
FCRA नियमों में बड़ा संशोधन: NGO के लिए विदेशी फंड पाना हुआ बेहद कड़ा
गृह मंत्रालय ने FCRA नियमों में संशोधन किया। विदेशी फंड से जबरन धर्मांतरण पर रोक, सोशल मीडिया डिटेल देना अनिवार्य और नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माने का प्रावधान।
New FCRA Rules: केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA), 2010 के नियमों में सोमवार को एक गजट अधिसूचना जारी कर ऐतिहासिक और बेहद कड़े संशोधन किए हैं। नए संशोधनों के तहत भारत में काम कर रहे गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और सामाजिक संस्थाओं के लिए विदेशी फंडिंग प्राप्त करने और उसके इस्तेमाल के नियमों को बेहद सख्त बना दिया गया है। सरकार ने विदेशी फंड के गलत इस्तेमाल पर भारी आर्थिक जुर्माना तय किया है। इसके साथ ही, विदेशी नागरिकों को संस्थाओं के मुख्य पदों पर रखने पर रोक लगा दी गई है और कई धार्मिक श्रेणियों से 'जबरन धर्मांतरण' को स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
'जबरन धर्मांतरण' पर पूर्ण प्रतिबंध: 2026 से पहले के NGO को मिला 1 साल का समय
गृह मंत्रालय द्वारा एफसीआरए नियम, 2011 में किए गए इन बड़े बदलावों का मुख्य उद्देश्य विदेशी धन के जरिए देश में होने वाली अवैध गतिविधियों पर नकेल कसना है:
धर्मांतरण पर सख्त रोक: नए नियमों के तहत सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों के लिए विदेशी फंड लिया जा सकता है, लेकिन तीन मुख्य श्रेणियों धार्मिक शिक्षा, धार्मिक परंपराओं का दस्तावेजीकरण और स्वदेशी/आदिवासी विश्वासों का संरक्षण के तहत मिलने वाले फंड का इस्तेमाल किसी भी सूरत में 'जबरन या प्रलोभन देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण' के लिए नहीं किया जा सकेगा।
सोशल मीडिया और अल्टीमेट डोनर का खुलासा: अब विदेशी फंड चाहने वाले हर NGO को आवेदन करते समय अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स की पूरी जानकारी सरकार को देनी होगी। इसके अलावा, यदि पैसा किसी मध्यस्थ संस्था या 'डोनर एडवाइज्ड फंड' के जरिए आ रहा है, तो NGO को 'अल्टीमेट डोनर' (यानी पैसा असल में किसने भेजा है, उसका मूल स्रोत) का खुलासा करना ही होगा।
पुराने संगठनों के लिए डेडलाइन: साल 2026 से पहले जितने भी संगठन FCRA के तहत रजिस्टर्ड हैं, सरकार ने उन्हें अपने विशिष्ट उद्देश्यों और कार्यक्षेत्र की घोषणा करने के लिए 1 वर्ष का समय दिया है। उन्हें बताना होगा कि वे अपने रजिस्ट्रेशन में क्या रखना चाहते हैं।
विदेशी नागरिकों की एंट्री पर रोक और 'की-फंक्शनरी' का दायरा बढ़ा
प्रशासनिक पारदर्शिता लाने के लिए सरकार ने संस्थाओं के शीर्ष पदों पर बैठे लोगों के लिए नियमों को बदल दिया है:
विदेशी नागरिक मुख्य पदों से बाहर: अब किसी भी ऐसी एसोसिएशन या संस्था को विदेशी फंड प्राप्त करने के लिए पंजीकरण (Registration) या पूर्व अनुमति (Prior Permission) नहीं दी जाएगी, जिसके मुख्य पदों (Key Functionaries) पर कोई विदेशी नागरिक बैठा हो (भारतीय मूल के नागरिकों को छोड़कर)। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में सरकार आदेश जारी कर इसकी छूट दे सकती है।
'की-फंक्शनरी' की नई परिभाषा: इस पद के दायरे को काफी बड़ा कर दिया गया है। अब इसमें सिर्फ ट्रस्टी या अध्यक्ष ही नहीं, बल्कि कंपनियों के डायरेक्टर्स, फर्मों के पार्टनर्स, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के 'कर्ता' और संस्था के प्रबंधन पर नियंत्रण रखने वाले किसी भी व्यक्ति को शामिल माना जाएगा।
उल्लंघनों पर भारी जुर्माना: एडमिनिस्ट्रेटिव खर्च से लेकर सट्टा लगाने तक पेनल्टी तय
गृह मंत्रालय ने अधिनियम की धारा 41(1) के तहत नियमों के उल्लंघन पर लगने वाली पेनल्टी में भारी बढ़ोतरी की है:
प्रशासनिक खर्च की सीमा तोड़ना: नियम के मुताबिक विदेशी फंड का अधिकतम 20% ही प्रशासनिक कार्यों पर खर्च हो सकता है। इसे तोड़ने पर 1 लाख रुपये या सीमा से अधिक खर्च की गई राशि का 5%, जो भी अधिक हो, जुर्माना लगेगा।
सट्टा या जोखिम भरे कार्यों में निवेश: विदेशी फंड को सट्टा (Speculative Activities) या जोखिम भरे निवेश में लगाने पर 1 लाख रुपये या निवेश की गई राशि का 30%, जो भी अधिक हो, पेनल्टी लगेगी। इसके साथ ही निवेश से कमाए गए मुनाफे की 100% रिकवरी की जाएगी।
उद्देश्य या कार्यक्षेत्र से अलग इस्तेमाल: जिस काम या राज्य/UT के लिए फंड मिला है, उसके इतर खर्च करने पर उपयोग की गई राशि का 30% या 1 लाख रुपये, जो भी अधिक हो, जुर्माना देना होगा। यही नियम बिना रजिस्ट्रेशन वाले राज्य में फंड इस्तेमाल करने पर भी लागू होगा।
निष्क्रिय संस्थाओं पर लगाम: ₹10 लाख का खर्च अनिवार्य, न्यूज़ ब्रॉडकास्ट पर बैन
सरकार ने उन कागजी या निष्क्रिय NGO के लाइसेंस रद्द करने का भी पूरा इंतजाम कर दिया है जो केवल खाता खोलकर बैठे रहते थे:
₹10 लाख का खर्च जरूरी: किसी भी NGO को अपना FCRA लाइसेंस रिन्यू (नवीनीकरण) कराने या कैंसिलेशन से बचने के लिए पिछले दो वित्तीय वर्षों में अपने चुने हुए कामों पर कम से कम 10 लाख रुपये का विदेशी फंड खर्च करना अनिवार्य होगा।
75% यूटिलाइजेशन और फील्ड इंक्वायरी: 'प्रायर परमिशन' के तहत फंड पाने वाले संगठनों को दूसरी या उसके बाद की किस्त तभी जारी होगी, जब वे पिछली किस्त का कम से कम 75 फीसदी हिस्सा इस्तेमाल कर चुके होंगे। इसकी पुष्टि के लिए सरकार फील्ड इंक्वायरी (ग्राउंड वेरिफिकेशन) भी करेगी।
करंट अफेयर्स और न्यूज़ पर रोक: विदेशी फंड पाने वाले संगठनों या उनके पदाधिकारियों द्वारा किसी भी प्रकार की किताब या लेख के प्रकाशन पर कड़ी नजर रहेगी, क्योंकि एफसीआरए के तहत पंजीकृत संस्थाओं को 'समाचार या समसामयिक मामलों' (News and Current Affairs) के निर्माण, प्रकाशन या प्रसारण की सख्त मनाही है।
नया शुल्क ढांचा: आवेदन में प्रत्येक अतिरिक्त राज्य या नए उद्देश्य को जोड़ने के लिए 300 रुपये का अतिरिक्त शुल्क देय होगा।
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