
दिल्ली में अंतर्राज्यीय बच्चा चोर गैंग पकड़ा, महिला डॉक्टर समेत 13 गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस की ऑपरेशन्स यूनिट ने 5 नवजात बच्चों को रेस्क्यू कर अस्पताल की मालकिन डॉक्टर और मास्टर सप्लायर समेत 13 बच्चा तस्करों को गिरफ्तार किया है।
Child Trafficking Racket Burst Lady Doctor Arrested: सेंट्रल दिल्ली जिला पुलिस की ऑपरेशन्स यूनिट ने एक बड़े अंतर्राज्यीय मानव तस्करी (चाइल्ड ट्रैफिकिंग) सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में अस्पताल की मालकिन (महिला डॉक्टर) और गैंग के मास्टर सप्लायर समेत कुल 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस टीम ने दिल्ली, हरियाणा और मध्य प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में छापेमारी करके 5 मासूम नवजात बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया है। यह गिरोह दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे कई राज्यों में फैला हुआ था और बेहद संगठित तरीके से नवजात बच्चों का अवैध सौदा कर रहा था।
पहाड़गंज में पुलिस ने बिछाया जाल, डिकोय ऑपरेशन में पहली कामयाबी
सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के डीसीपी रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि इस बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस ने एक खुफिया सूचना के आधार पर 5 जून 2026 को आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास एक जाल बिछाया था। जिले के एंटी नारकोटिक्स सेल में तैनात एएसआई हेमेन्द्र राठी को मिली सूचना को और डेवेलप किया गया, जिसके बाद पुलिस टीम ने खुद नकली ग्राहक बनकर बच्चा खरीदने का नाटक किया। जैसे ही गिरोह के सदस्य 4-5 दिन के नवजात बच्चे को बेचने वहां पहुंचे, पुलिस ने ज्योति उर्फ कमलेश, शालू और ललित नाम के तीन आरोपियों को रंगे हाथों दबोच लिया। मौके से पुलिस ने टोकन मनी के 20 हजार रुपये भी बरामद किए।
पूछताछ में खुला कई राज्यों में फैला नेटवर्क
गिरफ्तार आरोपियों से जब अमर कॉलोनी और पहाड़गंज पुलिस की विंग ने कड़ाई से पूछताछ की, तो इस बड़े नेटवर्क की परतें खुलती चली गईं। पुलिस को पता चला कि ज्योति उर्फ कमलेश इस पूरे गिरोह की मुख्य को-ऑर्डिनेटर है, जो पहले भी मानव तस्करी और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के मामले में जेल जा चुकी है। इसके बाद पुलिस ने जाल बिछाकर प्रतिभा नाम की एक लैब टेक्नीशियन और विपिन नाम के ड्राइवर को भी गिरफ्तार किया। इनके पास से बच्चों को खरीदने के लिए रखे गए 2,92,400 रुपये कैश बरामद हुए।
अस्पताल की मालकिन डॉक्टर ही ढूंढती थी ग्राहक
इस सिंडिकेट की जांच में सबसे हैरान करने वाला खुलासा दिल्ली के बेगमपुर स्थित हीरा मल्टी स्पेशिलिटी हॉस्पिटल की मालकिन डॉ. विवेकी की गिरफ्तारी से हुआ है। डॉ. विवेकी (बीएससी नर्सिंग, एमएससी क्रिटिकल केयर और ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गाइनोकोलॉजी में डॉक्टरेट) अस्पताल में आने वाले निसंतान दंपतियों की पहचान करती थी। वह तस्करी कर लाए गए बच्चों को अपने अस्पताल में सुरक्षित रखती थी। इसके बाद वह निसंतान जोड़ों को लाखों रुपये में बच्चा बेचकर उनके फर्जी डिलीवरी और जन्म प्रमाण पत्र तैयार करवाती थी।
गुजरात से दबोचा गया मास्टर सप्लायर 'कालिया'
पुलिस ने इस मामले में तकनीकी सर्विलांस और एक लंबे पीछा के बाद 17 जून 2026 को गुजरात से इस गैंग के सबसे बड़े मास्टर सप्लायर सैबाभाई गमार उर्फ कालिया को गिरफ्तार किया। कालिया मूल रूप से उदयपुर (राजस्थान) का रहने वाला है। वह राजस्थान और गुजरात के आदिवासी इलाकों से नवजात बच्चों को अरेंज करके दिल्ली के इस सिंडिकेट को सप्लाई करता था। पुलिस के मुताबिक रेस्क्यू किए गए 5 बच्चों में से 4 बच्चे आदिवासी समुदायों के हैं, जबकि एक बच्चा दिल्ली का है।
डेढ़ लाख में खरीदकर 8 लाख रुपये तक में सौदा
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह सिंडिकेट लाखों रुपये का अवैध कारोबार चला रहा था। गिरोह के सदस्य गरीब या आदिवासी इलाकों से नवजात बच्चों को महज 1.5 लाख से 2 लाख रुपये में खरीदते थे। इसके बाद दिल्ली और आसपास के राज्यों में निसंतान दंपतियों को यही बच्चे 6 लाख से 8 लाख रुपये की भारी-भरकम कीमत पर बेचे जाते थे। पुलिस ने बच्चों को खरीदने वाले तीन परिवारों (ग्वालियर, पानीपत के खरीदार) को भी इस मामले में सह-आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया है।
रेस्क्यू किए गए सभी बच्चे सीडब्ल्यूसी को सौंपे
सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के डीसीपी रोहित राजबीर सिंह के मुताबिक, पहाड़गंज थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 143(4)/61(2)/3(5) और जुवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट की धारा 81 के तहत केस दर्ज किया गया है। रेस्क्यू किए गए सभी पांचों बच्चों को बाल कल्याण समिति (CWC) के सामने पेश किया गया है, जहां से उन्हें उचित देखरेख और पुनर्वास के लिए भेजा गया है। पुलिस टीम अब इन बच्चों के असली जैविक माता-पिता की पहचान करने और गिरोह के अन्य सदस्यों को पकड़ने में जुटी है। इस पूरे ऑपरेशन में एसीपी ऑपरेशन सेल पदम सिंह राणा की देख रेख में इंस्पेक्टर संदीप यादव की टीम ने काम किया।
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