
क्या करती है राजेश एक्सपोर्ट्स? SEBI किस घोटाले का आरोप लगा रही है?
SEBI ने राजेश एक्सपोर्ट्स में 15.15 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू गैप का आरोप लगाया है; यहाँ वह सब कुछ है जो आपको जानना चाहिए।
Rajesh Exports Scam: भारतीय शेयर बाजार के एक बड़े नाम और दिग्गज गोल्ड ज्वैलरी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके प्रमोटर-चेयरमैन राजेश मेहता के खिलाफ सेबी (SEBI) ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा एक्शन लिया है। सेबी ने बुधवार, 3 जून को एक 109 पन्नों का अंतरिम आदेश जारी करते हुए कंपनी पर पिछले 5 साल (FY21 से FY25) के दौरान 15.15 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का चौंकाने वाला आरोप लगाया है।
सेबी ने इस हेराफेरी को "घोर और अनसुना" बताते हुए राजेश एक्सपोर्ट्स और राजेश मेहता दोनों को सिक्योरिटीज मार्केट से प्रतिबंधित कर दिया है, जिससे उनका कैपिटल मार्केट से संपर्क पूरी तरह कट गया है। इस बड़े खुलासे के बाद आज बाजार में कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई और यह करीब 5% (₹5.46) टूटकर ₹103.92 पर बंद हुआ, जबकि इसका पिछला क्लोज ₹109.38 था।
एक छोटी सी शिकायत और खुल गया 'इंटरनेशनल सिंडिकेट'; फॉरेंसिक ऑडिट में हुआ भंडाफोड़
इतने बड़े घोटाले की शुरुआत मार्च 2024 में एक शेयरधारक की बेहद मामूली सी दिखने वाली शिकायत से हुई थी।
2 साल से बकाये ने खोला राज: शिकायत में यह मुख्य रेड फ्लैग (चेतावनी) उठाया गया था कि कंपनी के बड़े 'ट्रेड रिसीवेबल्स' (उधारी) पिछले दो साल से अधिक समय से बिना भुगतान के पड़े थे, जो कॉर्पोरेट जगत में फर्जी अकाउंटिंग का सबसे बड़ा संकेत माना जाता है।
फॉरेंसिक ऑडिट में मिसमैच: इसके बाद सेबी ने 'BDO इंडिया' से कंपनी का फॉरेंसिक ऑडिट कराया। जांच में पता चला कि कंपनी की कंसोलिडेटेड ग्रुप लेवल पर दिखाई गई कमाई और उसकी विदेशी सहायक कंपनियों के वास्तविक रिकॉर्ड में जमीन-आसमान का अंतर था।
99% फर्जीवाड़े का शक: कंपनी के कुल रेवेन्यू का करीब 99% हिस्सा विदेशी सब्सिडियरीज से आता है, जिसमें स्विट्जरलैंड स्थित इसकी यूनिट Valcambi (दुनिया की सबसे बड़ी कीमती धातु रिफाइनरी) को इसका बैकबोन माना जाता था। लेकिन ऑडिट में 5 साल के भीतर 15.15 लाख करोड़ रुपये का भारी मिसमैच मिला। इसके अलावा, अफ्रीका के गोल्ड माइनिंग एसेट्स में किए गए ₹1,035 करोड़ के निवेश का भी कंपनी कोई दस्तावेजी सबूत या वैल्यूएशन रिपोर्ट पेश नहीं कर पाई।
LIC के 10.8% स्टेक से आम घरों पर आफत; कैनरा बैंक का लोन भी फंसा
इस कथित घोटाले की सबसे बड़ी मार देश के आम निवेशकों और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ने वाली है। सेबी के अनुमान के मुताबिक, इस मामले से जुड़े शेयरधारकों की करीब ₹12,726 करोड़ की संपत्ति स्वाहा हो सकती है।
LIC का बड़ा दांव: देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की राजेश एक्सपोर्ट्स में 10.8% की हिस्सेदारी है। चूंकि LIC का पैसा आम जनता के प्रीमियम से आता है, इसलिए इस घोटाले का सीधा असर उन घरेलू परिवारों पर पड़ेगा जिन्होंने इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स में निवेश किया है।
बैंकों पर संकट: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कैनरा बैंक (Canara Bank) ने राजेश एक्सपोर्ट्स को दिए गए लोन को रीपेमेंट डिफॉल्ट (भुगतान में चूक) के बाद 'स्ट्रेस्ड एसेट' (Stressed Asset) की श्रेणी में डाल दिया है, जिससे बैंकिंग सेक्टर में भी खलबली है।
क्या काम करती है राजेश एक्सपोर्ट्स?
राजेश एक्सपोर्ट्स की शुरुआत 1988 में राजेश मेहता और प्रशांत मेहता नामक दो भाइयों ने एक पारिवारिक व्यवसाय के रूप में की थी। कंपनी का दावा है कि उन्होंने 1990 में भारत की पहली संगठित गोल्ड ज्वैलरी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी और 1994 में देश की सबसे बड़ी ज्वैलरी एक्सपोर्टर बनने का गौरव हासिल किया। 1995 में कंपनी का IPO आया था। आज यह कंपनी भारत भर में 80 से अधिक आउटलेट्स के साथ 'शुभ ज्वैलर्स' नाम की रिटेल चेन चलाती है और इसके पास स्विट्जरलैंड की मशहूर रिफाइनरी वैलकैम्बी (Valcambi SA) का मालिकाना हक भी है।
कंपनी की सफाई: 'कोई गड़बड़ी नहीं, यह सिर्फ कम्युनिकेशन गैप है'
इस बीच चौतरफा घिरी राजेश एक्सपोर्ट्स ने आज बीएसई (BSE) फाइलिंग में तमाम वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। कंपनी ने अपनी सफाई में कहा:
"कंपनी द्वारा घोषित रेवेन्यू पूरी तरह सही है और इसमें किसी भी तरह से बढ़ा-चढ़ाकर आंकड़े नहीं दिखाए गए हैं। यह पूरा मामला सेबी और कंपनी के बीच किसी तरह के 'कम्युनिकेशन गैप' (बातचीत की कमी) और भ्रम के कारण पैदा हुआ है। सेबी का यह आदेश अभी सिर्फ अंतरिम (Interim) है, और किसी भी पहलू पर कोई अंतिम या प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। हम सभी आवश्यक और प्रासंगिक दस्तावेज सौंपकर जल्द ही सेबी के सामने स्थिति साफ कर देंगे।"
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