खेती पर दोहरी मार: फर्टिलाइजर की किल्लत और El Nino से कमजोर मानसून, वित्त मंत्रालय की चेतावनी
x

खेती पर दोहरी मार: फर्टिलाइजर की किल्लत और El Nino से कमजोर मानसून, वित्त मंत्रालय की चेतावनी

वित्त मंत्रालय की मानें तो मिडिल ईस्ट तनाव का भारत के कृषि सेक्टर पर व्यापक असर देखने को मिल सकता है. उसपर आग में घी डालने का काम करेगा कमजोर मानसून जिसके चलते किसानों की मुश्किलें तो बढ़ेगी ही लेकिन उपभोक्ताओं पर महंगाई की मार पड़ेगी.


Click the Play button to hear this message in audio format

भारत के कृषि क्षेत्र के लिए संकट और चिंता वाली खबर है. अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमले के बाद मिडिल ईस्ट तनाव के चलते ना केवल देश में उर्वरक यानी फर्टिलाइजर की किल्लत हो सकती है जिसका असर फसलों के उत्पादन पर पड़ सकता है. बल्कि इस साल El Nino के चलते मानसून में सामान्य से कम बारिश होने के आसार के चलते खरीफ फसलों के उत्पादन पर भी बड़ा असर देखने को मिल सकता है.

देश में फर्टिलाइजर की कमी का संकट?

पश्चिम एशिया संकट (West Asia crisis) का बड़ा असर भारत के औद्योगिक विकास पर देखने को मिल रहा है खासकर उर्वरक (फर्टिलाइज़र) सेक्टर पर जो इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है. गैस (Gas) और केमिकल्स (Chemicals) की सप्लाई में आई दिक्कत के चलते फर्टिलाइजर सेक्टर पर ये संकट देखने को मिल रहा है. वित्त मंत्रालय ने कहा है, फर्टिलाइजर (Fertilisers) का मौजूदा उपलब्ध स्टॉक खरीफ सीजन (Kharif Season) के दौरान किए जाने वाले सप्लाई के लिए पर्याप्त है लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो रबी सीजन (Rabi season) के दौरान देश में फर्टिलाइजर की कमी का संकट पैदा हो सकता है.

दोगुनी महंगी हो गई यूरिया-अमोनिया

वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (Department Of Economic Affairs) ने अप्रैल 2026 के लिए अपना मंथली इकोनॉमिक रिव्यू (Monthly Economic Review) जारी किया है. और इस रिपोर्ट में जो बातें कही गई है वो सरकार के लिए चिंता बढ़ाने वाली है. DEA ने अपनी रिपोर्ट में कहा, इस क्राइसिस के चलते कई चीजों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. यूरिया (Urea) की कीमत एक साल में 390 डॉलर से बढ़कर 950 डॉलर प्रति टन हो गई है. अमोनिया (Ammonia) के दाम 365 डॉलर से बढ़कर 775 डॉलर हो गया है. सल्फर की कीमतों में 157 फीसदी का उछाल आया है. जबकि चिप्स (Dynamic RAM 1-Gigabit) की कीमतों में पिछले एक साल में 560 फीसदी तक की उछाल आ चुकी है. आठ प्रमुख उद्योगों का इंडेक्स (ICI) मार्च 2026 में 0.4% गिरा है. लेकिन गैस की सप्लाई की कमी के चलते फर्टिलाइजर के प्रोडक्शन में 24.6 फीसदी की बड़ी गिरावट आई है.

फर्टिलाइजर के लिए भारत खाड़ी देशों पर निर्भर

वित्त मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एनर्जी और फर्टिलाइजर की कमी लंबे समय तक रही तो मुश्किलें बढ़ सकती है. भारत सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि उर्वरक और अन्य जरूरी चीजों के लिए भी खाड़ी देशों पर निर्भर है. वेस्ट एशिया तनाव के चलते वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव साफ दिख रहा है. मार्च 2026 में पोर्ट ट्रैफिक सिर्फ 0.7% बढ़ा, जबकि अप्रैल तक जहाजों की आवाजाही 40.6% तक घट गई है.

मानसून में कम बारिश का अनुमान

इतना ही नहीं, वित्त मंत्रालय की मंथली इकोनॉमिक रिव्यू की मानें तो इस वर्ष सामान्य से कम मानसून रहने के चलते कृषि उत्पादन पर असर पड़ सकता है. एल नीनो (El Nino) की वजह से इस साल मानसून सामान्य से कम रहने का अनुमान है, जिससे कृषि क्षेत्र पर असर पड़ सकता है. एल नीनो के कारण इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कम रहने की संभावना है. ज्यादातर इलाकों में कम बारिश होने का अनुमान है. ऐसा हुआ तो महंगाई, सरकारी घाटा और विदेशी व्यापार घाटा बढ़ सकता है, जबकि आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ सकती है. वित्त मंत्रालय के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में ऑयल और गैस प्रोडक्शन सप्लाई इंफ्रास्ट्रक्चर को बड़ा नुकसान हुआ जिससे फिर से तैयार करने में कई महीने लगेंगे. ऐसे में बेहतर खरीफ फसलों के उत्पादन का सपोर्ट नहीं मिला तो इससे देश में महंगाई बढ़ने का जोखिम है.

जल्द महंगा होगा पेट्रोल डीजल?

मंथली इकोनॉमिक रिव्यू में वित्त मंत्रालय ने एक और बड़ी बात की ओर इशारा किया है. रिपोर्ट में कहा गया कि कच्चे तेल के दामों में तेज उछाल के बाद कुछ देशों ने इसका भार अपने ग्राहकों पर डाल दिया है. लेकिन कुछ देशों ने अभी तक अपने ग्राहकों पर भार नहीं डाला है लेकिन लंबे समय तक इसे टालना संभव नहीं है. आपको बता दें भारत भी उसी कड़ी में शामिल है. कच्चे तेल (Crude Oil) के दामों में तेज उछाल के बाद सरकार ने एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) में कटौती कर तेल कंपनियों को राहत दी लेकिन उपभोक्ताओं पर महंगे पेट्रोल डीजल का भार नहीं डाला. वित्त मंत्रालय की मानें तो भारत में भी पेट्रोल डीजल के दामों में बढ़ोतरी को टालना संभव नहीं है. वैसै ही भारत के लिए औसतन क्रूड ऑयल बास्केट की कीमत मार्च में 113 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर अप्रैल महीने में 115 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुंची है.

जारी रहेगी कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

वित्त मंत्रालय ने कच्चे तेल की कीमतों को लेकर आईएमएफ की रिपोर्ट का हवाला दिया है. अप्रैल महीने में आईएमएफ (IMF) ने अपना वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (World Economic Outlook 2026) जारी किया था. इस रिपोर्ट में आईएमएफ ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक अगर पश्चिम एशिया में तनाव छोटी अवधि के लिए रही तो साल 2026 में कच्चे तेल की औसतन कीमत 82 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है. लेकिन लंबी अवधि तक तनाव जारी रहा तो पूरे साल के लिए औसतन कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है. लेकिन तनाव लंबा खींचा और सप्लाई में व्यवधान अगले साल तक खींचा तो कच्चे तेल की औसतन कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है. 2025 में कच्चे तेल की औसत कीमत 67.74 डॉलर प्रति बैरल रही थी. वित्त मंत्रालय ने कहा, इससे महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो सकता है, खासकर उन देशों के लिए जो ईंधन के खपत के लिए आयात पर निर्भर हैं.

Read More
Next Story