चुनाव के बाद नहीं बढ़ेंगी पेट्रोल-डीजल की कीमतें, सरकार ने अटकलों को किया खारिज
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खुदरा पेट्रोल और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड चौथे साल भी स्थिर बनी हुई हैं, जबकि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी हैं। (फाइल फोटो)

चुनाव के बाद नहीं बढ़ेंगी पेट्रोल-डीजल की कीमतें, सरकार ने अटकलों को किया खारिज

ऐसी अटकलों ने इसलिए भी जोर पकड़ा था क्योंकि इनपुट लागत और पंप कीमतों के बीच बढ़ते अंतर के कारण सरकारी तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।


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सरकार ने मंगलवार को साफ किया कि पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को मतदान समाप्त होने के बाद कीमत बढ़ने की अटकलों को खारिज कर दिया।

खुदरा पेट्रोल और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड चौथे साल भी नहीं बढ़ी हैं, जबकि पिछले दो महीनों में पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें 50 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ चुकी हैं।

इनपुट लागत और पंप कीमतों के बीच बढ़ते अंतर की वजह से सरकारी तेल कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है। कुछ अनुमान के अनुसार यह नुकसान रोजाना करीब 2,400 करोड़ रुपये तक पहुंच रहा है। इसी कारण यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद कीमतें बढ़ सकती हैं।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में कहा, “पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।”

उन्होंने उस सवाल के जवाब में यह बात कही, जिसमें पूछा गया था कि क्या पश्चिम बंगाल में मतदान खत्म होने के बाद कीमतें बढ़ाई जाएंगी।

उन्होंने हालिया अफवाहों को भी खारिज किया, जिनकी वजह से आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में घबराहट में ईंधन खरीदने की स्थिति बन गई थी।

उन्होंने कहा, “कुछ जगहों पर पैनिक बायिंग देखी गई है। हम सभी राज्यों की सरकारों के संपर्क में हैं। सभी पेट्रोल पंपों पर नजर रखी जा रही है और जहां मांग ज्यादा है, वहां सप्लाई को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि स्टॉक की कमी न हो।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आंध्र प्रदेश में कीमत बढ़ने की अफवाह के कारण कई शहरों में लोग घबराकर ईंधन खरीदने लगे, जिससे रविवार को 400 से ज्यादा पेट्रोल पंप खाली हो गए।

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, कुछ जगहों पर मांग 30-33 प्रतिशत तक बढ़ गई।

उन्होंने यह भी कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी (रसोई गैस) और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) सहित सभी ईंधनों का पर्याप्त भंडार मौजूद है।

“हमारे पास LPG, पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त आपूर्ति है। कीमतें स्थिर हैं और कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने लोगों से अपील की, “अफवाहों पर भरोसा न करें, पैनिक बायिंग से बचें और आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें।”

यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है, जब सरकारी तेल कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ता जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, ये कंपनियां बाजार दर से कम कीमत पर पेट्रोल-डीजल बेच रही हैं, जिससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा है।

विश्लेषकों ने पहले अनुमान लगाया था कि चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमत में 25-28 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और अंतरराष्ट्रीय व घरेलू कीमतों के बीच अंतर भी बढ़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में उछाल 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले और उसके जवाब में तेहरान की व्यापक प्रतिक्रिया के बाद आया। इस प्रतिक्रिया से होर्मुज जलडमरूमध्य—जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में से एक है—प्रभावित हुआ। यह मार्ग दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के तेल व्यापार और बड़ी मात्रा में एलएनजी आपूर्ति को जोड़ता है।

पिछले सप्ताह सुजाता शर्मा ने कहा था कि सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 20 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 100 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है, क्योंकि चार साल से कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, जबकि वैश्विक तेल कीमतें बढ़ी हैं।

इसके बावजूद उन्होंने दोहराया कि कीमतें बढ़ाने की कोई योजना नहीं है।

पिछले साल कच्चे तेल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी, जो इस महीने औसतन 114 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई है।

खुदरा पेट्रोल और डीजल की कीमतें अप्रैल 2022 की शुरुआत से ही स्थिर हैं। इस दौरान कभी तेल की कीमतें बढ़ीं, तो कभी घटीं। जब कीमतें कम हुईं, तो सरकारी तेल कंपनियों ने अच्छा मुनाफा कमाया, जिसका इस्तेमाल उन्होंने बाद में नुकसान की भरपाई के लिए किया।

वर्तमान में दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 87.67 रुपये प्रति लीटर है।

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