
‘घबराने की नहीं भरोसा रखने की जरूरत’, अर्थव्यवस्था पर वित्त मंत्री का संदेश
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है। जीएसटी कलेक्शन, बिक्री और निवेश में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था सकारात्मक और मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह का निराशावादी माहौल केवल डर फैलाने का काम करता है, जिसे भारत जैसे देश वहन नहीं कर सकते। नई दिल्ली में भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) के 37वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार अपने शब्दों और नीतिगत फैसलों के जरिए लोगों में भरोसा पैदा करने का काम कर रही है।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि जीएसटी संग्रह लगातार मजबूत बना हुआ है, जो आर्थिक गतिविधियों के बेहतर स्तर को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि सितंबर 2025 में दरों के युक्तिकरण (रेट रेशनलाइजेशन) के बाद वित्त वर्ष 2025-26 में सकल जीएसटी संग्रह 22 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.3 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में यह वृद्धि छोटी उपलब्धि नहीं है।
वित्त मंत्री ने कहा कि हाई-फ्रीक्वेंसी आर्थिक संकेतक भी घरेलू मांग में व्यापक मजबूती का संकेत दे रहे हैं। अप्रैल 2026 के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि घरेलू थोक ट्रैक्टर बिक्री में 26 प्रतिशत, यात्री वाहनों की बिक्री में 25 प्रतिशत, तीन-पहिया वाहनों की बिक्री में 32 प्रतिशत और दो-पहिया वाहनों की बिक्री में 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
निजी क्षेत्र के पूंजीगत निवेश (कैपेक्स) को लेकर उन्होंने कहा कि भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के आंकड़ों के अनुसार सितंबर 2025 में निजी निवेश सालाना आधार पर 67 प्रतिशत बढ़ा। उन्होंने कहा कि यह इस बात का संकेत है कि निजी क्षेत्र निवेश के लिए आगे आ रहा है।
जीएसटी कलेक्शन में इजाफा
सीतारमण ने कहा कि जीएसटी संग्रह बढ़ रहा है, अर्थव्यवस्था का औपचारिकरण गहरा हो रहा है और देशभर में इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियां स्थिर बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतिगत प्रतिक्रिया बेहद संतुलित रही है, जिसका उद्देश्य उन क्षेत्रों को राहत देना है जहां नागरिकों और कारोबारों पर दबाव है। सरकार विशेष रूप से एमएसएमई और निर्यातकों को समर्थन दे रही है, जहां कार्यशील पूंजी पर दबाव देखा जा रहा है।
उत्पाद शुल्क में कटौती से नुकसान
वित्त मंत्री ने पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती का जिक्र करते हुए कहा कि इससे वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार को एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का बोझ आम लोगों के कंधों से हटाने के लिए सरकार ने यह फैसला लिया।ईंधन उत्पादों के निर्यात पर शुल्क लगाने के फैसले को लेकर उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा करना था। उन्होंने कहा कि यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि घरेलू उपभोक्ताओं, परिवहन क्षेत्र, एयरलाइंस और उद्योगों को ईंधन की स्थिर आपूर्ति मिल सके और मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन प्रभावित न हो।
निर्यातकों के लिए सरकार गंभीर
निर्यातकों को राहत देने के लिए सरकार ने क्रेडिट गारंटी योजना के तहत सहायता उपलब्ध कराई है। इसके साथ ही एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के तहत बिना पर्याप्त गिरवी (कोलेटरल) वाले छोटे निर्यातकों को औपचारिक ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। वित्त मंत्री ने कहा कि इससे निर्यात ऑर्डर, रोजगार और विदेशी मुद्रा आय को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
सीतारमण ने सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को आसान बनाने के सरकार के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया के समुद्री मार्गों में व्यवधान के कारण भारतीय निर्यात प्रभावित हुआ था, जिसके बाद कस्टम प्रक्रियाओं को बेहद सरल बना दिया गया। उन्होंने बताया कि निर्यातकों को माल वापस लाने, दूसरे मार्गों से भेजने या भंडारण करने की अनुमति आसान प्रक्रियाओं के जरिए दी गई।
उन्होंने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में निर्यात दस्तावेजों में संशोधन या रद्द करने की प्रक्रिया काफी जटिल होती है, लेकिन इस बार सरकार ने सभी औपचारिकताओं को न्यूनतम स्तर पर ला दिया। साथ ही फोर्स मेजर परिस्थितियों में निर्यात दस्तावेजों में संशोधन या रद्द करने से जुड़ी फीस भी माफ कर दी गई, ताकि उन व्यवधानों के लिए निर्यातकों को दंडित न किया जाए जो उनके नियंत्रण से बाहर थे।

