चांदी में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट, कीमत 1 लाख रुपये से ज्यादा लुढ़की
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MCX के इतिहास की एक दिन की अब तक की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है

चांदी में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट, कीमत 1 लाख रुपये से ज्यादा लुढ़की

चांदी की कीमतों में छोटी-मोटी नहीं, 27% तक की बड़ी टूट देखने को मिली है। यह MCX के इतिहास की एक दिन की अब तक की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है।


4 लाख रुपये प्रति किलो बिक रही चांदी एक ही झटके में 2.91 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गई। ये सब हुआ MCX पर जोकि भारत का सबसे बड़ा कमोडिटी एक्सचेंज है और सोना-चांदी जैसी कमोडिटीज़ की कीमत तय करने में बड़ी भूमिका निभाता है। चांदी की कीमतों के रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद धड़ाम गिर जाने से पूरे बाज़ार में खलबली मची हुई है।

यह गिरावट कोई मामूली गिरावट नहीं है। चांदी की कीमतों में छोटी-मोटी नहीं, 27% तक की बड़ी टूट देखने को मिली है। यह MCX के इतिहास की एक दिन की अब तक की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। इस तेज गिरावट के पीछे मजबूत अमेरिकी डॉलर, सोने की कीमतों में गिरावट और मुनाफावसूली को मुख्य वजह बताया जा रहा है। हालांकि आगे चलकर चांदी में फिर से तेजी की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।

MCX पर क्या हुआ?

शुक्रवार को MCX पर सिल्वर मार्च फ्यूचर्स 91,973 रुपये यानी करीब 25% गिरकर 2,91,925 रुपये प्रति किलो पर बंद हुआ। पिछले साल 170% की शानदार तेजी दिखाने के बाद चांदी ने निवेशकों को चौंकाते हुए एक ही दिन में 27% या 1,07,968 रुपये की गिरावट दर्ज की।

यह गिरावट इतनी बड़ी थी कि कीमतें 3 लाख रुपये के स्तर से भी नीचे आ गईं, जबकि ठीक एक दिन पहले ही चांदी 4 लाख रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बड़ी गिरावट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट सिल्वर 28% टूटकर 85 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर आ गया। इससे पहले सप्ताह की शुरुआत में चांदी 121.60 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची थी। आखिर इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई? इसके पीछे 3 बड़ी वजहें मानी जा रही हैं।

1. मजबूत अमेरिकी डॉलर

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने केविन वॉर्श को नया अमेरिकी फेडरल चेयर नियुक्त किया। इस घोषणा के बाद अमेरिकी डॉलर में मई के बाद की सबसे बड़ी एकदिनी मजबूती देखी गई। डॉलर इंडेक्स फिर से 97 के ऊपर पहुंच गया, क्योंकि केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता को लेकर चिंताएं कुछ हद तक कम हुईं। मजबूत डॉलर सोने और चांदी दोनों के लिए नकारात्मक होता है, क्योंकि इन धातुओं की कीमतें वैश्विक स्तर पर डॉलर में तय होती हैं। डॉलर मजबूत होने पर विदेशी खरीदारों के लिए ये धातुएं महंगी हो जाती हैं, जिससे मांग घटती है। इसके अलावा, ऊंची ब्याज दरें भी चांदी जैसी बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों का आकर्षण कम कर देती हैं।

2. सोने की कीमतों में गिरावट का असर

चांदी की कीमतें अक्सर सोने के रुझान का अनुसरण करती हैं। सप्ताह की शुरुआत में सोना भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते स्पॉट गोल्ड करीब 5,600 डॉलर प्रति औंस तक चढ़ गया था। लेकिन शुक्रवार को इसमें तेज गिरावट आई और सोना 4.7% टूटकर 5,143.40 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।

MCX पर गोल्ड फरवरी फ्यूचर्स 12% या 20,514 रुपये गिरकर 1,50,440 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ।

3. मुनाफावसूली

बाज़ार के जानकार चांदी को लेकर सतर्क रुख अपनाने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा स्तरों पर चांदी की दिशा का अनुमान लगाना मुश्किल है और वे नई खरीदारी की सलाह नहीं दे रहे हैं। जिन निवेशकों के पास पहले से चांदी है, उन्हें 3 लाख रुपये प्रति किलो से नीचे ट्रेलिंग स्टॉप लॉस लगाने की सलाह दी गई है।

हालांकि उन्होंने यह भी माना कि तेजी का मोमेंटम बना रहा तो कीमतें 4.20 लाख से 4.50 लाख रुपये प्रति किलो या डॉलर में 140–150 डॉलर तक जा सकती हैं, लेकिन जोखिम अब काफी बढ़ गया है।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

अनुमानों के मुताबिक, अगर सप्लाई में कमी बनी रहती है और जियो-पॉलिटिकल जोखिम ऊंचे स्तर पर रहते हैं, तो चांदी में आगे भी तेजी जारी रह सकती है। अब चांदी को एक रणनीतिक और औद्योगिक रूप से अहम धातु माना जाने लगा है।

एक्सपर्ट बता रहे हैं कि चांदी ऐतिहासिक रूप से बेहद अस्थिर रही है, इसलिए कभी भी तेज करेक्शन से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि तकनीकी संकेतक बाजार के ओवरबॉट होने की ओर इशारा कर रहे हैं, जिससे शॉर्ट टर्म में गिरावट की संभावना बढ़ जाती है। भू-राजनीतिक हालात में स्थिरता, डॉलर की और मजबूती, निवेशकों की जोखिम लेने की भूख में कमी या खनन उत्पादन में सुधार से कीमतों पर दबाव आ सकता है।

कुछ जानकारों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता और शेयर बाजारों के कमजोर रिटर्न के दौर में सोना-चांदी की संयुक्त रणनीति पोर्टफोलियो में अब भी अहम भूमिका निभा सकती है। उनके मुताबिक, सोलर एनर्जी, आईटी और मेडिकल टेक्नोलॉजी में उपयोग के चलते चांदी एक डबल एज धातु है। पिछले पांच वर्षों से बनी सप्लाई की कमी 2026 तक जारी रहने की संभावना है।

इस भारी गिरावट के बावजूद, जनवरी महीने में चांदी अब भी मजबूत बढ़त की ओर बढ़ रही है और यह इसका अब तक का सबसे अच्छा मासिक प्रदर्शन माना जा रहा है। इसके साथ ही चांदी की लगातार नौ महीनों की तेजी का सिलसिला भी कायम है।

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