
आगरा धर्मांतरण केस: पाकिस्तान कनेक्शन और शाहीन बाग से फंडिंग का खुलासा
आगरा में धर्मांतरण गैंग के नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। आरोपियों ने पाकिस्तान और कश्मीर तक फैले तार और शाहीन बाग-बाटला हाउस से जुड़े फंडिंग के सबूतों को कुबूल किया है।
Agra Conversion Case : उत्तर प्रदेश की आगरा पुलिस ने धर्मांतरण के एक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ करने का दावा किया है। पुलिस का दावा है कि पूछताछ में यह बात सामने आई है कि इस गैंग का नेटवर्क केवल स्थानीय नहीं है। इसके तार पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ साथ केंद्र शासित प्रदेश कश्मीर तक फैले हुए हैं। इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं। पकड़े गए चारों आरोपियों ने पूछताछ में कई चौंकाने वाली जानकारियां साझा की हैं।
फंडिंग के लिए दिल्ली कनेक्शन
पुलिस की माने तो गैंग के सदस्यों ने कुबूल किया है कि धर्मांतरण के काम के लिए पैसा दिल्ली से आता था। फंडिंग के मुख्य स्रोत दिल्ली के शाहीन बाग और बाटला हाउस इलाके बताए जा रहे हैं। आरोपी तलमीज उर रहमान ने बताया कि धर्मांतरण के लिए आने वाले पैसों और यात्रा के टिकटों का रिकॉर्ड डॉ. आदिल के पास रहता है। डॉ. आदिल दिल्ली के बाटला हाउस क्षेत्र में सक्रिय है। पुलिस अब इन वित्तीय कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।
पाकिस्तान और डिजिटल सबूत
पकड़े गए आरोपियों में से एक जतिन कपूर उर्फ जाशिक कपूर ने पुलिस को अहम जानकारी दी है। उसके पास एक टैब है जिसमें आर्थिक मदद का पूरा हिसाब-किताब दर्ज है। इस टैब में उन सभी लोगों के नाम हैं जो इस नेटवर्क को चला रहे हैं। जतिन ने यह भी माना कि वह पाकिस्तान के कुछ लोगों के साथ सीधा संपर्क रखता था। उन पाकिस्तानी नागरिकों के मोबाइल नंबर भी उसके डिजिटल टैब में सुरक्षित हैं।
रजिस्टर और गुप्त ठिकाने
पूछताछ में एक और आरोपी परवेज अख्तर ने बताया कि धर्मांतरण संबंधी लेनदेन के लिए एक खास रजिस्टर बनाया गया था। यह रजिस्टर मौलाना कलीम सिद्दीकी के दामाद के दवा केंद्र पर रखा जाता था। गिरफ्तारी के डर से इस रजिस्टर को शाहीन बाग के एक गुप्त ठिकाने पर छिपा दिया गया है। पुलिस टीम अब इस रजिस्टर की बरामदगी के लिए छापेमारी करने की योजना बना रही है ताकि ठोस कानूनी सबूत मिल सकें।
कश्मीर तक फैला सिंडिकेट
हसन मोहम्मद नामक आरोपी ने पुलिस को बताया कि इस गिरोह में मौलाना कलीम सिद्दीकी का दामाद मुख्य भूमिका निभा रहा है। उसने अपना नेटवर्क कश्मीर से लेकर देश के कई अन्य राज्यों में फैला रखा है। जांच में यह भी सामने आया है कि गैंग के सदस्यों के मोबाइल नंबर और अन्य विवरण राजस्थान के डींग इलाके में एक रिश्तेदार के घर छिपाए गए हैं। पुलिस इन नंबरों के जरिए नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश करेगी।
कोर्ट की कार्यवाही और रिमांड
मंगलवार को तीन दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड समाप्त होने पर आरोपियों को सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया। विवेचक रीता यादव ने कोर्ट को बताया कि अभी कई साक्ष्यों की बरामदगी बाकी है। अभियोजन अधिकारी बृजमोहन सिंह कुशवाह ने दलील दी कि आरोपियों से और पूछताछ जरूरी है। हालांकि, बचाव पक्ष के वकीलों ने जवाब देने के लिए समय मांगा है। अदालत ने फिलहाल चारों को जेल भेज दिया है और अगली सुनवाई 6 मई को होगी।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला आगरा के सदर इलाके की दो सगी बहनों के धर्मांतरण से शुरू हुआ था। पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए दिल्ली और राजस्थान से तलमीज उर रहमान, परवेज अख्तर, जतिन कपूर और हसन मोहम्मद को गिरफ्तार किया था। डीसीपी आदित्य सिंह के मुताबिक, पुलिस अब इस मामले के हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है ताकि इस पूरे सिंडिकेट को जड़ से खत्म किया जा सके।
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