सरहदें नहीं रोक पाईं इंसाफ: गोवा में ऑनलाइन गवाही के आधार पर पहली सजा
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ये प्रतीकात्मक तस्वीर है, एआई द्वारा बनायीं गयी है.

सरहदें नहीं रोक पाईं इंसाफ: गोवा में ऑनलाइन गवाही के आधार पर पहली सजा

गोवा की अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग गवाही को माना पुख्ता सबूत। खाड़ी देश से दूतावास के जरिए जुड़ी पीड़िता, आरोपी तौफीक कोटूर को 10 साल की जेल और जुर्माना।


Goa Court's Decision On Digital Evidence : गोवा की आपराधिक न्याय प्रणाली ने एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित किया है। न्याय की राह में भौगोलिक सीमाओं को पीछे छोड़ते हुए, राज्य की एक अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। यह पहला ऐसा मामला बन गया है जहां विदेश में रह रही पीड़िता की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दी गई गवाही को अदालत ने न केवल स्वीकार किया, बल्कि उसे सजा का मुख्य आधार भी माना। इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि अब अपराधी इस बात का फायदा नहीं उठा पाएंगे कि पीड़िता देश से बाहर है।


डिजिटल गवाही बना सजा का ठोस आधार
अक्सर गंभीर अपराधों, विशेषकर बलात्कार के मामलों में कानूनी प्रक्रिया तब कमजोर पड़ जाती है जब पीड़िता ट्रायल के दौरान देश छोड़कर चली जाती है। ऐसे में गवाहों के अभाव में आरोपी बच निकलते हैं। लेकिन गोवा के इस मामले ने पूरी व्यवस्था को एक नई दिशा दी है। पीड़िता ने खाड़ी देश में स्थित भारतीय दूतावास से वीडियो कॉल के जरिए अदालत के सामने अपनी बात रखी। अदालत ने इस डिजिटल गवाही को भौतिक उपस्थिति के समान ही महत्व दिया और सबूतों की कड़ी को जोड़ते हुए आरोपी को दोषी पाया।

10 साल का कठोर कारावास और जुर्माना
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बैना निवासी तौफीक कोटूर को इस अपराध के लिए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी ने पीड़िता के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए और फिर शादी का झांसा देकर उसका लगातार यौन शोषण किया। अदालत ने आरोपी पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जो मुआवजे के रूप में पीड़िता को दिया जाएगा। यह फैसला उन पीड़िताओं के लिए एक बड़ी उम्मीद है जो न्याय के लिए देश लौटने में असमर्थ होती हैं।

अंतरराष्ट्रीय तालमेल की अनूठी मिसाल
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे कई सरकारी तंत्रों का बेहतरीन तालमेल रहा। विदेश मंत्रालय, गोवा सरकार, खाड़ी देश में भारतीय दूतावास और 'विक्टिम असिस्टेंस यूनिट' (VAU) ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि गवाही बिना किसी तकनीकी या कानूनी बाधा के पूरी हो। VAU के प्रभारी एमिडियो पिन्हो ने बताया कि पहली बार गोवा में किसी आरोपी को इस तरह सजा दिलवाई गई है। इस प्रक्रिया में पीड़िता की संवेदनशीलता और कानूनी नियमों का पूरी तरह पालन किया गया।

अपराधियों के लिए सख्त संदेश: न्याय की कोई सीमा नहीं
मामले की शुरुआत 2015-16 में हुई थी, जब आरोपी ने एक सेल्स गर्ल के रूप में काम करने वाली युवती को अपनी हवस का शिकार बनाया था। सालों तक चले इस कानूनी संघर्ष का अंत अब एक नजीर के रूप में हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में ऐसे तमाम मामलों के लिए रास्ता खोलेगा जहां पीड़िताएं अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर रहती हैं। यह संदेश साफ है कि इंसाफ मिलने की राह में देश की सरहदें अब बाधा नहीं बनेंगी।


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