
तीन महीने में दूसरी बार महंगा हुआ LPG सिलेंडर, जानिए वजह
घरेलू LPG सिलेंडर 29 रुपये महंगा हो गया है। सरकार ने बढ़ोतरी के पीछे वैश्विक ऊर्जा संकट, बढ़ती लागत और होर्मुज तनाव को वजह बताया है।
देश में एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। तेल विपणन कंपनियों ने घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें लागू होने के बाद अब दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू गैस सिलेंडर 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये का हो गया है।यह पिछले तीन महीनों में दूसरी बार है जब घरेलू रसोई गैस के दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले 7 मार्च को प्रति सिलेंडर 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी।
तीन महीने में दूसरी बार बढ़े दाम
हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर ईंधन की कीमतों पर देखने को मिला है। मार्च में हुई बढ़ोतरी के पीछे भी पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधा को जिम्मेदार बताया गया था।इस बीच 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अब घरेलू उपभोक्ताओं को भी बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ेगा।
सरकार ने दी सफाई
एलपीजी कीमतों में बढ़ोतरी के बाद सरकार की ओर से बयान जारी कर कहा गया कि भारत में घरेलू गैस की कीमतें दुनिया के कई देशों की तुलना में अभी भी काफी कम हैं।सरकार के अनुसार भारतीय उपभोक्ता पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों के मुकाबले कम कीमत पर एलपीजी खरीद रहे हैं। इतना ही नहीं, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे विकसित देशों की तुलना में भी भारत में रसोई गैस अपेक्षाकृत सस्ती है।
सरकार का कहना है कि पिछले कई वर्षों से भारतीय उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय बाजार की वास्तविक कीमतों से काफी कम दरों पर एलपीजी उपलब्ध कराई जा रही है।
हर सिलेंडर पर 700 रुपये तक का नुकसान
सरकारी आंकड़ों के अनुसार एक घरेलू एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति लागत 1,600 रुपये से अधिक हो चुकी है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को यह 942 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है।इस कारण तेल कंपनियों को प्रत्येक सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये की अंडर-रिकवरी यानी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह राशि सब्सिडी से अलग है और यह अंतरराष्ट्रीय लागत तथा तय खुदरा मूल्य के बीच का अंतर दर्शाती है।
बताया गया कि फरवरी से जून 2026 के बीच एलपीजी के लिए सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (Saudi CP) में लगभग 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति प्रभावित होने और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण एलपीजी की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
60 हजार करोड़ रुपये तक पहुंची अंडर-रिकवरी
सरकार के मुताबिक घरेलू एलपीजी पर अंडर-रिकवरी का बोझ लगातार बढ़ रहा है। पिछले वित्त वर्ष में यह राशि करीब 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जबकि उससे पहले के वर्ष यह 41,338 करोड़ रुपये थी।ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो तेल कंपनियों पर दबाव और बढ़ सकता है।
होर्मुज संकट के बावजूद नहीं हुई आपूर्ति में कमी
सरकार ने यह भी कहा कि अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े संकट के बावजूद भारत ने अपने ऊर्जा आयात को सुचारु बनाए रखा।सरकार के अनुसार देश में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ा और ऊर्जा कार्गो की आवाजाही लगातार जारी रही। यही कारण है कि देश में ईंधन की उपलब्धता को लेकर किसी प्रकार का संकट नहीं आया।
आम उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा बोझ
घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में यह नई बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब आम आदमी पहले से ही बढ़ती महंगाई का सामना कर रहा है। रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतें परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं।अब उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के आधार पर गैस की कीमतों में और बदलाव होता है या नहीं।

