
खाड़ी युद्ध में भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ओमान? जानिए पूरा गणित
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच भारत-ओमान CEPA लागू हो गया है। यह समझौता भारत की ऊर्जा सुरक्षा, तेल आपूर्ति और व्यापारिक हितों को मजबूत करेगा।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और जवाबी हमलों के बीच एक महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। वैश्विक व्यापार एवं आर्थिक मामलों पर शोध करने वाली संस्था ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, भारत और ओमान के बीच हुआ व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA), जो 1 जून से लागू हो गया है, भारत के लिए केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं बल्कि दीर्घकालिक ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण साधन है।
ओमान क्यों है भारत के लिए खास?
GTRI का कहना है कि ओमान की आबादी लगभग 55 लाख और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) लगभग 110 अरब डॉलर है। इसलिए व्यापारिक लाभ सीमित हो सकते हैं, लेकिन इस समझौते की असली ताकत ओमान की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति में छिपी हुई है।
अधिकांश खाड़ी देशों का समुद्री व्यापार होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर निर्भर करता है। लेकिन ओमान की लंबी तटरेखा का बड़ा हिस्सा इस जलडमरूमध्य के बाहर अरब सागर और ओमान की खाड़ी से जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि सलालाह और दुक्म जैसे प्रमुख बंदरगाह, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में किसी भी व्यवधान के बावजूद संचालन जारी रख सकते हैं।
GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, "खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष या अस्थिरता के दौरान भी ओमान भारत के लिए एक विश्वसनीय व्यापार और ऊर्जा गलियारा बना रह सकता है।"
अमेरिका-ईरान युद्ध ने बढ़ाई चिंता
इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष और गहरा गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के रडार और ड्रोन नियंत्रण केंद्रों पर हमले किए हैं। इसके जवाब में ईरान ने भी कार्रवाई की है। कुवैत ने दावा किया कि उसने कई मिसाइलों और ड्रोन हमलों को रोका।दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष ने पहले से लागू युद्धविराम की नाजुक स्थिति को उजागर कर दिया है। साथ ही ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत कर रखी है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
यह जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत दैनिक तेल उपभोग और 25 प्रतिशत समुद्री तेल व्यापार को संभालता है। इसलिए इसे दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग माना जाता है।
भारत के लिए बढ़ती चुनौतियां
युद्ध के कारण सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात से भारत को मिलने वाली तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है।अप्रैल 2025 में भारत का खाड़ी देशों से आयात लगभग 15 अरब डॉलर था, जो अप्रैल 2026 में घटकर 9.8 अरब डॉलर रह गया। इसी अवधि में भारत का निर्यात भी 4.4 अरब डॉलर से घटकर 2.7 अरब डॉलर हो गया।हालांकि इस गिरावट के बीच ओमान एक अपवाद बनकर उभरा।
ओमान से आयात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
भारत का ओमान से आयात 246.4 प्रतिशत बढ़कर 430 मिलियन डॉलर से लगभग 1.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इस वृद्धि का मुख्य कारण कच्चे तेल और यूरिया की बढ़ी हुई खरीद रही।दूसरी ओर भारत का ओमान को निर्यात केवल 10.3 प्रतिशत घटा, जो अन्य खाड़ी देशों की तुलना में काफी कम गिरावट है।
GTRI का मानना है कि यह अनुभव साबित करता है कि जब होर्मुज़ जलडमरूमध्य जोखिमपूर्ण या भीड़भाड़ वाला हो जाता है, तब ओमान भारत के लिए एक भरोसेमंद वैकल्पिक व्यापार और ऊर्जा केंद्र की भूमिका निभा सकता है।
भारत को क्या मिलेगा?
CEPA के तहत ओमान ने अपने लगभग 98 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर भारतीय उत्पादों को तत्काल शून्य शुल्क (Zero Duty) की सुविधा दी है। इससे भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को लाभ मिलेगा।वित्त वर्ष 2026 में भारत ने ओमान को लगभग 4 अरब डॉलर का निर्यात किया। इसमें प्रमुख उत्पाद शामिल हैं:
पेट्रोल – 781 मिलियन डॉलर
नैफ्था – 746 मिलियन डॉलर
कैल्साइंड एल्युमिना – 277 मिलियन डॉलर
लोहा एवं इस्पात उत्पाद – 230 मिलियन डॉलर
मशीनरी – 178 मिलियन डॉलर
चावल – 167 मिलियन डॉलर
अजय श्रीवास्तव के अनुसार, हालांकि अधिकांश भारतीय उत्पाद पहले से ही लगभग 5 प्रतिशत औसत शुल्क पर ओमान पहुंच रहे थे, लेकिन कुछ उत्पादों पर शुल्क 100 प्रतिशत तक था। अब इन शुल्कों के हटने से भारतीय वस्तुएं ओमानी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगी।
ओमान को क्या फायदा होगा?
इस समझौते से ओमान को भी महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा। भारत लगभग 78 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क कम या समाप्त करेगा।वित्त वर्ष 2026 में भारत ने ओमान से 7.2 अरब डॉलर का आयात किया, जिसमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
कच्चा तेल – 1.6 अरब डॉलर
तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) – 1.2 अरब डॉलर
उर्वरक – 843 मिलियन डॉलर
मेथनॉल – 465 मिलियन डॉलर
अमोनिया – 424 मिलियन डॉलर
इस प्रकार यह समझौता केवल व्यापार बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि भारत के लिए ऊर्जा, उर्वरक और औद्योगिक कच्चे माल की विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करने का भी एक महत्वपूर्ण साधन है।
भारत का 15वां मुक्त व्यापार समझौता
18 दिसंबर 2025 को हस्ताक्षरित भारत-ओमान CEPA पिछले पांच वर्षों में लागू होने वाला भारत का पांचवां और कुल मिलाकर 15वां मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement) है।विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक अस्थिरता और ऊर्जा संकट के दौर में यह समझौता भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता और रणनीतिक हितों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

