
RBI ने नहीं किया रेपो रेट में कोई बदलाव, महंगाई बढ़ने का बना हुआ है जोखिम
पॉलिसी का एलान करते हुए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, लेकिन दुनिया भर में कई तरह की अनिश्चितताएं हैं. ऐसे में अभी ब्याज दरों में बदलाव करना सही नहीं होगा.
भारतीय रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है. तीन दिनों तक चले मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी की बैठक के बाद लिए गए फैसलों का एलान करते हुए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई ने अपने रूख को न्यूट्रल रखते हुए रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखने का फैसला किया है. जाहिर है आरबीआई के इस फैसले के चलते फिलहाल के लिए EMI में कोई बदलाव नहीं देखने को मिलेगा. जबकि जून महीने में खुदरा महंगाई दर आरबीआई के टोलरेंस बैंड 4 फीसदी के ऊपर 4.38 फीसदी पर जा पहुंची है.
पॉलिसी का एलान करते हुए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, लेकिन दुनिया भर में कई तरह की अनिश्चितताएं हैं. ऐसे में अभी ब्याज दरों में बदलाव करना सही नहीं होगा. पिछले कुछ महीनों में दुनिया का माहौल काफी बदला है. पश्चिम एशिया में फिर से तनाव बढ़ गया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है. दूसरी ओर, एल-नीनो की वजह से इस साल मानसून के सामान्य रहने पर संशय है. अगर बारिश कम या असमान होती है, तो खेती पर असर पड़ सकता है और खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं.
हालांकि राहत की बात यह है कि भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत स्थिति में है। लोगों का खर्च बढ़ रहा है, कंपनियां निवेश कर रही हैं, बैंक लगातार लोन दे रहे हैं और सेवा क्षेत्र के साथ-साथ निर्यात में भी अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, लेकिन ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक को लेकर आरबीआई ने कहा, साल 2026 में अब तक वैश्विक अर्थव्यवस्था लगातार उतार-चढ़ाव, महंगाई की चिंता और बदलती मौद्रिक नीतियों से प्रभावित रही है. पश्चिम एशिया में अस्थायी युद्धविराम के बाद जुलाई में संघर्ष फिर शुरू हो गया, जिससे राहत ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी. दुनिया के कई सेंट्रल बैंकों ने लगातार बनी महंगाई के कारण ब्याज दरें बढ़ाई हैं, जबकि कुछ अन्य अभी भी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं.
अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है. इसकी वजह ऊंची बॉन्ड यील्ड, अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त रुख और AI से उत्पादकता बढ़ने के कारण अमेरिकी अर्थव्यवस्था का अपेक्षाकृत मजबूत प्रदर्शन रहा है. आरबीआई के मुताबिक, वैश्विक शेयर बाजारों में भी उतार-चढ़ाव बना हुआ है क्योंकि निवेशकों ने AI से जुड़ी कंपनियों में अपने निवेश का दोबारा आकलन किया है. पश्चिम एशिया का संघर्ष, कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता, महंगाई की बनी हुई चिंता और कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की कमजोर सरकारी वित्तीय स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़े जोखिम हैं.
भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर आरबीआई ने कहा, वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में घरेलू मांग स्थिर बनी रही है. निजी खपत मजबूत रही है. निर्माण गतिविधियों, पूंजीगत वस्तुओं और बैंक लोन से जुड़े संकेतकों के आधार पर निवेश भी मजबूत बना हुआ है. सर्विसेज सेक्टर्स के निर्यात में अच्छी वृद्धि और वस्तुओं के निर्यात में सुधार से विदेशी मांग भी मजबूत बनी हुई है. हालांकि आगे वैश्विक अनिश्चितताओं का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. आरबीआई ने कहा, एनर्जी प्राइसेज और सप्लाई चेन का दबाव अभी भी बना हुआ है. RBI ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक विकास दर यानी GDP ग्रोथ 6.7 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है. RBI का मानना है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा.
आरबीआई ने आने वाले महीनों में महंगाई में बढ़ोतरी का अनुमान जताया है. इसी वजह से पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए औसत महंगाई 5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है. RBI का मानना है कि साल की तीसरी तिमाही में महंगाई अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच सकती है और उसके बाद धीरे-धीरे कम होने लगेगी. जून 2026 में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.4 फीसदी हो गई. इसकी सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी रही है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का असर भारत में भी देखने को मिला. हालांकि खाने-पीने और ईंधन को छोड़ दें तो बाकी सामानों की कीमतों में ज्यादा दबाव नहीं दिख रहा है. यानी महंगाई अभी पूरी तरह बेकाबू नहीं हुई है.
इस बैठक में बैंकिंग सेक्टर के लिए भी कुछ बड़े एलान किए गए हैं. करीब 20 साल बाद RBI ने नए अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों को लाइसेंस देने की प्रक्रिया फिर से शुरू करने का फैसला किया है. इसके अलावा ग्रामीण सहकारी बैंकों के नियमों की समीक्षा की जाएगी ताकि उनका कामकाज और मजबूत हो सके. RBI लोन की ब्याज दर तय करने के नियमों में भी बदलाव की तैयारी कर रहा है. इसका मकसद यह है कि सभी बैंकों में ब्याज तय करने का तरीका ज्यादा पारदर्शी हो, ग्राहकों को सही जानकारी मिले और रेपो रेट में बदलाव का फायदा लोगों तक जल्दी पहुंच सके.

