
RBI ने रेपो रेट रखा स्थिर, EMI और लोन पर नहीं पड़ेगा असर
आरबीआई ने रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखी है। इससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के बाद रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया है। शुक्रवार को आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।यह फैसला गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में लिया गया। रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने का सीधा असर यह होगा कि आम लोगों की ईएमआई, होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में फिलहाल कोई परिवर्तन नहीं होगा।
फरवरी 2025 से अब तक 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती
आरबीआई ने फरवरी 2025 से अब तक कुल 125 बेसिस प्वाइंट (1.25 प्रतिशत) की दर कटौती की है। हालांकि पिछली मौद्रिक नीति समीक्षा की तरह इस बार भी केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को स्थिर रखने का फैसला किया है।विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए आरबीआई ने सतर्क रुख अपनाया है और ब्याज दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया।
महंगाई आरबीआई के लक्ष्य से नीचे
महंगाई के मोर्चे पर भी राहत बनी हुई है। अप्रैल 2026 में भारत की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.48 प्रतिशत दर्ज की गई, लेकिन यह अभी भी आरबीआई के मध्यम अवधि के 4 प्रतिशत लक्ष्य से नीचे है।महंगाई नियंत्रित रहने से केंद्रीय बैंक को ब्याज दरों को स्थिर बनाए रखने में मदद मिली है।
वैश्विक परिस्थितियों पर थी बाजार की नजर
पश्चिम एशिया में जारी तनाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और रुपये में आई कमजोरी के कारण इस बार की एमपीसी बैठक पर निवेशकों और अर्थशास्त्रियों की खास नजर थी।बैठक से पहले अधिकांश अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया था कि आरबीआई ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि कुछ विश्लेषकों ने वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए दरों में बढ़ोतरी की संभावना भी जताई थी।
क्या होती है रेपो रेट?
रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण उपलब्ध कराता है।जब आरबीआई रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंकों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है। इसका असर ग्राहकों पर पड़ता है और बैंक होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन समेत अन्य ऋणों की ब्याज दरें बढ़ा देते हैं।वहीं, रेपो रेट घटने पर बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है, जिससे आमतौर पर लोन की ब्याज दरों में कमी आती है और ईएमआई घट सकती है।
महंगाई नियंत्रण का अहम उपकरण
आरबीआई रेपो रेट का इस्तेमाल महंगाई को नियंत्रित करने के प्रमुख साधन के रूप में करता है। जब बाजार में नकदी (लिक्विडिटी) अधिक होती है और महंगाई बढ़ने लगती है, तब केंद्रीय बैंक रेपो रेट बढ़ाकर कर्ज को महंगा बनाता है, जिससे खर्च और मांग में कमी आती है।फिलहाल महंगाई नियंत्रण में होने और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच आरबीआई ने ब्याज दरों को स्थिर रखते हुए संतुलित रुख अपनाया है।

