दिखाता है। 2025-26 वित्त वर्ष में भारत का सोना आयात 24 प्रतिशत बढ़ गया और यह रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया। देश के कुल आयात बिल का लगभग दसवां हिस्सा सिर्फ सोने का रहा।

भारत दुनिया में चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है। हर साल करीब 700 से 800 टन सोना आयात किया जाता है। भारत में सोने की मांग शादी-ब्याह, त्योहारों, आभूषणों और निवेश के कारण बनी रहती है।

लेकिन भारी मात्रा में सोना आयात होने से विदेशी मुद्रा का बड़ा हिस्सा बाहर चला जाता है, खासकर तब जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें ऊंची हों।

सरकार का मानना है कि जब तेल आयात बिल पहले से दबाव में है, तब गैर-जरूरी आयात को कम करना जरूरी है।

आम खरीदारों पर क्या असर पड़ेगा?

विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले के बाद कुछ समय के लिए सोने की मांग धीमी पड़ सकती है। लोग खरीदारी टाल सकते हैं और शादी या त्योहारों में हल्के वजन के गहनों की तरफ रुख कर सकते हैं।

13 मई की सुबह मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना 1,63,000 रुपये और चांदी 2,96,600 रुपये पर कारोबार कर रहे थे। दोनों में 6 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखी गई।

24 कैरेट सोने की कीमत भारत में 15,475 रुपये प्रति ग्राम तक पहुंच गई।

ज्वेलरी महंगी होगी

आयात शुल्क बढ़ने का सबसे सीधा असर ज्वेलरी की कीमतों पर पड़ेगा। क्योंकि आयात लागत स्थानीय कीमत का बड़ा हिस्सा होती है। इसका बोझ आखिरकार ग्राहकों पर ही डाला जाएगा।इससे गहनों की कीमत, मेकिंग चार्ज और प्रीमियम सब बढ़ जाएंगे।

सोने की खपत घट सकती है

जब कीमतें पहले से रिकॉर्ड स्तर पर हों, तब इतनी बड़ी बढ़ोतरी लोगों को खरीदारी से रोक सकती है। कई लोग नई ज्वेलरी खरीदने की बजाय पुराने गहनों का एक्सचेंज करना पसंद करेंगे।ज्वेलरी कंपनियों का भी मानना है कि ग्राहक अब पुराने सोने को बदलकर नया गहना बनवाने की तरफ ज्यादा जाएंगे।

गोल्ड ETF और डिजिटल गोल्ड की तरफ बढ़ सकता है रुझान

हाल के महीनों में निवेशकों का रुझान गोल्ड ETF की ओर तेजी से बढ़ा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक मार्च तिमाही में भारत के गोल्ड ETF में निवेश 186 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 20 मीट्रिक टन तक पहुंच गया।

शेयर बाजार से कमजोर रिटर्न और सोने की बढ़ती कीमतों के कारण निवेशक पहले ही सोने की तरफ लौट रहे थे। अब आयात शुल्क बढ़ने के बाद डिजिटल गोल्ड और ETF में निवेश और बढ़ सकता है।

गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम पर फिर जोर

भारत के घरों में अनुमानित 25,000 से 35,000 टन सोना लॉकरों और तिजोरियों में पड़ा है। सरकार अब इस “मृत पूंजी” को अर्थव्यवस्था में लाने पर जोर दे रही है।

गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम को सफल बनाने के लिए उद्योग जगत ने कुछ सुझाव दिए हैं:

न्यूनतम जमा सीमा कम की जाए ताकि छोटे निवेशक भी जुड़ सकें

ई-केवाईसी और रिडेम्प्शन प्रक्रिया आसान बनाई जाए

संगठित ज्वेलर्स को संग्रह और शुद्धता जांच केंद्र के रूप में जोड़ा जाए

सरकार और उद्योग का मानना है कि अगर देश में मौजूद निजी सोने का बेहतर इस्तेमाल हो जाए तो आयात पर निर्भरता काफी कम हो सकती है।

आगे क्या हो सकता है?

अब बहुत कुछ पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगा।

जानकारों का मानना है कि अगर बाहरी आर्थिक दबाव और बढ़े तो सरकार आयात कम करने और विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए आगे और सख्त कदम उठा सकती है।

फिलहाल सरकार का संदेश साफ है — विदेशी मुद्रा बचाना और आर्थिक स्थिरता बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है, भले ही इससे कुछ समय के लिए सोने की मांग और बाजार प्रभावित हों।

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