वीएफएस ग्लोबल का घिनौना खेल: वीजा के नाम पर यात्रियों से खुली लूट!
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वीएफएस ग्लोबल का घिनौना खेल: वीजा के नाम पर यात्रियों से खुली लूट!

हालांकि आवेदकों की रसीदें दर्शाती हैं कि प्रीमियम ऐड-ऑन से 30% राजस्व आता है, लेकिन पूर्व कर्मचारियों ने खुलासा किया है कि यात्रियों का शोषण करने के लिए उन पर भारी दबाव डाला जाता था।


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VFS Global : दुनिया की सबसे बड़ी वीजा आउटसोर्सिंग कंपनी वीएफएस ग्लोबल (VFS Global) एक बड़े विवाद में घिर गई है। यूरोप के खोजी पत्रकारिता संगठन 'लाइटहाउस रिपोर्ट्स' ने अपनी एक व्यापक रिपोर्ट में कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी एशिया, अफ्रीका और मिडिल ईस्ट के यात्रियों की मजबूरियों का फायदा उठा रही है। वह आवेदकों को जबरन बेहद महंगी और वैकल्पिक सेवाएं खरीदने के लिए मजबूर करती है।


कंपनी की कमाई का 30 फीसदी हिस्सा ऐड-ऑन से
लाइटहाउस रिपोर्ट्स और उसके 14 सहयोगी मीडिया संगठनों ने एक साल तक इस मामले की गहन जांच की। इस दौरान स्वीडन के दूतावासों से मिले करीब 2,000 से अधिक आवेदकों के बिलों और रसीदों की जांच की गई। इस जांच में सामने आया कि कंपनी की कुल कमाई का करीब 30 फीसदी हिस्सा अनिवार्य वीजा फीस से नहीं, बल्कि प्रीमियम ऐड-ऑन सर्विसेज (अतिरिक्त सेवाओं) को बेचकर आ रहा है।

पुणे की बुजुर्ग महिला से वसूली का सच
रिपोर्ट में पुणे की रहने वाली 71 वर्षीय बुजुर्ग महिला वृंदा की आपबीती साझा की गई है। वे पिछले साल जून में भारी बारिश और ट्रैफिक से जूझते हुए बेल्जियम में रह रहे अपने बेटे और नवजात पोती से मिलने के लिए वीजा आवेदन करने वीएफएस (VFS) केंद्र पहुंची थीं। पीठ दर्द के कारण वे अपनी अपॉइंटमेंट से महज 15 मिनट लेट हो गईं। वहां मौजूद अधिकारियों ने उनकी मजबूरी का फायदा उठाया।

जबरन बेची 4,000 रुपये की प्रीमियम सर्विस
अधिकारियों ने बुजुर्ग महिला के सामने दो ही रास्ते रखे। उन्होंने कहा कि या तो वे नया अपॉइंटमेंट बुक कराएं या फिर तुरंत प्रीमियम सर्विस के लिए करीब 35 यूरो (लगभग 4,000 रुपये) का अतिरिक्त भुगतान करें। लाचार होकर महिला को उनकी बात माननी पड़ी। रिपोर्ट के मुताबिक यह कोई अकेला मामला नहीं है। दुनिया भर के केंद्रों में पहली बार विदेश यात्रा करने वाले लोगों के साथ ऐसा व्यवहार आम है।

कम वेतन वाले स्टाफ पर सेल्स का भारी दबाव
वीएफएस ग्लोबल के पूर्व कर्मचारियों ने बताया कि कंपनी के भीतर एक बहुत ही आक्रामक और भ्रामक बिजनेस मॉडल काम करता है। केंद्र में काम करने वाले कर्मचारियों का बेस वेतन बेहद कम होता है। उन्हें हर महीने एसएमएस (SMS) अपडेट, कूरियर रिटर्न और प्रीमियम लाउंज जैसी वैकल्पिक सेवाएं बेचने का बड़ा टारगेट दिया जाता है। इस टारगेट को पूरा करने पर ही उन्हें बोनस मिलता है।

दूतावास का अधिकारी समझकर झांसे में आते हैं लोग
नाइजीरिया और केन्या के पूर्व वीएफएस कर्मचारियों ने बताया कि यह दबाव इतना ज्यादा होता है कि कई बार आवेदकों के बिल में बिना पूछे ही इन सेवाओं को जोड़ दिया जाता है। दिल्ली केंद्र में साल 2016-17 के दौरान काम कर चुके रोहित तनेजा ने बताया, "हमें आवेदकों को हर हाल में कूरियर और एसएमएस सर्विस लेने के लिए मनाना पड़ता था। लोग हमें दूतावास का अधिकारी समझकर हमारी हर बात पर भरोसा कर लेते थे।"

डेटा लीक और रिश्वतखोरी के भी गंभीर आरोप
जांच एजेंसी ने कंपनी पर यूरोपीय संघ के सख्त डेटा सुरक्षा कानून यानी जीडीपीआर (GDPR) के गंभीर उल्लंघन का भी आरोप लगाया है। रिपोर्ट के अनुसार आवेदकों के व्यक्तिगत डेटा को संभालने में बड़ी लापरवाही बरती गई है। इसके अलावा कांगो में किए गए एक अंडरकवर स्टिंग ऑपरेशन के दौरान वीएफएस का एक कर्मचारी अतिरिक्त पैसों के बदले गारंटीड वीजा दिलाने का सौदा करता हुआ भी कैमरे में कैद हुआ है।

वीएफएस ग्लोबल ने सभी आरोपों को नकारा
इस पूरे मामले पर वीएफएस ग्लोबल ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। कंपनी का कहना है कि उनकी वित्तीय प्रगति पूरी तरह से पारदर्शी और वैध है। किसी भी गलत आचरण के जरिए पैसा कमाने का दावा बिल्कुल झूठा है। बता दें कि साल 2001 में मुंबई से शुरू हुई यह कंपनी अब दुबई से संचालित होती है और दुनिया की 71 सरकारों के लिए वीजा प्रोसेसिंग का काम संभालती है।


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