
NCRB का चिंताजनक खुलासा, देश में रोज 16 महिलाएं चढ़ती हैं दहेज की बलि
एनसीआरबी की हालिया रिपोर्ट के अनुसार देश में हर दिन 16 महिलाएं दहेज की बलि चढ़ रही हैं। दिल्ली, यूपी और बिहार में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक बने हुए हैं।
Dowry Violence Cases In India: भारत में दहेज विरोधी कानून लागू होने के बावजूद इस कुप्रथा का खौफनाक चेहरा एक बार फिर सामने आया है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों ने देश को डरा दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार साल 2024 में भारत में कुल 5,737 दहेज हत्याएं दर्ज की गईं। इसका साफ मतलब है कि देश में हर दिन औसतन 16 महिलाओं की जान सिर्फ दहेज के लोभियों के कारण जा रही है।
महानगरों में दिल्ली लगातार पांचवीं बार टॉप पर
देश की राजधानी दिल्ली महिलाओं की सुरक्षा के दावों के बीच महानगरों की सूची में सबसे आगे खड़ी है। दिल्ली लगातार पांचवें साल दहेज हत्याओं के मामले में शीर्ष पर रही है। दिल्ली में साल 2024 के दौरान दहेज हत्या के 109 मामले दर्ज किए गए, जिनमें कुल 111 महिलाओं की मौत हुई। हालांकि, यह आंकड़ा साल 2023 की 114 मौतों और कोरोना काल यानी 2021 की 136 मौतों से थोड़ा कम जरूर है।
कानपुर और बेंगलुरु में भी डरावने हालात
राजधानी दिल्ली के बाद देश के अन्य बड़े शहरों की स्थिति भी बहुत खराब है। उत्तर प्रदेश का कानपुर शहर इस सूची में दूसरे नंबर पर है, जहां साल 2024 में दहेज हत्या के 54 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद दक्षिण भारत के प्रमुख तकनीकी केंद्र बेंगलुरु का नंबर आता है, जहां 25 मामले सामने आए। दिल्ली में दहेज हत्या की अपराध दर प्रति एक लाख की आबादी पर 1.4 दर्ज की गई है।
दक्षिण भारत के शहरों में राहत भरी तस्वीर
जहां उत्तर और मध्य भारत के बड़े शहरों में दहेज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं दक्षिण भारत से एक सकारात्मक तस्वीर भी सामने आई है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक चेन्नई और कोच्चि जैसे बड़े दक्षिणी शहरों में साल 2024 के दौरान दहेज हत्या का एक भी मामला दर्ज नहीं किया गया। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि देश के अलग-अलग हिस्सों में सामाजिक जागरूकता का स्तर काफी भिन्न है।
उत्तर प्रदेश और बिहार में सबसे ज्यादा मामले
राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश और बिहार इस सामाजिक बुराई के सबसे बड़े केंद्र बनकर उभरे हैं। साल 2023 में देशभर में दहेज निषेध अधिनियम के तहत कुल 15,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए, जो पिछले साल के मुकाबले 14 प्रतिशत अधिक थे। इसमें अकेले उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 7,151 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद बिहार में 3,665 मामले और कर्नाटक में 2,322 मामले दर्ज हुए।
नए कानून के तहत सख्त कार्रवाई का प्रावधान
कानूनी मोर्चे पर अब इन मामलों से निपटने के लिए कड़ी धाराएं जोड़ी गई हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80 (जो पहले आईपीसी की धारा 304बी थी) के तहत दहेज मृत्यु का केस दर्ज होता है। इसके तहत अगर किसी महिला की शादी के सात साल के भीतर असामान्य परिस्थितियों या संदिग्ध हालत में मौत होती है, और मौत से ठीक पहले उसे प्रताड़ित करने के सबूत मिलते हैं, तो उसे दहेज हत्या माना जाता है।
त्विषा और दीपिका की मौत से देश में गुस्सा
हाल ही में भोपाल और ग्रेटर नोएडा में हुई दो घटनाओं ने देश की आत्मा को झकझोर कर रख दिया है। नोएडा की रहने वाली 33 वर्षीय त्विषा शर्मा की शादी दिसंबर 2025 में भोपाल में हुई थी। महज कुछ महीनों बाद 12 मई को उनका शव मिला। उनकी मां के साथ हुई व्हाट्सएप चैट ने सबको रुला दिया, जिसमें उन्होंने लिखा था कि "मुझे बहुत ज्यादा घुटन हो रही है मां"। परिवार ने ससुराल वालों पर हत्या का आरोप लगाया है।
शादी में 1 करोड़ खर्च करने पर भी प्रताड़ना
ऐसी ही एक अन्य दुखद घटना ग्रेटर नोएडा की है, जहां 24 वर्षीय दीपिका नागर की शादी के 18 महीने बाद संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। दीपिका के परिवार का दावा है कि उन्होंने शादी में करीब 1 करोड़ रुपये खर्च किए थे, लेकिन फिर भी और पैसों की मांग की जा रही थी। इस मामले में पुलिस ने पति ऋतिक और ससुर मनोज को गिरफ्तार कर लिया है। इन मामलों ने साबित किया है कि शिक्षा और पैसा भी इस कुप्रथा को नहीं रोक पा रहे हैं।
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