पोंगल या रमजान? लेंसकार्ट के विज्ञापन की स्टाइलिंग पर छिड़ा सोशल मीडिया युद्ध
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पोंगल या रमजान? लेंसकार्ट के विज्ञापन की स्टाइलिंग पर छिड़ा सोशल मीडिया युद्ध

लेंसकार्ट के पोंगल विज्ञापन में गलत चित्रण पर भड़के लोग। 'बॉयकॉट लेंसकार्ट' ट्रेंड के बीच CEO पीयूष बंसल ने दी सफाई, सांस्कृतिक अपमान का लगा आरोप।


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Lenskart Controversy : आईवियर कंपनी लेंसकार्ट एक बार फिर बड़े विवाद के केंद्र में है। हाल ही में कर्मचारियों के बिंदी और तिलक लगाने पर रोक लगाने वाली कथित 'ग्रूमिंग पॉलिसी' को लेकर मचे बवाल के बाद, अब कंपनी का एक नया विज्ञापन सोशल मीडिया यूजर्स के गुस्से का शिकार हो गया है। इस बार विवाद पोंगल थीम वाले एक विज्ञापन को लेकर है, जिसे लोग तमिल संस्कृति और हिंदू परंपराओं का अपमान बता रहे हैं।



क्या है विज्ञापन विवाद की वजह?
विवाद की शुरुआत चेन्नई की कृतिका शिवस्वामी की एक पोस्ट से हुई, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। उन्होंने विज्ञापन में दिखाई गई कई तकनीकी और सांस्कृतिक गलतियों को उजागर किया:

गलत खान-पान: विज्ञापन में पोंगल के मौके पर 'खजूर' (Dates) खाते हुए दिखाया गया है। यूजर्स का कहना है कि पोंगल गन्ने और चावल के पारंपरिक पकवान का त्योहार है, इसमें खजूर का कोई स्थान नहीं है।

रामजान जैसा लुक
: कई यूजर्स ने आरोप लगाया कि विज्ञापन की स्टाइलिंग और खजूर का इस्तेमाल पोंगल कम और रमजान का कैंपेन ज्यादा लग रहा है।

बिंदी पर बवाल: विज्ञापन में मॉडल्स के माथे पर बिंदी न होने को लेकर भी लोग भड़के हुए हैं। सोशल मीडिया पर 'No Bindi, No Business' का ट्रेंड चल रहा है।

फीका चित्रण: लोगों ने मॉडल्स को 'बेजान' और कपड़ों को त्योहार की जीवंतता के विपरीत बताया।

'ग्रूमिंग पॉलिसी' की आग अभी ठंडी नहीं हुई थी
यह नया विवाद ऐसे समय में आया है जब लेंसकार्ट पहले से ही अपनी आंतरिक ग्रूमिंग पॉलिसी (Grooming Policy) के कारण आलोचना झेल रही थी। उस पॉलिसी में कथित तौर पर कर्मचारियों को तिलक या बिंदी लगाने से मना किया गया था। हालांकि, लेंसकार्ट के CEO पीयूष बंसल ने सफाई देते हुए कहा था कि वह डॉक्यूमेंट पुराना है और कंपनी भारतीय मूल्यों का सम्मान करती है। लेकिन पोंगल विज्ञापन ने लोगों के गुस्से को फिर से हवा दे दी है।

सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया और बॉयकोट की मांग
इंटरनेट यूजर्स ने कंपनी की नीयत पर सवाल उठाते हुए इसे 'हिंदू समाज का अपमान' करार दिया है:

उपयोगकर्ताओं का तर्क: "यह कोई गलती नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया बदलाव है। जब उनकी आंतरिक नीति ही ऐसी है, तो विज्ञापनों से सम्मान की उम्मीद कैसे की जा सकती है?"

बॉयकोट का आह्वान: बड़ी संख्या में लोग #BoycottLenskart के साथ ट्वीट कर रहे हैं और आत्मसम्मान के नाम पर कंपनी के उत्पादों का बहिष्कार करने की अपील कर रहे हैं।

CEO पीयूष बंसल की सफाई
लगातार बढ़ते विरोध के बीच पीयूष बंसल ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनी एक भारतीय ब्रांड है और अपनी जड़ों से कभी समझौता नहीं करेगी। हालांकि, बार-बार हो रही इन 'गलतियों' ने कंपनी की साख को दांव पर लगा दिया है और लोग अब माफी के बजाय ठोस बदलाव की मांग कर रहे हैं।


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