
ट्विशा केस: CM का आश्वासन, पर कोर्ट ने ठुकराई दोबारा पोस्टमॉर्टम की मांग
भोपाल कोर्ट ने ट्विशा शर्मा के दोबारा पोस्टमॉर्टम की मांग खारिज की; सीएम मोहन यादव के आश्वासन के बावजूद परिवार को झटका, आरोपी पति को पासपोर्ट पर अल्टीमेटम।
Twisha Sharma's Re-Postmorterm: मध्य प्रदेश के हाई-प्रोफाइल ट्विशा शर्मा मौत मामले में बुधवार को मायके पक्ष को एक बहुत बड़ा कानूनी झटका लगा है। भोपाल की अदालत ने मृतका के परिजनों की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने दिल्ली एम्स में दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने की मांग की थी। हालांकि, बेशक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पीड़ित पक्ष को पूरा सहयोग करने और सीबीआई जांच की सिफारिश करने का कड़ा आश्वासन दिया था, लेकिन अदालत ने कानूनी आधार पर दोबारा से पोस्टमॉर्टम वाली उनकी मांग को सिरे से ठुकरा दिया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि साक्ष्यों की समीक्षा के बाद दोबारा ऑटोप्सी की अनुमति नहीं दी जा सकती। हालांकि, परिजनों को यह राहत दी गई है कि वे ट्विशा के पार्थिव शरीर को राज्य के किसी भी उचित शवगृह में सुरक्षित रख सकते हैं।
शव को गलने से बचाने के लिए चाहिए -80 डिग्री सेल्सियस तापमान, भोपाल में संकट
अदालत के इस फैसले के बाद ट्विशा के पार्थिव शरीर को सुरक्षित रखना डॉक्टरों और परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है:
तापमान की आवश्यकता: विशेषज्ञों के मुताबिक, शव को पूरी तरह नष्ट होने से बचाने के लिए अब -80 (माइनस 80 डिग्री) तापमान की सख्त जरूरत है।
भोपाल में चुनौती: वर्तमान में ट्विशा का शव एम्स भोपाल की मर्चुरी में -4(माइनस 4 डिग्री) पर रखा है।
भोपाल में -80 डिग्री तापमान की सुविधा न होने के कारण शव के खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
हाजिर नहीं हुए तो निरस्त होगा पासपोर्ट, आरोपी पति को कोर्ट का अल्टीमेटम
फरार आरोपियों पर शिकंजा कसने के लिए कोर्ट ने अब कड़ा रुख अपनाया है:
23 मई तक का समय: अदालत ने मुख्य आरोपी पति समर्थ सिंह (अधिवक्ता) को 23 मई 2026 तक हर हाल में पेश होने का आदेश दिया है।
पासपोर्ट पर खतरा: कटारा हिल्स पुलिस ने पासपोर्ट निरस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कोर्ट ने साफ कहा है कि यदि आरोपी तय तारीख पर पेश नहीं होता है, तो उसका पासपोर्ट तुरंत निरस्त कर दिया जाएगा।
CM के आश्वासन के बाद भी फंसा कानूनी पेंच
मुख्यमंत्री के ठोस आश्वासन के बावजूद कोर्ट का यह फैसला चौंकाने वाला है। सीएम मोहन यादव ने परिजनों से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई को पत्र लिखने और दिल्ली ले जाने के लिए सरकारी परिवहन की सुविधा देने का वादा किया था, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि दोबारा पोस्टमॉर्टम का अंतिम निर्णय अदालत ही करेगी।
अब कोर्ट के कड़े रुख के बाद परिवार की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। परिजनों और उनके वकील अंकुर पांडे का आरोप है कि पहली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में ट्विशा के शरीर पर मौजूद चोट के निशानों को छिपाने की कोशिश की गई थी, क्योंकि उस समय अस्पताल में ससुराल पक्ष के रसूख का इस्तेमाल किया गया था। फिलहाल, मामले की गंभीरता को देखते हुए गठित विशेष जांच दल (SIT) की जांच पर ही अब परिजनों की उम्मीदें टिकी हैं।
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