
मैक्स के पास नाश्ता करने गए थे, मालवीय नगर आग में पूरा परिवार खत्म
होटल 'फ्लोरिश स्टे बी एंड बी' अग्निकांड में गुरुग्राम के CA विवेक अग्रवाल समेत 8 परिजनों की मौत; खिड़कियों से कूदे लोग; सिर्फ अस्पताल में भर्ती बीमार पिता बचे।
Malviya Nagar Fire Incident: दक्षिणी दिल्ली के मालवीय नगर अस्पताल के पास बुधवार को हुए भीषण अग्निकांड में 21 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस महा-त्रासदी का सबसे डरावना और रूह कंपा देने वाला चेहरा गुरुग्राम से आए एक ही परिवार के साथ सामने आया, जिसके 8 सदस्यों की इस आग में जिंदा जलकर मौत हो गई।
गुरुग्राम के सेक्टर-46 (मकान नंबर 3169) के रहने वाले पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) विवेक अग्रवाल के पिता राधेश्याम अग्रवाल बीमार थे और दिल्ली के मैक्स अस्पताल में भर्ती थे। बुधवार सुबह विवेक के मौसा और मौसी भी पिता का हालचाल जानने दिल्ली आए थे। सुबह करीब साढ़े आठ बजे विवेक अपने पूरे परिवार और रिश्तेदारों को लेकर मैक्स अस्पताल के पास ही स्थित 'फ्लोरिश स्टे बी एंड बी' (Flourish Stay B&B) होटल के रेस्टोरेंट में नाश्ता करने गए थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि नाश्ते की यह मेज पूरे हंसते-खेलते परिवार के लिए आखिरी साबित होगी।
प्रशासनिक शह पर चल रहा था मौत का लाक्षागृह; सिर्फ बीमार पिता ही जिंदा बचे
दिल्ली देश की राजधानी है, यहाँ की पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है, डीडीए (DDA) केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय के अधीन आता है और एमसीडी (MCD) भी गृह मंत्रालय के अधीन आता है। इस समय दिल्ली में भाजपा की सरकार है, एमसीडी में भाजपा काबिज है और देश में तो है ही प्रधानमंत्री मोदी की सरकार। इन सबके बावजूद दिल्ली में सभी नियमों, सरकारों को धत्ता बताते हुए मनमाने ढंग से ऐसे लाक्षागृह चलाये जा रहे हैं, जिनके पास महज ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट का लाइसेंस है और वो शासन-प्रशासन की मिलीभगत से बजट होटल चला रहे हैं। न ही उनमें फायर सेफ्टी के इंतजाम हैं और न ही कोई और सुरक्षा व्यवस्था।
इस अवैध खेल की कीमत विवेक अग्रवाल के पूरे परिवार को चुकानी पड़ी। इस अग्निकांड में सीए विवेक अग्रवाल के साथ उनकी पत्नी तर्जनी, दोनों मासूम बेटियां जीविशा और वारिया, मां प्रेमलता, मौसा अशोक गोयल, मौसी कमला और परिवार की एक अन्य सदस्य झिमरी अग्रवाल की जिंदा जलने से मौत हो गई। दिल्ली के महावीर एनक्लेव निवासी प्रेम बंसल जब मैक्स अस्पताल पहुंचे, तो अपनी बेटी और दामाद के पूरे परिवार को खोने की खबर सुनकर उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इस पूरे हादसे में अग्रवाल परिवार से सिर्फ विवेक के बीमार पिता राधेश्याम अग्रवाल ही जिंदा बचे हैं, जो पहले से अस्पताल के बेड पर भर्ती थे। अब इस दुनिया में उनकी देखभाल करने वाला भी कोई नहीं बचा है।
'धमाकों से दहली इमारत, जान बचाने को खिड़कियों से कूद रहे थे लोग' प्रत्यक्षदर्शियों की आपबीती
होटल में आग इतनी तेजी से फैली कि अंदर ठहरे यात्रियों और नाश्ता कर रहे लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। स्थानीय निवासियों ने अंदर फंसे लोगों को बचाने के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी।
"मैंने एक के बाद एक कई जोरदार धमाकों जैसी आवाजें सुनीं। उसके तुरंत बाद इमारत के अंदर से चीख-पुकार मच गई। लोग खिड़कियों पर आकर मदद के लिए चिल्ला रहे थे। चारों तरफ भयंकर अफरा-तफरी थी। कुछ लोग आग की लपटों और धुएं से बचने के लिए सीधे खिड़कियों से नीचे कूदने लगे।"
- अनीता चौधरी, स्थानीय निवासी
आसपास के लोगों ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत इमारत की खिड़कियों के शीशे लोहे की रॉड से तोड़े और नीचे सड़क पर गद्दे बिछा दिए ताकि कूदने वाले लोगों की जान बचाई जा सके। मैक्स अस्पताल में कुल 39 लोगों को लाया गया था, जिनमें से 18 लोगों को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था, जबकि 3 अन्य ने बाद में दम तोड़ा।
सुलगते सवाल: 'ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट' की आड़ में चल रहा था 4 गुना बड़ा खेल?
इस हादसे ने एक बार फिर दिल्ली के भ्रष्ट प्रशासनिक तंत्र को बेनकाब कर दिया है।
लाइसेंस का दुरुपयोग: जिस इमारत में यह हादसा हुआ, उसे महज 'ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट' (B&B) योजना के तहत सीमित कमरों का लाइसेंस मिला था।
नियमों को धत्ता: शासन-प्रशासन और स्थानीय निकायों की मिलीभगत से इस चार मंजिला इमारत में तय मंजूरी से 4 गुना ज्यादा कमरे बनाकर धड़ल्ले से बजट होटल चलाया जा रहा था। होटल के भीतर न तो आपातकालीन निकास की व्यवस्था थी और न ही फायर सेफ्टी के पुख्ता इंतजाम थे, जिसके कारण यह होटल चंद मिनटों में इंसानी लाक्षागृह में तब्दील हो गया।

