कागज पर बढ़ा वेतन, नहीं बढ़ी टेक-होम सैलेरी, नए लेबर कोड ने बदला नियम, कर्मचारी निराश
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कागज पर बढ़ा वेतन, नहीं बढ़ी टेक-होम सैलेरी, नए लेबर कोड ने बदला नियम, कर्मचारी निराश

HRA, ट्रैवल, स्पेशल अलाउंस जैसे भत्ते कुल सैलरी का 50 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकते. अगर ज्यादा होंगे, तो अतिरिक्त हिस्सा बेसिक वेतन में जोड़ना होगा.


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गुरूग्राम (Gurugram) में एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाले ऋचा गुप्ता (बदला हुआ नाम) बेहद खुश थीं कि नए वित्त वर्ष में उनकी सैलेरी बढ़ने वाली है और उनका प्रमोशन भी होने जा रहा है. लेकिन ऋचा गुप्ता को जब उनकी कंपनी की ओर से इंक्रीमेंट लेटर (Increment Letter) मिला तो वे बेहद मायूस हो गईं. क्योंकि कंपनी ने उन्हें नए वित्त वर्ष में शानदार इंक्रीमेंट तो दे दिया लेकिन उनकी टेक होम सैलेरी यानी जो वेतन बैंक खाते में कंपनी ट्रांसफर करती है उसमें कोई परिवर्तन नहीं आया है. वेतन बढ़ोतरी होने के बाद भी ऋचा खुश नहीं हैं. महंगाई के बोझ बढ़ने के बावजूद उनकी टेक होम सैलेरी जस की तस बनी हुई है. और इसकी वजह है एक अप्रैल 2026 को लागू हुआ नया श्रम कानून.

नए लेबर कोड के चलते घटी टेक होम सैलेरी

केंद्र की मोदी सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से चार नए लेबर कोड (Labour Code) को लागू कर दिया है. इस नए कोड के चलते अप्रैल महीने से एम्पलॉयज (Employees) को मिलने वाली सैलेरी में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. अब किसी भी कर्मचारी की बेसिक सैलरी उस कर्मचारी को मिलने वाला महंगाई भत्ता (DA) और बाकी दूसरे सभी प्रकार के अलाउंस को मिलाने के बाद उसकी कुल CTC का कम से कम 50 फीसदी होना जरूरी है. अब तक कई कंपनियां सैलरी का बड़ा हिस्सा अलग-अलग अलाउंस में देती थीं, जिससे बेसिक सैलरी बेहद कम रहती थी. लेकिन नए नियम के लागू के बाद ऐसा नहीं हो पाएगा. HRA, ट्रैवल, स्पेशल अलाउंस जैसे भत्ते कुल सैलरी का 50 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकते. अगर ज्यादा होंगे, तो अतिरिक्त हिस्सा बेसिक वेतन में जोड़ना होगा. इस बदलाव का सीधा असर कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी पर पड़ा है. बेसिक सैलरी के बढ़ने से प्रॉविडेंट फंड (Provident Fund) और ग्रेच्युटी (Gratuity) में योगदान बढ़ जाएगा. जिससे हर महीने कर्मचारियों के हाथों में आने वाले पैसे में कमी देखने को मिल रही है.

मिला शानदार इक्रीमेंट पर नहीं बढ़ी टेक होम सैलेरी

ऋचा गुप्ता के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है. पिछले वित्त वर्ष तक उन्हें हर महीने 1,96,000 रुपये वेतन मिला करता था जिसमें 68,700 रुपये बेसिक पे हुआ करता था. इसके अलावा 1,27,300 रुपये हर महीने सभी प्रकार के अलाउंस को मिलाकर मिला करता था. जिसमें एम्पलॉयर और एम्पलॉय के हिस्से का 16,492 रुपये प्रॉविडेंट फंड में जमा हुआ करता था और ग्रेच्युटी के मद में 3,305 रुपये हर महीने कटता था. बेसिक पे का 12 फीसदी एम्पलॉयर और एम्पलॉय को EPF में योगदान करना पड़ता है.

ऋचा जिस कंपनी में कार्यरत हैं उन्हें कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 में 8 फीसदी का इंक्रीमेंट दिया है. जिसके बाद हर महीने उनका वेतन बढ़कर 2,12,000 रुपये हो गई है. लेकिन नए लेबर कोड के तहत CTC के 50 फीसदी के नियम के तहत बेसिक सैलेरी 1,06,000 रुपये हो गई है. बेसिक पे का 12 फीसदी प्रॉविडेंट फंड में योगदान करने के नियम के तहत एम्पलॉयर और एम्पलॉय के कंट्रीब्यूशन को मिलाकर प्रॉविडेंट फंड में हर महीने 25,400 रुपये जमा करना पड़ रहा है तो ग्रेच्युटी के मद में 5100 रुपये कट रहे हैं. टैक्स की कटौती के बाद ऋचा गुप्ता ने पाया कि नए वित्त वर्ष में इंक्रीमेंट के बाद भी उनकी टेक होम सैलेरी में कोई बदलाव नहीं हुआ है. द फेडरल देश से ऋचा गुप्ता ने कहा, इंक्रीमेंट मिलने के बाद भी मैं निराश हूं क्योंकि महंगाई के बोझ के बढ़ने के बाद भी टेक होम सैलेरी नहीं बढ़ी है. उन्होंने बताया कि उन कंपनी में दूसरे कर्मचारी भी इसी परिस्थिति से जुझ रहे हैं. जबकि नए नियम के चलते कुछ लोगों की टेक होम सैलेरी घट गई है.

लेबर यूनियन ने नए लेबर कोड पर उठाए सवाल

लेबर यूनियन इंटक (INTUC) के उपाध्यक्ष अशोक सिंह ने नए श्रम कानून पर सवाल खड़ा करते हुए कहा, कोई भी पॉलिसी ऐसी बननी चाहिए जिससे कर्मचारियों को फायदा हो. लेकिन पिछले 12 सालों से केंद्र की मोदी सरकार ने लेबर क्रॉंफेंस का ऑयोजन नहीं किया जिसमें प्रधानमंत्री से लेकर सभी स्टेकहोल्डर भाग लेते थे.

50 फीसदी बेसिक पे का ये है फायदा

हालांकि नए लेबर कोड के मुताबिक बेसिक सैलेरी कुल CTC का 50 फीसदी करने का एक फायदा भी है. प्रॉविडेंट फंड और ग्रेच्युटी के लिए योगदान बढ़ गया है जिससे कर्मचारी लंबी अवधि में ज्यादा रकम की बचत कर सकेंगे जिससे रिटायरमेंट के समय उन्हें ज्यादा पैसे मिलेंगे. नए लेबर कोड से कर्मचारियों की जेब पर तुरंत थोड़ा असर पड़ेगा, लेकिन भविष्य के लिए उनकी बचत पहले से ज्यादा सुरक्षित और मजबूत हो जाएगी.

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