135 NBFCs का रजिस्ट्रेशन रद्द; RBI ने लिया देश का सबसे बड़ा एक्शन
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135 NBFCs का रजिस्ट्रेशन रद्द; RBI ने लिया देश का सबसे बड़ा एक्शन

नियमों की धज्जियां उड़ाने वाली नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों पर रिजर्व बैंक का हंटर. जानिए आपके लोन, जमा पैसों और आरबीआई अप्रूव्ड लिस्ट चेक करने का पूरा तरीका.


RBI on NBFCs: देश के वित्तीय बाजार को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय बैंक ने नियमों की अनदेखी, वित्तीय अनियमितताओं और गाइडलाइंस का पालन न करने के गंभीर आरोपों में 135 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (CoR) को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है. आरबीआई द्वारा जारी की गई इस ब्लैकलिस्ट में पश्चिम बंगाल, दिल्ली, चेन्नई और मुंबई समेत देश के कई बड़े राज्यों की फाइनेंस कंपनियां शामिल हैं. इस सामूहिक और बड़े एक्शन के बाद पूरे वित्तीय क्षेत्र में हड़कंप मच गया है. रिजर्व बैंक के इस फैसले के बाद आम नागरिकों और निवेशकों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इन कंपनियों में फंसे उनके पैसों और चल रहे लोन्स का अब क्या होगा?


क्या होती हैं NBFC कंपनियां? सामान्य बैंकों से कैसे हैं अलग?
आसान शब्दों में कहें तो नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFC) बैंक की तरह ही आम लोगों और व्यापारियों को लोन देने, निवेश करने, शेयर, स्टॉक या बॉन्ड खरीदने जैसी महत्वपूर्ण फाइनेंशियल सर्विसेज देती हैं. लेकिन, इनके काम करने का तरीका और अधिकार सामान्य कमर्शियल बैंकों से काफी अलग होते हैं:

बैंकिंग लाइसेंस नहीं: इनके पास पूर्ण बैंकिंग लाइसेंस नहीं होता है.

जमा राशि पर पाबंदी: ये कंपनियां आम बैंकों की तरह अपने ग्राहकों से सेविंग या करंट अकाउंट के जरिए 'डिमांड डिपॉजिट' (तुरंत निकाली जाने वाली रकम) स्वीकार नहीं कर सकती हैं.

चेक और पेमेंट सिस्टम: ये कंपनियां अपने नाम से चेक जारी नहीं कर सकती हैं और न ही ये किसी नेशनल पेमेंट सेटलमेंट सिस्टम का हिस्सा होती हैं.

अगर आपने इन बैन कंपनियों से लोन लिया है, तो अब क्या होगा?
रिजर्व बैंक का यह सख्त कदम मुख्य रूप से आम नागरिकों को भविष्य की बड़ी धोखाधड़ी और डिजिटल फ्रॉड से बचाने के लिए है. इस एक्शन को लेकर ग्राहकों के लिए दो सबसे जरूरी बातें साफ की गई हैं:

लोन चुकाना ही होगा: अगर आपने इन 135 प्रतिबंधित कंपनियों में से किसी से भी लोन ले रखा है, तो आपका लोन एग्रीमेंट खत्म नहीं होगा. आपको नियम और किश्तों के अनुसार अपना लोन पूरा चुकाना होगा.

नए लोन पर रोक: रजिस्ट्रेशन रद्द होने के बाद अब ये कंपनियां बाजार में किसी भी नए ग्राहक को लोन या अन्य वित्तीय सेवाएं नहीं दे पाएंगी.

NBFC में पैसा लगाने या FD करने से पहले गांठ बांध लें ये 3 बातें
अगर आप किसी फाइनेंस कंपनी की आकर्षक ब्याज दरों को देखकर फिक्स्ड डिपॉजिट या किसी अन्य स्कीम में पैसा लगाने की सोच रहे हैं, तो इन तीन सुरक्षा मानकों को जरूर परखें:

आरबीआई का वैलिड सर्टिफिकेट: सबसे पहले सुनिश्चित करें कि कंपनी के पास रिजर्व बैंक का वैध और एक्टिव रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट है या नहीं.

क्रेडिट रेटिंग: निवेश करने से पहले क्रिसिल(CRISIL) या इकरा (ICRA) जैसी प्रामाणिक रेटिंग एजेंसियों का स्कोर जरूर देखें. हमेशा AAA या AA जैसी मजबूत रेटिंग वाली कंपनियों पर ही भरोसा करें.

जमा पैसों पर कोई गारंटी नहीं: सामान्य बैंकों में आपका 5 लाख रुपये तक का जमा पैसा DICGC (जमा बीमा और क्रेडिट गारंटी निगम) के नियमों के तहत पूरी तरह सुरक्षित और गारंटीड रहता है. इसके विपरीत, NBFCs में जमा पैसों पर ऐसी कोई सरकारी सुरक्षा या गारंटी नहीं मिलती है.

घर बैठे मिनटों में चेक करें: आपकी फाइनेंस कंपनी RBI अप्रूव्ड है या नहीं?
कोई भी फाइनेंस कंपनी असली है या फर्जी, इसे आप अपने मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए सीधे आरबीआई की वेबसाइट पर इन 5 स्टेप्स में चेक कर सकते हैं:

वेबसाइट खोलें: सबसे पहले रिजर्व बैंक की आधिकारिक वेबसाइट www.rbi.org.in पर जाएं.

साइटमैप: होमपेज के मेन्यू बार में जाकर 'Sitemap' के विकल्प पर क्लिक करें.

फाइनेंशियल सेक्टर: सीधे स्क्रीन पर दिख रहे 'Financial Sector' ऑप्शन को सिलेक्ट करें.

एक्सेल फाइल डाउनलोड करें: साइटमैप के भीतर आपको 'NBFC' का एक एक्टिव लिंक दिखाई देगा. इस पर क्लिक करते ही देश की सभी मान्य कंपनियों की एक अपडेटेड एक्सेल फाइल डाउनलोड हो जाएगी.

नाम सर्च करें: डाउनलोड हुई इस लिस्ट में अपनी फाइनेंस कंपनी का नाम सर्च करें. अगर कंपनी वैध है, तो उसका नाम, रजिस्ट्रेशन नंबर और हेड ऑफिस का पूरा पता वहां दर्ज होगा. यदि नाम नहीं है या वह 'कैंसिल सर्टिफिकेट' वाली दूसरी लिस्ट में है, तो उस कंपनी से तुरंत दूरी बना लें.


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